दमोह में 'पीएम सूर्य घर योजना' से ऊर्जा क्रांति: सोलर पैनल ने घटाए बिजली के बिल और बढ़ाई आमदनी
सारांश
Key Takeaways
- सौर ऊर्जा का उपयोग करके बिजली खर्च में भारी कमी।
- 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी उपलब्ध।
- आमदनी के नए रास्ते खोलने वाली योजना।
- सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा का स्रोत।
- आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने का कदम।
दमोह, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केंद्र सरकार की 'पीएम सूर्य घर योजना' अब एक ऊर्जा क्रांति का प्रतीक बन चुकी है। यह योजना अब गांवों और शहरों में लोगों के लिए न केवल राहत, बल्कि आर्थिक आय के नए अवसर भी प्रदान कर रही है।
दमोह जिले के तेंदूखेड़ा नगर में इस योजना का प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यहां के विभिन्न वार्डों के निवासियों ने अपने घरों की छतों पर 3 किलोवाट तक के सौर पैनल लगवाए हैं। इन सौर ऊर्जा सिस्टम ने न केवल उनके बिजली के बिलों को आधा कर दिया है, बल्कि कई परिवारों को लगभग मुफ्त बिजली का लाभ भी मिलने लगा है।
गर्मी के मौसम में जब बिजली उपभोक्ताओं को भारी बिलों का सामना करना पड़ता था, अब सोलर पैनल के उपयोग से उन्हें बड़ी राहत मिली है। बिजली खर्च में भारी कमी आई है, जिससे आम परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
इस योजना की विशेषता यह है कि केंद्र सरकार की ओर से 78 हजार रुपए तक की सब्सिडी दी जा रही है, जो सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में ट्रांसफर होती है। इसके अलावा, शून्य प्रतिशत ब्याज पर बैंक फाइनेंस की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे हर जरूरतमंद व्यक्ति इस योजना का लाभ आसानी से उठा सकता है।
एक लाभार्थी स्वप्निल जैन ने राष्ट्र प्रेस को बताया कि उन्हें पोस्ट ऑफिस विभाग के माध्यम से जानकारी मिली कि 3 किलो वाट के सोलर पैनल पर 78 हजार रुपए की सब्सिडी प्राप्त हो रही है। इसके बाद उन्होंने इस योजना का लाभ लेने के लिए वेंडर से संपर्क किया और अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाया। पहले जो बिल 4 से 5 हजार रुपए तक पहुंच जाता था, अब वह महज 400 से 500 रुपए आता है।
स्वप्निल जैन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का धन्यवाद करते हुए कहा कि भारत को सशक्त बनाने के लिए इस प्रकार की योजना का क्रियान्वयन बहुत आवश्यक है।
वहीं, एक अन्य लाभार्थी संतोष यादव ने कहा कि उन्होंने मोबाइल फोन में देखा कि बहुत से लोग 'पीएम सौर घर योजना' का लाभ ले रहे हैं। इसके बाद उन्होंने भी सोलर पैनल लगवाया। जो बिल दो से तीन हजार रुपए आता था, अब वह 400 से 500 रुपए आता है।
घर की छत पर लगे सौर पैनल प्रतिदिन लगभग 25 से 30 यूनिट बिजली उत्पादन कर रहे हैं। इस बिजली को स्टोर करने के लिए विशेष मीटर लगाया जाता है, जिससे अतिरिक्त बिजली सीधे विद्युत विभाग को भेजी जाती है। इसके बदले उपभोक्ताओं को आर्थिक लाभ भी मिलता है।
लाभार्थी संतोष यादव ने बताया कि उनके घर पर स्थापित सोलर पैनल प्रतिदिन लगभग 25 से 28 मिनट बिजली बनाते हैं। इस बिजली को स्मार्ट मीटर के जरिए सीधे विद्युत विभाग को ट्रांसफर किया जाता है। सालाना विद्युत विभाग में जमा हुई बिजली का भुगतान सीधे लाभार्थी के खाते में किया जाता है। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल योजना की एक और सुविधा यह है कि प्रतिदिन बनने वाली बिजली को मोबाइल ऐप के माध्यम से देखा जा सकता है।
कुल मिलाकर, 'पीएम सूर्य घर योजना' दमोह में आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है। यह योजना न केवल लोगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बना रही है और उनकी आय के नए रास्ते भी खोल रही है।