24 अगस्त 2026
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कॉप17 में 'चाइना पवेलियन': मरुस्थलीकरण नियंत्रण में चीन की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ उलानबातर में प्रदर्शित

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कॉप17 में 'चाइना पवेलियन': मरुस्थलीकरण नियंत्रण में चीन की ऐतिहासिक उपलब्धियाँ उलानबातर में प्रदर्शित

सारांश

उलानबातर में यूएनसीसीडी कॉप17 के दौरान चीन ने 'चाइना पवेलियन' में अपनी 'थ्री-नॉर्थ' वानिकी परियोजना और दशकों के मरुस्थलीकरण नियंत्रण प्रयासों को प्रदर्शित किया। चीन भूमि क्षरण में 'शून्य वृद्धि' हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बन चुका है — एक उपलब्धि जो वैश्विक पर्यावरण नीति के लिए मॉडल बन सकती है।

मुख्य बातें

यूएनसीसीडी कॉप17 सम्मेलन मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में आयोजित हो रहा है।
चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 'चाइना पवेलियन' प्रदर्शनी में 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना सहित मरुस्थलीकरण नियंत्रण की उपलब्धियाँ प्रस्तुत कीं।
चीन के कुल भूभाग का लगभग एक चौथाई हिस्सा मरुस्थलीकृत है, लेकिन आधी सदी के प्रयासों से रेतीली भूमि का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है।
चीन भूमि क्षरण में 'शून्य वृद्धि' हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है।
चीनी प्रतिनिधिमंडल ने सम्मेलन के दौरान लगभग 20 विषयगत सह-कार्यक्रम आयोजित किए।

यूएनसीसीडी कॉप17 सम्मेलन के दौरान मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में चीनी प्रतिनिधिमंडल ने 'चाइना पवेलियन' नामक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की, जिसमें मरुस्थलीकरण नियंत्रण एवं रोकथाम के क्षेत्र में चीन की दशकों की उपलब्धियों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया। 24 अगस्त को आयोजित इस प्रदर्शनी को विभिन्न देशों के अधिकारियों, विशेषज्ञों और अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों की व्यापक सराहना मिली।

प्रदर्शनी में क्या दिखाया गया

इस प्रदर्शनी में चित्रों, वीडियो और भौतिक प्रदर्शनों के माध्यम से 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना सहित अन्य नवोन्मेषी पद्धतियों को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। घास के मैदानों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक मरुस्थलीकरण नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में चीन के व्यावहारिक अनुभवों को भी साझा किया गया।

गौरतलब है कि 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना चीन के तीन प्रमुख क्षेत्रों — उत्तर-पश्चिम, उत्तरी चीन और पश्चिमी उत्तर-पूर्व — में कार्यान्वित एक बड़े पैमाने की कृत्रिम वानिकी पारिस्थितिक परियोजना है। इसका मुख्य उद्देश्य हवा और रेत से होने वाले खतरों तथा मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करना और पारिस्थितिक पर्यावरण में सुधार लाना है।

चीन की ऐतिहासिक उपलब्धि

चीनी राष्ट्रीय वानिकी एवं घास-मैदान प्रशासन के मरुस्थलीकरण रोकथाम एवं नियंत्रण विभाग के निदेशक हुआंग थ्साईयी ने बताया कि चीन के कुल भूभाग का लगभग एक चौथाई हिस्सा मरुस्थलीकृत है। उन्होंने कहा कि आधे सदी से अधिक के निरंतर प्रयासों के बाद देश ने 'रेत आगे बढ़ती है, जबकि लोग पीछे हटते हैं' से 'हरियाली आगे बढ़ती है और रेत पीछे हटती है' की ओर एक ऐतिहासिक परिवर्तन हासिल किया है।

निदेशक हुआंग के अनुसार, चीन में मरुस्थलीकृत और रेतीली भूमि का क्षेत्रफल लगातार घटता जा रहा है, जिससे चीन भूमि क्षरण में 'शून्य वृद्धि' हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है। यह उपलब्धि वैश्विक पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।

सह-कार्यक्रम और अंतर्राष्ट्रीय संवाद

सम्मेलन के दौरान चीनी प्रतिनिधिमंडल ने लगभग 20 विषयगत सह-कार्यक्रमों का भी आयोजन किया। इनमें 'मरुस्थलीकरण नियंत्रण को सशक्त बनाने में विज्ञान: चीन की हरित महान दीवार की अभिनव पद्धतियाँ' विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा।

विभिन्न देशों के अधिकारियों, विशेषज्ञों, विद्वानों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों और मीडियाकर्मियों ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और विचारों का आदान-प्रदान किया।

यूएनसीसीडी कॉप17 का महत्व

मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीसीडी) के हस्ताक्षरकर्ता देशों का यह 17वाँ सम्मेलन (कॉप17) मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में आयोजित हो रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण की चुनौतियाँ तेज़ी से बढ़ रही हैं। चीन का अनुभव और 'थ्री-नॉर्थ' जैसी परियोजनाएँ अन्य प्रभावित देशों के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में देखी जा रही हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन कॉप17 जैसे अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर इसकी प्रस्तुति को केवल कूटनीतिक सॉफ्ट पावर के नज़रिए से भी देखा जाना चाहिए। 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना के पारिस्थितिक लाभों के साथ-साथ स्वतंत्र वैज्ञानिक समीक्षाओं में जैव विविधता और स्थानीय जल संसाधनों पर इसके मिश्रित प्रभावों की भी चर्चा होती रही है। वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए चीन का अनुभव प्रेरक हो सकता है, परंतु इसे अपनाने से पहले स्थानीय पारिस्थितिक परिस्थितियों की गहन समझ आवश्यक है।
RashtraPress
24 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूएनसीसीडी कॉप17 क्या है और यह कहाँ हो रहा है?
यूएनसीसीडी कॉप17 'मरुस्थलीकरण से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र संधि' के हस्ताक्षरकर्ता देशों का 17वाँ सम्मेलन है, जो मंगोलिया की राजधानी उलानबातर में आयोजित हो रहा है। यह सम्मेलन वैश्विक स्तर पर भूमि क्षरण और मरुस्थलीकरण से निपटने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श के लिए प्रमुख अंतर्राष्ट्रीय मंच है।
चीन की 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना क्या है?
'थ्री-नॉर्थ' परियोजना चीन के उत्तर-पश्चिम, उत्तरी चीन और पश्चिमी उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में कार्यान्वित एक बड़े पैमाने की कृत्रिम वानिकी पारिस्थितिक परियोजना है। इसका उद्देश्य हवा और रेत से होने वाले खतरों, मिट्टी के कटाव को नियंत्रित करना और पारिस्थितिक पर्यावरण में सुधार लाना है।
चीन ने मरुस्थलीकरण नियंत्रण में क्या ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है?
चीन भूमि क्षरण में 'शून्य वृद्धि' हासिल करने वाला विश्व का पहला देश बन गया है। आधे सदी से अधिक के निरंतर प्रयासों के बाद देश में मरुस्थलीकृत और रेतीली भूमि का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है।
'चाइना पवेलियन' में क्या प्रदर्शित किया गया?
प्रदर्शनी में चित्रों, वीडियो और भौतिक प्रदर्शनों के माध्यम से 'थ्री-नॉर्थ' परियोजना, घास के मैदानों के संरक्षण एवं पुनर्स्थापन, वैज्ञानिक मरुस्थलीकरण नियंत्रण और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के परिणामों में चीन के अनुभव साझा किए गए। इसके अलावा लगभग 20 विषयगत सह-कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
कॉप17 में चीन की भागीदारी क्यों महत्वपूर्ण है?
चीन के कुल भूभाग का लगभग एक चौथाई हिस्सा मरुस्थलीकृत होने के बावजूद उसने दशकों के प्रयासों से इसे नियंत्रित करने में सफलता पाई है। यह अनुभव अन्य मरुस्थलीकरण-प्रभावित देशों के लिए एक संभावित मॉडल के रूप में वैश्विक मंच पर प्रासंगिक है।
राष्ट्र प्रेस
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