चीन का मरुस्थलीय भूभाग प्रतिवर्ष 1 करोड़ म्यू घट रहा, थ्री-नॉर्थ परियोजना बनी गेमचेंजर
सारांश
मुख्य बातें
चीन के राष्ट्रीय वन एवं घासभूमि प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, देश का मरुस्थलीय भूभाग अब प्रतिवर्ष 1 करोड़ म्यू की दर से घट रहा है — जो पिछली शताब्दी के अंत में देखी गई 51.5 लाख म्यू की वार्षिक वृद्धि के बिल्कुल विपरीत है। मरुस्थलीकरण और सूखा निवारण के लिए विश्व दिवस (17 जून) के अवसर पर जारी यह जानकारी दशकों की हरित नीतियों की सफलता को रेखांकित करती है।
मुख्य आंकड़े और उपलब्धियाँ
आंकड़ों के अनुसार, चीन के आठ प्रमुख मरुस्थलों और चार प्रमुख रेतीले क्षेत्रों में वायु अपरदन की कुल मात्रा वर्ष 2000 की तुलना में लगभग 40% कम हो गई है। रेतीले क्षेत्रों में औसत वनस्पति आवरण 21.17% तक पहुँच गया है, जो 10 वर्ष पूर्व की तुलना में 2.84% की वृद्धि दर्शाता है।
उल्लेखनीय है कि थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट परियोजना — जो उत्तर-पश्चिम, उत्तर और उत्तर-पूर्व चीन में निर्मित एक कृत्रिम वानिकी पारिस्थितिक परियोजना है — के क्षेत्र में वन और घासभूमि आवरण दर 40.76% तक पहुँच गई है। इसके अलावा, प्रबंधनीय मरुस्थलीय भूमि के 67.82% हिस्से का उपचार पूरा किया जा चुका है।
थ्री-नॉर्थ परियोजना में निवेश और कार्यान्वयन
हाल के वर्षों में चीन ने थ्री-नॉर्थ शेल्टरबेल्ट परियोजना के तीन महत्वपूर्ण चरणों के शुभारंभ के बाद से केंद्र सरकार द्वारा कुल 88.9 अरब युआन का निवेश आवंटित किया गया है। इस दौरान 544 प्रमुख परियोजनाएँ संगठित और कार्यान्वित की गई हैं, और 24.4 करोड़ म्यू के निर्माण कार्य पूरे किए गए हैं।
गौरतलब है कि यह परियोजना मरुस्थलीकरण नियंत्रण को व्यापक रूप से बढ़ावा देने के लिए चीन की दीर्घकालिक पर्यावरण नीति का केंद्रबिंदु रही है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर मरुस्थलीकरण एक गंभीर पर्यावरणीय चुनौती बनी हुई है और संयुक्त राष्ट्र भी इस पर चिंता व्यक्त कर चुका है।
वैश्विक संदर्भ में महत्व
एक म्यू लगभग 0.0667 हेक्टर के बराबर होता है, यानी प्रतिवर्ष 1 करोड़ म्यू की कमी लगभग 6.67 लाख हेक्टर भूमि के पुनरुद्धार के बराबर है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह उपलब्धि न केवल चीन के लिए बल्कि वैश्विक पर्यावरण संरक्षण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल है।
आगे की राह
आंकड़ों के अनुसार, मरुस्थलीकरण नियंत्रण में यह प्रगति चीन की दशकों लंबी वानिकी और घासभूमि पुनर्स्थापना नीतियों का परिणाम है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यही गति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में रेतीले क्षेत्रों में वनस्पति आवरण में और सुधार संभव है।