25 अगस्त 2026
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बिहार भर्ती परीक्षा विवाद: तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, पेपर लीक और देरी पर मांगा जवाब

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बिहार भर्ती परीक्षा विवाद: तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, पेपर लीक और देरी पर मांगा जवाब

सारांश

बिहार में पेपर लीक, परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम विलंब से लाखों अभ्यर्थी परेशान हैं। तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर टीआरई-4, बीपीएससी और बीएसएससी समेत दर्जनों परीक्षाओं में पारदर्शिता, समयबद्धता और स्वतंत्र जाँच की माँग की है।

मुख्य बातें

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर बिहार की भर्ती परीक्षाओं में सुधार की माँग की।
पत्र में पेपर लीक , परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम विलंब से प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों की चिंताएँ उठाई गई हैं।
शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को एकल परीक्षा के रूप में आयोजित करने और 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' नीति लागू करने की माँग।
बीपीएससी में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ कथित भेदभाव समाप्त करने और विवादित परीक्षाओं की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच की माँग।
सभी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर जारी करने और बीएसएससी, सीजीएल, लेखपाल समेत लंबित परीक्षाओं की तिथियाँ शीघ्र घोषित करने की माँग।
यादव ने चेतावनी दी कि माँगें न मानी गईं तो गर्दनीबाग धरना और तेज होगा।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 24 अगस्त 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त अनियमितताओं — पेपर लीक, परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम जारी करने में विलंब — पर तत्काल कार्रवाई की माँग की है। उनके अनुसार इन समस्याओं ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों योग्य अभ्यर्थियों में गहरी निराशा और असंतोष पैदा किया है।

मुख्य घटनाक्रम

यादव ने पत्र लिखने से पहले पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आंदोलनरत छात्र-अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी माँगें सुनीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार इन युवाओं से सकारात्मक संवाद स्थापित करे और उनकी माँगों का शीघ्र समाधान निकाले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो छात्रों की एकजुटता सरकार को कार्रवाई के लिए बाध्य करेगी।

परीक्षा सुधार की प्रमुख माँगें

पत्र में यादव ने माँग की कि शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को एकल परीक्षा के रूप में आयोजित किया जाए और 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' की नीति सख्ती से लागू की जाए। उन्होंने एलईटी और बीईटी परीक्षाओं का नियमित आयोजन निश्चित समयसीमा के भीतर सुनिश्चित करने की भी माँग की।

इसके अलावा, बीएसएससी इंटरमीडिएट, सीजीएल, एएसओ, बीएसओ, लाइब्रेरियन और लेखपाल सहित सभी लंबित परीक्षाओं की तिथियाँ शीघ्र घोषित करने और समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर अनिवार्य रूप से जारी करने की माँग रखी गई।

भेदभाव और पारदर्शिता का मुद्दा

यादव ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ कथित भेदभाव को तत्काल समाप्त करने की माँग की। उन्होंने दारोगा, सिपाही, बीएसएससी और बीपीएससी समेत अन्य परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने पर जोर दिया। पूर्व में विवादों में रही परीक्षाओं की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच कराने और कथित भर्ती माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग भी पत्र में शामिल है।

अन्य प्रमुख माँगें

नेता प्रतिपक्ष ने सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, आयु सीमा में छूट, आरक्षण और डोमिसाइल नीति के सख्ती से पालन तथा अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा संरक्षण पर तत्काल निर्णय लेने की माँग रखी। साथ ही विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता सुनिश्चित करते हुए शैक्षणिक सत्र नियमित करने पर भी बल दिया।

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं और गर्दनीबाग में छात्रों का धरना जारी है। गौरतलब है कि पेपर लीक और परीक्षा रद्दीकरण की घटनाएँ बिहार में पिछले कई वर्षों से सुर्खियाँ बटोरती रही हैं। अब सरकार की प्रतिक्रिया और उसके क्रियान्वयन पर लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

फिर भी प्रणालीगत सुधार की गति धीमी रही है। तेजस्वी यादव का यह पत्र राजनीतिक दबाव की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन असली सवाल यह है कि विपक्ष की माँगें सरकार को ठोस नीतिगत बदलाव के लिए बाध्य कर पाएँगी या केवल चुनावी बयानबाजी बनकर रह जाएँगी। 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' जैसी माँगें सिद्धांत में आकर्षक हैं, लेकिन क्रियान्वयन की रूपरेखा के बिना ये खोखली साबित हो सकती हैं। जब तक परीक्षा संचालन में जवाबदेही का कोई स्वतंत्र तंत्र नहीं बनता, लाखों युवाओं का भविष्य राजनीतिक तकरार की भेंट चढ़ता रहेगा।
RashtraPress
25 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

तेजस्वी यादव ने बिहार CM को पत्र क्यों लिखा?
तेजस्वी यादव ने बिहार में सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक, परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम विलंब से प्रभावित लाखों अभ्यर्थियों की समस्याओं को उठाने के लिए 24 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा। उन्होंने गर्दनीबाग धरना स्थल पर छात्रों से मिलने के बाद यह कदम उठाया।
पत्र में तेजस्वी यादव की प्रमुख माँगें क्या हैं?
पत्र में टीआरई-4 को एकल परीक्षा के रूप में आयोजित करना, 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' नीति, वार्षिक परीक्षा कैलेंडर, बीपीएससी में कथित भेदभाव समाप्त करना, विवादित परीक्षाओं की स्वतंत्र जाँच और भर्ती माफियाओं पर कड़ी कार्रवाई शामिल हैं।
बिहार में किन परीक्षाओं पर विवाद है?
बीपीएससी सिविल सेवा, बीएसएससी इंटरमीडिएट, सीजीएल, एएसओ, बीएसओ, लाइब्रेरियन, लेखपाल, दारोगा और सिपाही भर्ती परीक्षाएँ विवादों में रही हैं। इनमें पेपर लीक, परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम में अनावश्यक देरी के आरोप लगे हैं।
गर्दनीबाग धरना क्या है और इसमें कौन शामिल हैं?
गर्दनीबाग धरना स्थल पटना में वह जगह है जहाँ सरकारी भर्ती परीक्षाओं में सुधार की माँग को लेकर छात्र-अभ्यर्थी आंदोलन कर रहे हैं। तेजस्वी यादव ने पत्र लिखने से पहले इन्हीं आंदोलनरत युवाओं से मुलाकात की थी।
बिहार सरकार की इस पर क्या प्रतिक्रिया है?
अभी तक मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी या बिहार सरकार की ओर से तेजस्वी यादव के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। सरकार की प्रतिक्रिया और उसके बाद उठाए जाने वाले कदमों पर लाखों अभ्यर्थियों की नजरें टिकी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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