बिहार भर्ती परीक्षा विवाद: तेजस्वी यादव ने CM सम्राट चौधरी को लिखा पत्र, पेपर लीक और देरी पर मांगा जवाब
सारांश
मुख्य बातें
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने 24 अगस्त 2026 को बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक विस्तृत पत्र लिखकर राज्य की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में व्याप्त अनियमितताओं — पेपर लीक, परीक्षा रद्दीकरण और परिणाम जारी करने में विलंब — पर तत्काल कार्रवाई की माँग की है। उनके अनुसार इन समस्याओं ने सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों योग्य अभ्यर्थियों में गहरी निराशा और असंतोष पैदा किया है।
मुख्य घटनाक्रम
यादव ने पत्र लिखने से पहले पटना के गर्दनीबाग धरना स्थल पर आंदोलनरत छात्र-अभ्यर्थियों से मुलाकात कर उनकी माँगें सुनीं। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरकार इन युवाओं से सकारात्मक संवाद स्थापित करे और उनकी माँगों का शीघ्र समाधान निकाले। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो छात्रों की एकजुटता सरकार को कार्रवाई के लिए बाध्य करेगी।
परीक्षा सुधार की प्रमुख माँगें
पत्र में यादव ने माँग की कि शिक्षक भर्ती परीक्षा टीआरई-4 को एकल परीक्षा के रूप में आयोजित किया जाए और 'एक अभ्यर्थी, एक परिणाम' की नीति सख्ती से लागू की जाए। उन्होंने एलईटी और बीईटी परीक्षाओं का नियमित आयोजन निश्चित समयसीमा के भीतर सुनिश्चित करने की भी माँग की।
इसके अलावा, बीएसएससी इंटरमीडिएट, सीजीएल, एएसओ, बीएसओ, लाइब्रेरियन और लेखपाल सहित सभी लंबित परीक्षाओं की तिथियाँ शीघ्र घोषित करने और समस्त प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए वार्षिक परीक्षा कैलेंडर अनिवार्य रूप से जारी करने की माँग रखी गई।
भेदभाव और पारदर्शिता का मुद्दा
यादव ने बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की सिविल सेवा मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में हिंदी भाषी अभ्यर्थियों के साथ कथित भेदभाव को तत्काल समाप्त करने की माँग की। उन्होंने दारोगा, सिपाही, बीएसएससी और बीपीएससी समेत अन्य परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता रोकने पर जोर दिया। पूर्व में विवादों में रही परीक्षाओं की उच्चस्तरीय स्वतंत्र जाँच कराने और कथित भर्ती माफियाओं के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग भी पत्र में शामिल है।
अन्य प्रमुख माँगें
नेता प्रतिपक्ष ने सहायक प्राध्यापकों के रिक्त पदों पर नियमित नियुक्ति, आयु सीमा में छूट, आरक्षण और डोमिसाइल नीति के सख्ती से पालन तथा अतिथि सहायक प्राध्यापकों के सेवा संरक्षण पर तत्काल निर्णय लेने की माँग रखी। साथ ही विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता सुनिश्चित करते हुए शैक्षणिक सत्र नियमित करने पर भी बल दिया।
आगे क्या होगा
यह ऐसे समय में आया है जब बिहार में परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठते रहे हैं और गर्दनीबाग में छात्रों का धरना जारी है। गौरतलब है कि पेपर लीक और परीक्षा रद्दीकरण की घटनाएँ बिहार में पिछले कई वर्षों से सुर्खियाँ बटोरती रही हैं। अब सरकार की प्रतिक्रिया और उसके क्रियान्वयन पर लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हैं।