पेपर लीक और सीवान फायरिंग के खिलाफ तेजस्वी यादव का राजभवन मार्च, बिहार सरकार पर निशाना
सारांश
मुख्य बातें
बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने 19 अगस्त 2026 को ऐलान किया कि उनकी पार्टी बुधवार को पटना स्थित राजभवन तक मार्च निकालेगी। यह मार्च राज्य में बढ़ते पेपर लीक मामलों और सीवान में प्रदर्शनकारी छात्रों पर कथित तौर पर की गई फायरिंग के विरोध में आयोजित किया जा रहा है। तेजस्वी ने राज्य सरकार पर छात्रों और युवाओं की आवाज़ को दबाने का आरोप लगाया।
मार्च का उद्देश्य और प्रतिभागी
तेजस्वी यादव के अनुसार, इस मार्च में छात्र, शिक्षक, कोचिंग संस्थानों के विद्यार्थी और परीक्षा व रोज़गार प्रणाली से निराश तमाम लोग शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि यह मार्च अपारदर्शी परीक्षा व्यवस्था के खिलाफ सामूहिक आवाज़ है। उन्होंने अन्य राज्यों के नेताओं को भी इस खुले मार्च में भाग लेने का आमंत्रण दिया।
सीवान फायरिंग पर सवाल
तेजस्वी ने पिछले महीने सीवान में हुई घटना का हवाला देते हुए दावा किया कि पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस ने कथित तौर पर AK-47 से गोलियाँ चलाईं और उसे प्रदर्शित किया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह जानना चाहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों पर गोली चलाने का आदेश किसने दिया था।
तेजस्वी ने बताया कि यह मामला बिहार पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार के समक्ष उठाया गया है। उनके अनुसार, इस मामले में केवल एक कांस्टेबल को बर्खास्त किया गया, जबकि अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पेपर लीक पर राज्य सरकार को घेरा
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में मैट्रिक और इंटरमीडिएट परीक्षाओं से लेकर विभिन्न भर्ती परीक्षाओं तक, पेपर लीक की घटनाओं की एक लंबी शृंखला सामने आई है। उनका कहना है कि बार-बार हो रहे पेपर लीक से बिहार की छवि राष्ट्रीय स्तर पर धूमिल हो रही है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।
रोज़गार और शराबबंदी पर भी हमला
RJD नेता ने भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार के एक करोड़ नौकरियों के वादे पर निशाना साधते हुए दावा किया कि सरकार अब तक एक लाख नौकरियाँ भी उपलब्ध नहीं करा पाई है। इसके साथ ही उन्होंने राज्य में लागू शराबबंदी को पूरी तरह विफल करार दिया और दावा किया कि ज़मीनी हकीकत यह है कि शराब की होम डिलीवरी तक हो रही है, जबकि सरकार प्रतिबंध के सफल क्रियान्वयन का दावा करती है।
आगे क्या होगा
बुधवार का यह मार्च बिहार में विपक्ष की रणनीतिक सक्रियता का हिस्सा है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था और परीक्षा प्रणाली की विफलता को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश में है। राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और मार्च में जनसहभागिता यह तय करेगी कि यह आंदोलन आगे कितना विस्तार पाता है।