अमित शाह का ऐलान: 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाएंगे, नक्सलवाद पूरी तरह खत्म
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में आयोजित गौपालक सम्मेलन में घोषणा की कि देश में नक्सलवाद की समस्या हमेशा के लिए समाप्त हो चुकी है और अब सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक पूरे भारत को नशामुक्त बनाना है। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में दिए गए इस संबोधन को एक महत्त्वपूर्ण नीतिगत संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नशामुक्ति का संकल्प
शाह ने नागरिकों से अपील की कि वे मध्य प्रदेश को 31 दिसंबर 2029 तक पूर्णतः नशामुक्त प्रदेश बनाने के संकल्प के साथ आगे बढ़ें और सरकार के प्रयासों में सक्रिय सहयोग दें। उन्होंने कहा कि नशामुक्ति के लिए सभी संभव योजनाएँ तैयार की जाएंगी और इससे देश-प्रदेश के युवाओं को नई दिशा मिलेगी।
गौरतलब है कि नशाखोरी से जुड़ी समस्याएँ लंबे समय से युवा पीढ़ी को प्रभावित कर रही हैं और यह पहली बार है जब केंद्र सरकार ने 2029 की स्पष्ट समयसीमा के साथ नशामुक्त भारत का लक्ष्य सार्वजनिक रूप से घोषित किया है।
नक्सलवाद के अंत की घोषणा
शाह ने दावा किया कि देश अब नक्सलवाद की समस्या से हमेशा के लिए मुक्त हो गया है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब केंद्रीय सुरक्षा बलों ने पिछले कई वर्षों में वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में लगातार अभियान चलाए हैं।
गौपालन और दूध उत्पादन पर जोर
सम्मेलन में शाह ने मध्य प्रदेश में लगभग 50 एकड़ भूमि पर गौवंश एवं भैंसों की नस्ल सुधार के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों से राज्य अगले तीन वर्षों में 50 लाख लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन का लक्ष्य हासिल करेगा।
नई न्याय संहिता पर प्रकाश
शाह ने बताया कि सम्मेलन में न्याय संहिता प्रदर्शनी का भी शुभारंभ हुआ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने औपनिवेशिक युग के कई कानूनों को समाप्त कर भारतीय न्याय संहिता लागू की है, जिसमें एफआईआर दर्ज होने के बाद 3 वर्षों के भीतर दोषी को सजा दिलाने का प्रावधान है।
शाह ने कहा कि नई संहिता में ऑनलाइन एफआईआर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) के प्रावधान और आधुनिक वैज्ञानिक उपाय शामिल किए गए हैं। इसमें महिला सुरक्षा, आतंकवाद और लिंचिंग से सुरक्षा के भी प्रावधान हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि नई न्याय संहिता का मूल उद्देश्य दंड देना नहीं, बल्कि न्याय दिलाना है।
आगे की राह में यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नशामुक्ति के लिए घोषित योजनाओं का ब्यौरा कब और किस रूप में सामने आता है, और इनके क्रियान्वयन की निगरानी किस तंत्र के माध्यम से होगी।