नशामुक्त भारत 2029: अमित शाह के लक्ष्य को BJP नेताओं का समर्थन, 7 करोड़ प्रभावितों को बचाने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशे के कारोबार से पूरी तरह मुक्त करने की समयसीमा तय किए जाने के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेताओं ने इस अभियान के पक्ष में आवाज़ उठाई है। नेताओं ने इसे देश की युवा पीढ़ी को बचाने का राष्ट्रीय संकल्प बताते हुए कहा कि जिस प्रकार नक्सलवाद को समाप्त किया गया, उसी तर्ज पर नशे का कारोबार भी जड़ से खत्म किया जाएगा।
नशे की व्यापकता: आँकड़े और ज़मीनी हकीकत
BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता तुहिन सिन्हा ने कहा कि पूरे भारत में लगभग 7 करोड़ लोग अलग-अलग रूपों में नशे से प्रभावित हैं, जिनमें से करीब 1 करोड़ गंभीर रूप से प्रभावित हैं और उन्हें तत्काल उपचार की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इनमें अधिकांश 15 से 35 वर्ष की आयु के युवा हैं।
सिन्हा ने यह भी रेखांकित किया कि नशे की समस्या केवल लत तक सीमित नहीं है — यह महिलाओं की सुरक्षा, जेब कतरी और सड़क अपराधों से भी सीधे जुड़ी है। उनके अनुसार महिलाओं के विरुद्ध अपराधों में शामिल अनेक लोग नशे के आदी पाए जाते हैं।
BJP नेताओं की प्रतिक्रिया
बिहार BJP के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा, 'विकसित भारत' के निर्माण में युवा सबसे बड़ी शक्ति हैं और इसीलिए गृह मंत्री ने 31 दिसंबर 2029 की स्पष्ट समयसीमा तय की है। उनके अनुसार यह महज़ एक प्रशासनिक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का राष्ट्रीय संकल्प है।
BJP प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने पंजाब का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि वह राज्य नशे का केंद्र बन चुका है और युवा पीढ़ी इसकी चपेट में आ गई है। उन्होंने भरोसा जताया कि जिस तरह नक्सल मुक्त भारत का लक्ष्य पूरा हुआ, उसी तरह 2029 तक नशामुक्त भारत का सपना भी साकार होगा।
नक्सलवाद से तुलना: शाह का ट्रैक रिकॉर्ड
तुहिन सिन्हा ने अपने बयान में कहा, 'जब गृह मंत्री अमित शाह कुछ कहते हैं, तो वह सुनिश्चित करते हैं कि वह लागू हो। उन्होंने पहले कहा था कि भारत नक्सलवाद से मुक्त होगा और आज भारत से नक्सलवाद खत्म हो चुका है।' BJP नेता इसी आधार पर नशामुक्ति के वादे की विश्वसनीयता स्थापित कर रहे हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के माध्यम से पहले से ही कड़ी कार्रवाई कर रही है। गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में सीमा पार से ड्रग तस्करी की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
आम जनता और युवाओं पर असर
आँकड़ों के अनुसार, नशे की चपेट में आए 1 करोड़ गंभीर मामलों में से अधिकांश के लिए पर्याप्त पुनर्वास केंद्रों की कमी एक बड़ी चुनौती है। तुहिन सिन्हा ने बताया कि वे स्वयं हाल ही में दिल्ली के एक नशा मुक्ति केंद्र का दौरा कर चुके हैं, जिससे ज़मीनी स्थिति का अंदाज़ा लगाया जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि नशामुक्ति केवल कानून प्रवर्तन से नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक और स्वास्थ्य ढाँचे से ही संभव है। 2029 की समयसीमा महत्वाकांक्षी है और इसके लिए केंद्र-राज्य समन्वय अनिवार्य होगा।
आगे की राह
BJP नेताओं के इस एकजुट समर्थन के साथ यह अभियान राजनीतिक गति पकड़ रहा है। अब देखना यह होगा कि सरकार इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए किस ठोस नीतिगत और बजटीय ढाँचे के साथ आगे बढ़ती है, विशेष रूप से उन राज्यों में जहाँ ड्रग तस्करी नेटवर्क गहरी जड़ें जमा चुके हैं।