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अमित शाह का AAP पर प्रहार: 'आप-दा सरकार ने पंजाब को ड्रग्स के दलदल में धकेला', 2029 तक नशा मुक्त करने का संकल्प

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अमित शाह का AAP पर प्रहार: 'आप-दा सरकार ने पंजाब को ड्रग्स के दलदल में धकेला', 2029 तक नशा मुक्त करने का संकल्प

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने जालंधर में 13 दिन और 4 हजार किलोमीटर की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' का समापन करते हुए AAP सरकार पर सीधा हमला बोला। 2027 के चुनाव से पहले भाजपा ने नशे के मुद्दे को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनाने की रणनीति तय कर ली है।

मुख्य बातें

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 सितंबर 2026 को जालंधर में भाजपा की नशा मुक्त पंजाब यात्रा के समापन पर AAP सरकार पर जमकर निशाना साधा।
यात्रा पठानकोट से शुरू होकर 13 दिनों में लगभग 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय कर पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुँची।
शाह ने AAP सरकार पर 'चिट्टा' (सिंथेटिक ड्रग्स) के अवैध कारोबार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया।
भाजपा ने 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब को नशा मुक्त करने का संकल्प लिया।
शाह के अनुसार, 2004-2014 के बीच कांग्रेस सरकार में 26 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त हुए; मोदी सरकार में यह आँकड़ा कहीं अधिक रहा।
2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में भाजपा नशे के मुद्दे को प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाएगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 सितंबर 2026 को जालंधर में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'नशा मुक्त पंजाब यात्रा' के समापन समारोह में आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार पर कड़ा प्रहार किया। शाह ने आरोप लगाया कि नशा मुक्त पंजाब का नारा देकर सत्ता में आई सरकार ने प्रदेश को ड्रग्स के दलदल में धकेल दिया है। उन्होंने घोषणा की कि भाजपा 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब से नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए संकल्पित है।

यात्रा का विस्तार और उद्देश्य

गृह मंत्री ने बताया कि यह यात्रा पठानकोट से शुरू होकर 13 दिनों में लगभग 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुँची। इस दौरान गांव-गांव जाकर नशे के विरुद्ध जनजागरूकता अभियान चलाया गया और युवाओं को नशे की लत से बचाने का संदेश दिया गया।

शाह ने कहा कि जालंधर के समापन समारोह में प्रदेशभर से उमड़ा लोगों का उत्साह यह दर्शाता है कि पंजाब की जनता मौजूदा सरकार को सत्ता से हटाने का मन बना चुकी है।

AAP सरकार पर आरोप

अमित शाह ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'नशा मुक्त पंजाब का नारा देकर सत्ता में आई 'आप-दा' सरकार ने पंजाब को ड्रग्स के दलदल में धकेल दिया है।' उन्होंने आरोप लगाया कि आम आदमी पार्टी की सरकार के कार्यकाल में पंजाब में 'चिट्टा' यानी सिंथेटिक ड्रग्स का अवैध कारोबार बेरोकटोक जारी है। गौरतलब है कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या दशकों पुरानी है और यह मुद्दा हर विधानसभा चुनाव में केंद्र में रहा है।

केंद्र बनाम पूर्व सरकार: ड्रग्स बरामदगी के आँकड़े

शाह ने ड्रग्स बरामदगी के आँकड़े पेश करते हुए दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के दौरान देशभर में 26 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जबकि 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार के कार्यकाल में इससे कहीं अधिक मात्रा में ड्रग्स की बरामदगी हुई। उन्होंने जब्त नशीले पदार्थों की कीमत की तुलना करते हुए भी केंद्र सरकार की कार्रवाई को अधिक प्रभावी बताया।

यह ऐसे समय में आया है जब भाजपा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी है और नशे के मुद्दे को अपना प्रमुख चुनावी हथियार बनाने की रणनीति अपना रही है।

पंजाब की पहचान और सामूहिक लड़ाई का आह्वान

गृह मंत्री ने पंजाब के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राज्य हमेशा देश की खाद्य सुरक्षा और सीमा सुरक्षा में अग्रणी रहा है। उन्होंने पंजाब की माताओं और युवाओं से भाजपा का समर्थन करने की अपील की और कहा कि नशे के विरुद्ध सामूहिक लड़ाई ही इस समस्या का स्थायी समाधान है।

शाह ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार पंजाब में ड्रग्स की सप्लाई चेन तोड़ने और सीमा पार से होने वाली तस्करी रोकने के लिए केंद्रीय एजेंसियों के प्रयासों को और मजबूत करेगी। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की यह यात्रा और शाह का यह हमला पंजाब की राजनीति में नए समीकरणों की नींव रखने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 के पंजाब चुनाव की जमीन तैयार करने का सुनियोजित प्रयास है — और शाह की उपस्थिति उसे राष्ट्रीय महत्व देती है। विरोधाभास यह है कि पंजाब में ड्रग्स की समस्या कांग्रेस, अकाली दल और अब AAP — सभी के कार्यकाल में बनी रही है, इसलिए इसे केवल एक दल के मत्थे मढ़ना तथ्यों का सरलीकरण है। शाह के आँकड़े — कि मोदी सरकार में बरामदगी अधिक हुई — दोधारी तर्क हो सकता है: अधिक जब्ती या तो बेहतर कार्रवाई की निशानी है, या यह बताती है कि तस्करी पहले से कहीं अधिक बढ़ी है। 31 दिसंबर 2029 की समयसीमा एक मापने योग्य वादा है — मतदाताओं को इसे याद रखना चाहिए।
RashtraPress
1 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नशा मुक्त पंजाब यात्रा क्या थी और इसका उद्देश्य क्या था?
यह भाजपा की एक राज्यव्यापी यात्रा थी जो पठानकोट से शुरू होकर 13 दिनों में करीब 4 हजार किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों तक पहुँची। इसका उद्देश्य नशे के विरुद्ध जनजागरूकता फैलाना और 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की राजनीतिक जमीन मजबूत करना था।
अमित शाह ने AAP की पंजाब सरकार पर क्या आरोप लगाए?
गृह मंत्री अमित शाह ने आरोप लगाया कि नशा मुक्त पंजाब का नारा देकर सत्ता में आई AAP सरकार ने प्रदेश को ड्रग्स के दलदल में धकेल दिया है। उन्होंने विशेष रूप से 'चिट्टा' यानी सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध कारोबार को AAP के कार्यकाल से जोड़ा।
भाजपा ने पंजाब को नशा मुक्त करने के लिए क्या समयसीमा तय की है?
अमित शाह ने घोषणा की कि भाजपा 31 दिसंबर 2029 से पहले पंजाब से नशे के कारोबार को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए संकल्पित है। यह वादा 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव के प्रमुख एजेंडे के रूप में रखा गया है।
शाह ने ड्रग्स बरामदगी के कौन-से आँकड़े पेश किए?
शाह ने दावा किया कि 2004 से 2014 के बीच कांग्रेस नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के दौरान देशभर में 26 लाख किलोग्राम नशीले पदार्थ जब्त किए गए, जबकि 2014 से 2024 के बीच मोदी सरकार में इससे कहीं अधिक मात्रा में ड्रग्स बरामद हुए। उन्होंने इसे केंद्र की कार्रवाई की बेहतर प्रभावशीलता का प्रमाण बताया।
पंजाब में अगले विधानसभा चुनाव कब होंगे और भाजपा की क्या रणनीति है?
पंजाब में विधानसभा चुनाव 2027 में होने हैं। भाजपा ने स्पष्ट किया है कि वह नशे के मुद्दे को अपना प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाएगी और पंजाब की माताओं तथा युवाओं से समर्थन की अपील की है।
राष्ट्र प्रेस
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