3 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

अमित शाह का ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाएंगे

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
अमित शाह का ऐलान: 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाएंगे

सारांश

गृह मंत्री अमित शाह ने भोपाल में एक स्पष्ट समय-सीमा दी — 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश में ड्रग्स के लिए कोई जगह नहीं होगी। माताओं से सीधी अपील, CM मोहन यादव संग कार्ययोजना और नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी — यह दौरा राज्य में नशा-विरोधी मुहिम को नई धार देने की कोशिश है।

मुख्य बातें

गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की समय-सीमा घोषित की।
मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
शाह ने माताओं से विशेष अपील की कि वे बच्चों पर नशे के असर को लेकर सतर्क रहें और अभियान में सहयोग करें।
नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन; शाह ने कहा — FIR से सर्वोच्च न्यायालय तक 3 वर्षों में न्याय मिलेगा।
भारतीय न्याय संहिता में महिला सुरक्षा, मॉब लिंचिंग, गुमशुदा बच्चों और आतंकवाद से सुरक्षा के प्रावधान शामिल।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में स्पष्ट किया कि 31 दिसंबर 2029 तक मध्य प्रदेश को पूरी तरह नशा मुक्त कर दिया जाएगा। उन्होंने मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने की घोषणा की।

क्या बोले गृह मंत्री

भोपाल में आयोजित एक राज्यस्तरीय पशुपालक सम्मेलन को संबोधित करते हुए शाह ने कहा, 'हम मध्य प्रदेश को नशा-मुक्त बनाएंगे। मैं हर माँ को यह भरोसा दिलाने आया हूँ कि 31 दिसंबर 2029 के बाद मध्य प्रदेश में आपके बेटे-बेटियों के लिए ड्रग्स की कोई जगह नहीं होगी।' उन्होंने प्रदेश की माताओं से विशेष अपील की कि वे अपने बच्चों पर नशीले पदार्थों के असर को लेकर सतर्क रहें और इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाएँ।

गृह मंत्री ने यह भी बताया कि लक्ष्य हासिल करने के लिए वे मुख्यमंत्री और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ शीघ्र बैठक करेंगे, जिसमें रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के उपायों पर विस्तार से चर्चा होगी।

केंद्र सरकार की व्यापक नशा-विरोधी मुहिम

यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब केंद्रीय गृह मंत्रालय पूरे देश में ड्रग नेटवर्क को खत्म करने की मुहिम को तेज़ कर रहा है। मंत्रालय का ध्यान केवल आपूर्ति-श्रृंखला तोड़ने तक सीमित नहीं है — रोकथाम, उपचार और पुनर्वास को भी इस अभियान का अभिन्न हिस्सा बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल रहा है जहाँ नशे से जुड़े अपराधों में वृद्धि की खबरें सामने आती रही हैं, जिससे यह समय-सीमा राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण बन जाती है।

नए आपराधिक कानूनों पर प्रदर्शनी का उद्घाटन

शाह ने भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर आयोजित एक प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया। उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय संहिता और संबंधित कानून देश की आपराधिक न्याय प्रणाली में बुनियादी परिवर्तन लाएंगे।

उन्होंने कहा, 'हमारी न्याय व्यवस्था कभी 'तारीख पर तारीख' के तानों के लिए जानी जाती थी, लेकिन अब नए आपराधिक कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद आने वाले डेढ़ वर्षों में एफआईआर से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक 3 वर्षों में न्याय दिलाने का पूरा काम हो जाएगा।'

विज्ञान और तकनीक से लैस नई न्याय व्यवस्था

गृह मंत्री ने बताया कि तीनों नए कानूनों में विज्ञान और तकनीक को समाहित करते हुए FSL व फॉरेंसिक जाँच के प्रावधान किए गए हैं। इनके ज़रिये महिला सुरक्षा, मॉब लिंचिंग, गुमशुदा बच्चों और आतंकवाद से नागरिकों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी प्रावधान सुनिश्चित किए गए हैं।

शाह ने जोड़ा, 'अंग्रेज़ों के बनाए कानून उनके शासन को बचाने के लिए थे, जबकि तीन नए आपराधिक कानून भारत के नागरिकों के सम्मान, संपत्ति और शरीर की रक्षा के लिए हैं। इन कानूनों का मूल मंत्र न्याय है, दंड नहीं। इन कानूनों के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद हमारी आपराधिक न्याय व्यवस्था दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणालियों में शामिल होगी।'

आगे क्या होगा

मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग के अधिकारियों के साथ शाह की बैठक में नशा-विरोधी अभियान की विस्तृत रूपरेखा तय होने की उम्मीद है। 2029 की समय-सीमा को देखते हुए राज्य सरकार पर अब एक ठोस और मापनीय कार्ययोजना प्रस्तुत करने का दबाव रहेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सवाल यह है कि इसे मापा कैसे जाएगा — 'नशा मुक्त' की परिभाषा क्या होगी और उसे कौन प्रमाणित करेगा? नशा-विरोधी अभियानों का इतिहास बताता है कि आपूर्ति-श्रृंखला तोड़ना और माँग में कमी लाना दो अलग-अलग लड़ाइयाँ हैं, और दूसरी लड़ाई कहीं अधिक कठिन है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है, वह यह है कि बिना स्वतंत्र सत्यापन तंत्र और पुनर्वास ढाँचे के, ऐसी घोषणाएँ प्रवर्तन-केंद्रित रह जाती हैं और सामाजिक परिवर्तन से दूर। असली कसौटी 2029 से पहले ही दिखेगी — जब राज्य सरकार की कार्ययोजना सार्वजनिक होगी और उसमें मापनीय लक्ष्य होंगे या नहीं।
RashtraPress
3 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अमित शाह ने मध्य प्रदेश को नशा मुक्त बनाने की क्या समय-सीमा दी है?
गृह मंत्री अमित शाह ने 31 दिसंबर 2029 की समय-सीमा तय की है, जिसके बाद मध्य प्रदेश में ड्रग्स के लिए कोई जगह नहीं होगी। यह घोषणा उन्होंने 3 अक्टूबर 2026 को भोपाल में एक राज्यस्तरीय सम्मेलन में की।
नशा मुक्त मध्य प्रदेश अभियान की कार्ययोजना कौन तैयार करेगा?
अमित शाह ने बताया कि वे मुख्यमंत्री मोहन यादव और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मिलकर एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करेंगे। इस बैठक में रोकथाम, उपचार और पुनर्वास के उपायों पर चर्चा होगी।
शाह ने माताओं से क्यों विशेष अपील की?
शाह ने माताओं से अपील की कि वे अपने बच्चों पर नशीले पदार्थों के असर को लेकर सतर्क रहें और अभियान में सक्रिय रूप से सहयोग करें। उनका मानना है कि परिवार, विशेष रूप से माताएँ, नशे के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी कड़ी हैं।
भोपाल में नए आपराधिक कानूनों पर क्या घोषणा हुई?
शाह ने नए आपराधिक कानूनों पर एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया और कहा कि भारतीय न्याय संहिता के पूर्ण क्रियान्वयन के बाद FIR से सर्वोच्च न्यायालय तक 3 वर्षों में न्याय मिलेगा। नए कानूनों में FSL और फॉरेंसिक जाँच के प्रावधान भी शामिल हैं।
नए आपराधिक कानून पुराने कानूनों से कैसे अलग हैं?
शाह के अनुसार, अंग्रेज़ों के बनाए पुराने कानून उनके शासन की रक्षा के लिए थे, जबकि नए कानूनों का मूल मंत्र न्याय है — दंड नहीं। नए कानूनों में महिला सुरक्षा, मॉब लिंचिंग, गुमशुदा बच्चों और आतंकवाद से सुरक्षा के प्रभावी प्रावधान किए गए हैं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 दिन पहले
  2. 2 दिन पहले
  3. 2 दिन पहले
  4. 3 दिन पहले
  5. 1 सप्ताह पहले
  6. 1 सप्ताह पहले
  7. 1 सप्ताह पहले
  8. 2 महीने पहले