PMAY-G विवाद: जम्मू-कश्मीर के गुंडोह में 13 पंचायतों के गरीब परिवार 'डिस्प्यूट लिस्ट' में, पुनः सत्यापन की माँग
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के गुंडोह क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ता रफाकत मीर ने 3 अक्टूबर 2026 को स्थानीय प्रशासन और एसीडी (सहायक आयुक्त विकास) से आग्रह किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G) की लाभार्थी सूची का फिर से सत्यापन किया जाए, ताकि सुनिश्चित हो सके कि वास्तव में पात्र परिवारों को इस योजना का लाभ मिल सके। उनका कहना है कि बलहेसा क्षेत्र, विशेषकर कहरा की 13 पंचायतों में बड़ी संख्या में गरीब परिवारों को अस्पष्ट कारणों से 'डिस्प्यूट लिस्ट' में डाल दिया गया है।
मुख्य घटनाक्रम
रफाकत मीर के अनुसार, सरकार ने यह लक्ष्य निर्धारित किया था कि 2026 तक देश के हर उस गरीब व्यक्ति को पक्का मकान मिलेगा जिसके पास अपना घर नहीं है। इसी क्रम में जब क्षेत्र में सर्वेक्षण हुआ तो लोगों में उम्मीद जगी कि उनका नाम पहली बार प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना की सूची में शामिल हुआ है और उन्हें पक्का घर मिलेगा।
उन्होंने बताया कि सर्वेक्षण के दो से तीन महीने बाद ग्राम सभाएँ हुईं, जिनमें यह तय किया जाना था कि किन परिवारों को मकान मिलेगा। परंतु जब मकान देने की बारी आई, तो पात्र परिवारों के नामों को 'डिस्प्यूट लिस्ट' में डाल दिया गया।
प्रभावित क्षेत्र और पंचायतें
रफाकत मीर के अनुसार बलहेसा क्षेत्र, खासकर कहरा में स्थित 13 पंचायतों में बड़ी संख्या में गरीब परिवारों के नाम 'डिस्प्यूट' में डाले गए हैं। उन्होंने कहा कि इन परिवारों को यह स्पष्ट नहीं किया गया कि उनके नाम किस आधार पर विवादित श्रेणी में रखे गए हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब जम्मू-कश्मीर में ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन पर विभिन्न स्तरों पर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि PMAY-G के तहत लाभार्थी चयन की प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता बताई जाती है।
प्रशासन से आग्रह
रफाकत मीर ने कहा कि जो अधिकारी इस प्रक्रिया में शामिल हैं, उन्होंने किस आधार पर गरीब परिवारों को 'डिस्प्यूट लिस्ट' में डाला — यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है। उन्होंने कहा, 'डिस्प्यूट की लिस्ट सामने आने से यहाँ के गरीब लोग काफी परेशान हैं। कोई भी इस पर बात सुनने के लिए तैयार नहीं है।'
उन्होंने स्थानीय प्रशासन और एसीडी से माँग की कि छोटे और जर्जर मकानों में रहने वाले इन गरीब परिवारों की स्थिति को देखते हुए उनके मामलों की शीघ्र समीक्षा की जाए और पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाया जाए।
आम जनता पर असर
PMAY-G की 'डिस्प्यूट लिस्ट' में नाम आने से प्रभावित परिवार आवास के अधिकार से वंचित हो रहे हैं। इन परिवारों में अनिश्चितता और निराशा बढ़ रही है, क्योंकि उन्होंने सर्वेक्षण और ग्राम सभा की प्रक्रिया पूरी करने के बाद अपने नाम सूची में देखे थे। प्रशासनिक प्रतिक्रिया न मिलने से इस समस्या के समाधान में और देरी होने की आशंका है।
क्या होगा आगे
रफाकत मीर की माँग के बाद अब निगाहें जम्मू-कश्मीर के स्थानीय प्रशासन और एसीडी पर हैं कि वे PMAY-G की 'डिस्प्यूट लिस्ट' की समीक्षा कब और किस प्रक्रिया से करते हैं। यदि प्रशासन पारदर्शी तरीके से पुनः सत्यापन करता है, तो हजारों गरीब परिवारों को पक्के मकान का सपना साकार होने की उम्मीद है।