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प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली डोडा की गरीब परिवार की ज़िंदगी, लाभार्थी बोलीं — 'सपना सच हो गया'

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प्रधानमंत्री आवास योजना से बदली डोडा की गरीब परिवार की ज़िंदगी, लाभार्थी बोलीं — 'सपना सच हो गया'

सारांश

जम्मू-कश्मीर के सुदूर डोडा जिले के गंडोह गाँव में एक गरीब परिवार के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना सिर्फ एक सरकारी स्कीम नहीं, बल्कि 'सपने का घर' बनी। नियमित आय और पहाड़ी निर्माण की दोहरी चुनौती के बावजूद PMAY की नकद सहायता ने यह मुमकिन किया।

मुख्य बातें

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के गंडोह गाँव में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत एक ज़रूरतमंद परिवार को पक्का घर बनाने की आर्थिक सहायता मिली।
लाभार्थी मोहम्मद अकबर की पत्नी ने बताया कि नियमित आय न होने और पहाड़ी इलाके में निर्माण की चुनौतियों के कारण घर बनाना असंभव लग रहा था।
PMAY की नकद सहायता से बना पक्का घर अब बारिश और ठंडी हवा से परिवार को सुरक्षित रखता है।
लाभार्थी ने सरकार से बाथरूम की सुविधा उपलब्ध कराने की भी उम्मीद जताई, जो ग्रामीण स्वच्छता की अधूरी ज़रूरत को दर्शाता है।
यह कहानी जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ पहाड़ी ज़िलों में PMAY की पहुँच को रेखांकित करती है।

जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के कहरा ब्लॉक के गंडोह गाँव में रहने वाले मोहम्मद अकबर की पत्नी के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) महज एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक नई ज़िंदगी की शुरुआत बनी। दूर-दराज के पहाड़ी इलाके में रहते हुए, जहाँ आमदनी का कोई पक्का ज़रिया नहीं था, पक्का घर बनाना उनके लिए एक असंभव सपना था — लेकिन इस योजना की आर्थिक सहायता ने वह सपना हकीकत में बदल दिया।

क्या थी परिवार की स्थिति

मोहम्मद अकबर की पत्नी ने बताया कि परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद कमज़ोर थी। नियमित आय न होने के कारण घर बनाने की कल्पना भी मुश्किल थी। पहाड़ी इलाके में निर्माण सामग्री पहुँचाना और मज़दूरी का खर्च उठाना उनके बस की बात नहीं थी। उन्होंने कहा, 'हम बहुत गरीब लोग हैं। हम खुद से कभी घर नहीं बना पाते।'

पुराना घर इतना छोटा और जर्जर था कि सर्दियों में छत से भारी बर्फ हटानी पड़ती थी। बारिश में पानी और ठंडी हवा अंदर घुस आती थी, जिससे परिवार को भारी तकलीफ होती थी।

योजना से कैसे बदली तस्वीर

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिली नकद सहायता ने परिवार को एक पक्का मकान बनाने का हौसला और साधन दोनों दिए। मोहम्मद अकबर की पत्नी ने बताया, 'जब सरकार ने हमें आर्थिक मदद दी, तो हम एक अच्छा घर बना पाए, जिससे हमें बहुत सुकून मिला है। अब बारिश का पानी अंदर नहीं आता और हवा भी अंदर नहीं आती।' यह बदलाव उनके परिवार के दैनिक जीवन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार का प्रतीक है।

गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के दूरस्थ पहाड़ी ज़िलों में PMAY का क्रियान्वयन विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण रहा है, जहाँ भौगोलिक बाधाएँ और कठोर जलवायु निर्माण कार्य को जटिल बनाती हैं। ऐसे में इस परिवार की कहानी उन हज़ारों लाभार्थियों की प्रतिनिधि है जिनके लिए यह योजना सीधे जीवन-स्तर में बदलाव लाई है।

लाभार्थी की आभार-भावना और आगे की उम्मीद

मोहम्मद अकबर की पत्नी ने सरकार के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा, 'हम सरकार के बहुत आभारी हैं कि उन्होंने हमें नकद मदद दी। हम उनका तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं। वरना, हमारे पास घर बनाने की हिम्मत या साधन कभी नहीं होते।'

साथ ही उन्होंने एक और ज़रूरत का ज़िक्र किया — उन्होंने कहा कि यदि सरकार अब एक बाथरूम की सुविधा भी उपलब्ध करा दे, तो परिवार और भी बेहतर तरीके से जीवन जी सकेगा। यह माँग ग्रामीण भारत में स्वच्छता सुविधाओं की अभी भी बनी हुई कमी को रेखांकित करती है।

आम जनता पर असर

यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार PMAY के तहत ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आवास निर्माण में तेज़ी लाने पर ज़ोर दे रही है। डोडा जैसे सुदूर पहाड़ी ज़िलों में इस योजना की पहुँच यह दर्शाती है कि सरकारी लाभ अब अंतिम छोर तक पहुँच रहे हैं — हालाँकि बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं जैसी ज़रूरतें अभी भी पूरी तरह नहीं भरी गई हैं।

मोहम्मद अकबर के परिवार की यह कहानी बताती है कि सही समय पर मिली सरकारी सहायता किस तरह एक गरीब परिवार की बुनियादी ज़रूरत को पूरा कर सकती है और उनके जीवन में स्थायित्व ला सकती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह उतनी ही स्पष्टता से उन अंतरालों को भी उजागर करती है जो अभी भरे नहीं गए — खासकर स्वच्छता सुविधाओं का अभाव। एक लाभार्थी का बाथरूम के लिए अनुरोध यह सवाल उठाता है कि क्या आवास योजना और स्वच्छ भारत मिशन का समन्वय ज़मीन पर उतना प्रभावी है जितना कागज़ पर दिखता है। जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी ज़िलों में PMAY का क्रियान्वयन सराहनीय है, पर बुनियादी सुविधाओं की समग्र डिलीवरी अभी भी अधूरी है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) क्या है और इसका लाभ किसे मिलता है?
प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) केंद्र सरकार की आवास योजना है जो आर्थिक रूप से कमज़ोर और ग्रामीण गरीब परिवारों को पक्का घर बनाने के लिए नकद सहायता प्रदान करती है। डोडा जैसे सुदूर पहाड़ी ज़िलों में भी इस योजना का लाभ पात्र परिवारों तक पहुँचाया जा रहा है।
डोडा के गंडोह गाँव की लाभार्थी को PMAY से क्या फायदा हुआ?
मोहम्मद अकबर की पत्नी को PMAY की नकद सहायता से पहाड़ी इलाके में पक्का घर बनाने में मदद मिली। पहले बारिश और ठंडी हवा से परेशानी होती थी, अब पक्के घर में परिवार सुरक्षित और आरामदायक जीवन जी रहा है।
पहाड़ी इलाकों में PMAY के तहत घर बनाना क्यों चुनौतीपूर्ण है?
जम्मू-कश्मीर के डोडा जैसे दूरस्थ पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण सामग्री पहुँचाना, कठोर जलवायु और नियमित आय का अभाव — ये सभी मिलकर घर बनाने को बेहद मुश्किल बनाते हैं। PMAY की सहायता इन परिवारों के लिए इन बाधाओं को पार करने का एकमात्र साधन बनती है।
लाभार्थी ने सरकार से और क्या माँग की?
मोहम्मद अकबर की पत्नी ने सरकार से बाथरूम की सुविधा उपलब्ध कराने की उम्मीद जताई। यह माँग ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वच्छता सुविधाओं की अभी भी बनी हुई कमी को दर्शाती है।
PMAY की यह कहानी जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में क्यों महत्वपूर्ण है?
जम्मू-कश्मीर के सुदूर पहाड़ी ज़िलों तक सरकारी आवास योजना की पहुँच यह दर्शाती है कि केंद्रीय योजनाएँ अंतिम छोर तक पहुँच रही हैं। हालाँकि, बुनियादी स्वच्छता सुविधाओं की कमी यह भी बताती है कि समग्र जीवन-स्तर सुधार के लिए अभी और काम बाकी है।
राष्ट्र प्रेस
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