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पीएम आवास योजना का असर: गुमला में खपरैल छोड़ पक्के मकानों में बसे हजारों गरीब परिवार

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पीएम आवास योजना का असर: गुमला में खपरैल छोड़ पक्के मकानों में बसे हजारों गरीब परिवार

सारांश

खपरैल की छत से पक्की दीवारों तक — गुमला के गरीब परिवारों की यह यात्रा पीएम आवास योजना के जमीनी असर की कहानी है। बरसात में टपकती छत और जर्जर मकानों से निकलकर ये परिवार अब सम्मानजनक जीवन जी रहे हैं।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत झारखंड के गुमला जिले में हजारों गरीब परिवारों को पक्के आवास मिले हैं।
लाभार्थी मीना देवी और अनीता देवी सहित कई परिवारों ने खपरैल और टीन के जर्जर मकानों से पक्के घरों में जीवन बदलने की बात कही।
गुमला में आदिवासी और वंचित समुदायों की बड़ी आबादी को इस योजना से विशेष लाभ मिला है।
PMAY की शुरुआत 2015 में 'सबके लिए आवास' के लक्ष्य के साथ हुई थी; 26 मई 2014 को शपथ के बाद से 12 वर्षों में यह केंद्र सरकार की प्रमुख कल्याण योजनाओं में से एक रही है।
शेष पात्र परिवारों को शीघ्र लाभ दिलाने की माँग स्थानीय स्तर पर जारी है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) झारखंड के गुमला जिले में गरीब परिवारों के जीवन को बदलने का माध्यम बन रही है। जहाँ कभी खपरैल और जर्जर टीन की छत के नीचे बारिश में भीगना नियति थी, वहाँ अब हजारों परिवार पक्की दीवारों और मजबूत छत के नीचे सुरक्षित जीवन जी रहे हैं। 26 मई 2014 को शपथ ग्रहण के बाद से 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने इस योजना के माध्यम से देशभर के करोड़ों वंचित परिवारों को स्थायी आवास उपलब्ध कराने का प्रयास किया है।

मुख्य घटनाक्रम

गुमला जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत बड़ी संख्या में पक्के आवास निर्मित किए गए हैं। लाभार्थी परिवारों के अनुसार, पहले बरसात के मौसम में छत से पानी टपकना और दीवारों का कमजोर होना रोजमर्रा की समस्या थी। अब पक्के मकान मिलने से उनके जीवन में स्थिरता और सम्मान दोनों आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले के हजारों गरीब परिवार इस योजना से लाभान्वित हुए हैं।

लाभार्थियों की आवाज़

लाभार्थी मीना देवी ने बताया, 'पहले हमारा मकान खपरैल का था। बरसात में छत से पानी टपकता था, पूरे घर में पानी भर जाता था। बहुत परेशानी होती थी। अब प्रधानमंत्री आवास मिल गया है। न कोई पानी टपकता है, न बरसात में परेशानी।'

एक अन्य लाभार्थी अनीता देवी ने कहा, 'हमारा पुराना मकान टीन का था, कहीं-कहीं पानी टपकता था। अब छत के नीचे आराम से रह रहे हैं। कोई परेशानी नहीं है।' उन्होंने यह भी इच्छा जताई कि हर गरीब को इस योजना का लाभ मिलना चाहिए।

आम जनता पर असर

गुमला जिले के ग्रामीण इलाकों में यह योजना विशेष रूप से प्रभावशाली रही है, जहाँ आदिवासी और वंचित समुदायों की बड़ी आबादी निवास करती है। पहले इन परिवारों के पास न तो पक्की छत थी और न ही बाढ़ या तूफान से सुरक्षा का कोई ठोस साधन। स्थायी आवास मिलने से न केवल उनकी भौतिक सुरक्षा बढ़ी है, बल्कि सामाजिक सम्मान में भी वृद्धि हुई है। योजना के लाभार्थियों ने एक स्वर में कहा कि 'हर किसी को पक्के आवास की सुविधा मिल सकेगी।'

योजना की पृष्ठभूमि

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) को केंद्र सरकार ने 2015 में शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के लिए शुरू किया था, जिसका लक्ष्य 'सबके लिए आवास' सुनिश्चित करना है। झारखंड जैसे राज्यों में, जहाँ ग्रामीण गरीबी की दर राष्ट्रीय औसत से अधिक रही है, इस योजना का प्रभाव जमीनी स्तर पर अधिक दृश्यमान है। यह वह राज्य है जहाँ आदिवासी समुदायों की आबादी लगभग 26% है और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की संख्या ऐतिहासिक रूप से अधिक रही है।

क्या होगा आगे

केंद्र सरकार की योजना के अनुसार, PMAY-ग्रामीण के अंतर्गत देशभर में आवास निर्माण का कार्य जारी है। गुमला जैसे जिलों में जहाँ अभी भी पात्र परिवार प्रतीक्षा सूची में हैं, स्थानीय प्रशासन द्वारा सत्यापन और वितरण की प्रक्रिया चल रही है। लाभार्थियों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आग्रह है कि शेष पात्र परिवारों को भी शीघ्र इस योजना का लाभ दिलाया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि झारखंड में अभी भी कितने पात्र परिवार प्रतीक्षा सूची में हैं और उनके लिए समयसीमा क्या है। योजना की घोषणाएँ और लाभार्थियों की संख्या अक्सर केंद्र सरकार के आँकड़ों और राज्य-स्तरीय सत्यापन के बीच अंतर दिखाती हैं। गुमला जैसे आदिवासी-बहुल जिलों में जहाँ भूमि-अधिकार और दस्तावेज़ीकरण की जटिलताएँ योजना के क्रियान्वयन को धीमा करती हैं, वहाँ केवल पूर्ण हुए आवासों की गिनती पर्याप्त नहीं — पात्र परन्तु वंचित परिवारों की संख्या सार्वजनिक होनी चाहिए।
RashtraPress
11 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) क्या है?
प्रधानमंत्री आवास योजना केंद्र सरकार की एक प्रमुख कल्याण योजना है, जिसे 2015 में 'सबके लिए आवास' के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया था। इसके तहत शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के गरीब और वंचित परिवारों को पक्के आवास निर्माण के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
गुमला जिले में PMAY से कितने परिवारों को लाभ मिला है?
रिपोर्टों के अनुसार गुमला जिले में हजारों गरीब परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान मिले हैं। सटीक संख्या जिला प्रशासन के आधिकारिक आँकड़ों पर निर्भर करती है, जो समय-समय पर अपडेट होते रहते हैं।
झारखंड के आदिवासी परिवारों को इस योजना से क्या फायदा हुआ?
झारखंड में लगभग 26% आदिवासी आबादी है और कच्चे मकानों में रहने वाले परिवारों की संख्या ऐतिहासिक रूप से अधिक रही है। PMAY ने इन परिवारों को खपरैल और टीन की जर्जर छत से निकालकर पक्के, सुरक्षित आवास उपलब्ध कराए हैं, जिससे बाढ़ और बरसात में होने वाली परेशानियाँ कम हुई हैं।
क्या अभी भी गुमला में PMAY के पात्र परिवार लाभ से वंचित हैं?
स्थानीय लाभार्थियों और जनप्रतिनिधियों के अनुसार अभी भी कुछ पात्र परिवार प्रतीक्षा सूची में हैं। जिला प्रशासन द्वारा सत्यापन और वितरण की प्रक्रिया जारी बताई जा रही है।
PMAY के तहत आवास बनाने के लिए परिवारों को कितनी राशि मिलती है?
PMAY-ग्रामीण के अंतर्गत लाभार्थी परिवारों को मैदानी क्षेत्रों में आवास निर्माण हेतु सरकारी सहायता राशि दी जाती है, जो राज्य और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। झारखंड जैसे राज्यों में केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह राशि वितरित करती हैं।
राष्ट्र प्रेस
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