पीएम आवास योजना से जामताड़ा में 25,800 से अधिक गरीब परिवारों को मिला पक्का घर, बदली ज़िंदगी
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने झारखंड के जामताड़ा जिले में हज़ारों गरीब परिवारों के 'पक्के घर' के सपने को साकार कर दिया है। 4 सितंबर 2026 तक जिले में 25,800 से अधिक लाभार्थियों को आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनमें से 18,000 से ज़्यादा घरों का निर्माण पूरा हो चुका है। कभी कच्चे मकानों और प्लास्टिक की छत तले गुज़र-बसर करने वाले परिवार अब पक्की दीवारों, शौचालय और गरिमापूर्ण जीवन का अनुभव कर रहे हैं।
लाभार्थियों की बदलती तस्वीर
जामताड़ा प्रखंड की नगर पंचायत शहरी क्षेत्र की लाभार्थी सुनीता बावरी ने बताया कि उनका पाँच सदस्यों का परिवार पहले मिट्टी और टीन के घर में रहता था। हर बारिश में घर के भीतर पानी भर जाता था। 2023 में योजना के तहत मकान स्वीकृत होने के बाद आज उनके पास दो कमरे, रसोई और शौचालय वाला पक्का घर है। उनके अनुसार, यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं।
मनरेगा में मज़दूरी करने वाले बलराम रजक ने बताया कि सरकार से तीन किस्तों में मिली राशि से उन्होंने अपना घर पूरा किया। उन्होंने कहा, 'आवास मिलने के बाद अब परिवार और मुझे राहत मिली है।' राघवन गाँव के बावरी समाज (अनुसूचित जाति) के लोगों को भी इस योजना का लाभ मिला है। चापाकल मिस्त्री कोकील बावरी के अनुसार, आवास बन जाने के बाद वे पहले से कहीं बेहतर और आरामदायक जीवन जी रहे हैं।
योजना के तहत मिलने वाली सुविधाएँ
जिला प्रशासन के आँकड़ों के अनुसार, आवास के साथ-साथ लाभार्थियों को शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन और बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध कराया जा रहा है। लाभार्थी कौशल्या देवी ने बताया कि उन्हें 200 यूनिट तक बिजली मुफ़्त मिल रही है और उनकी बुज़ुर्ग सास को सरकारी पेंशन का भी लाभ मिल रहा है। गाँव-गाँव में अब 'आवास प्लस' के बोर्ड लगे हैं, जो इस योजना की पहुँच को दर्शाते हैं।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की राय
नगर पंचायत के वार्ड पार्षद आलोक किस्कु ने बताया कि योजना में किस्त की राशि बढ़ाई गई है और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के ज़रिए पारदर्शी भुगतान से काम में तेज़ी आई है। उन्होंने कहा, 'पहले कच्चा मकान होने के कारण कई तरह की असुविधाएँ होती थीं, अब सुविधा हो रही है।'
आगे का लक्ष्य: जामताड़ा को झोपड़ी-मुक्त बनाना
नगर पंचायत ने आगामी 5 वर्षों में जामताड़ा को पूरी तरह झोपड़ी-मुक्त करने का संकल्प लिया है। लाभार्थियों के अनुसार, इस अवधि में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले सभी परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में 'सबके लिए आवास' के संकल्प को ज़मीनी स्तर पर उतारने की कोशिशें तेज़ हो रही हैं।