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सेबी ने NSE के ₹30,000 करोड़ के IPO को दी हरी झंडी, ऑब्जर्वेशन लेटर जारी

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सेबी ने NSE के ₹30,000 करोड़ के IPO को दी हरी झंडी, ऑब्जर्वेशन लेटर जारी

सारांश

सेबी ने NSE के ₹30,000 करोड़ के IPO को ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर अंतिम चरण की ओर बढ़ा दिया है। यह पूरी तरह OFS होगा — 14.89 करोड़ शेयर, 6% हिस्सेदारी — और BSE पर लिस्ट होगा। देश के सबसे बड़े एक्सचेंज का सार्वजनिक होना भारतीय पूंजी बाज़ार के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव है।

मुख्य बातें

सेबी ने 4 सितंबर को NSE के करीब ₹30,000 करोड़ के IPO के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी किया।
IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल (OFS) होगा; NSE को कोई सीधी राशि प्राप्त नहीं होगी।
लगभग 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश होंगे, जो NSE के पेड-अप कैपिटल का करीब 6% है।
प्रमुख विक्रेताओं में SBI ग्रुप , CPPIB , बैंक ऑफ बड़ौदा और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया शामिल हैं।
NSE के शेयर BSE पर सूचीबद्ध होंगे; NSE ने अपने स्वयं के प्लेटफॉर्म पर ट्रेडिंग की अनुमति न माँगने की पुष्टि की।
अगला कदम: NSE को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करना होगा।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार, 4 सितंबर को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के करीब ₹30,000 करोड़ के इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) के लिए ऑब्जर्वेशन लेटर जारी कर दिया। यह कदम NSE को सार्वजनिक बाज़ार में उतरने की प्रक्रिया में एक निर्णायक मोड़ पर ले आया है।

IPO की संरचना और अगला कदम

सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद NSE को अब रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करना होगा, जिसके बाद IPO औपचारिक रूप से बाज़ार में आ सकेगा। गौरतलब है कि यह पूरा IPO ऑफर फॉर सेल (OFS) के रूप में होगा — अर्थात इससे प्राप्त कोई भी राशि सीधे NSE के पास नहीं जाएगी, बल्कि मौजूदा शेयरधारक अपनी हिस्सेदारी बेचेंगे।

इस IPO के तहत NSE के कुल पेड-अप कैपिटल के करीब 6 प्रतिशत के बराबर लगभग 14.89 करोड़ इक्विटी शेयर बिक्री के लिए पेश किए जाएंगे।

प्रमुख विक्रेता शेयरधारक

इस OFS में कई बड़े संस्थागत निवेशक अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा बेचेंगे। उपलब्ध जानकारी के अनुसार:

SBI ग्रुप करीब 2.475 करोड़ शेयर, MS स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस) लिमिटेड 1.60 करोड़ शेयर, कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (CPPIB) 1.19 करोड़ शेयर, अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरिशस) प्राइवेट लिमिटेड 1.12 करोड़ शेयर, बैंक ऑफ बड़ौदा लगभग 1.10 करोड़ शेयर और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड लगभग 1.09 करोड़ शेयर बेचने की योजना में हैं। इसके अतिरिक्त, कई सरकारी बीमा कंपनियाँ भी इस OFS में अपनी हिस्सेदारी बेच सकती हैं।

लिस्टिंग और सेल्फ-ट्रेडिंग विवाद

NSE के शेयर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सूचीबद्ध होंगे। इस महीने की शुरुआत में BSE के मैनेजिंग डायरेक्टर और सीईओ सुंदररमन राममूर्ति ने स्पष्ट किया था कि NSE ने पुष्टि की है कि लिस्टिंग के बाद वह अपने ही एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति नहीं माँगेगा।

राममूर्ति के अनुसार, 'NSE ने कन्फर्म किया है कि ऑफर डॉक्यूमेंट के साथ सेल्फ-ट्रेडिंग के लिए कोई सप्लीमेंट्री डॉक्यूमेंट जारी नहीं किया जाएगा।' यह स्पष्टीकरण उन रिपोर्टों के बाद आया जिनमें संभावना जताई गई थी कि NSE 'परमिटेड-टू-ट्रेड' (PTT) श्रेणी के तहत अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड कर सकता है।

राममूर्ति ने यह भी बताया कि BSE ने 2017 में अपने एक्सचेंज पर ट्रेडिंग की अनुमति माँगी थी, परंतु उसे यह इजाजत नहीं मिली थी — जो इस नीतिगत स्थिति की पुरानी मिसाल है।

यह ऐसे समय में क्यों अहम है

यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय पूंजी बाज़ार में खुदरा निवेशकों की भागीदारी तेज़ी से बढ़ रही है और NSE देश का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज है। NSE का सार्वजनिक होना न केवल बाज़ार में पारदर्शिता के लिहाज़ से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि यह उन निवेशकों के लिए भी एक अवसर होगा जो भारत के वित्तीय बुनियादी ढाँचे में सीधे हिस्सेदार बनना चाहते हैं। RHP दाखिल होते ही IPO की तारीखों और मूल्य बैंड की औपचारिक घोषणा की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो NSE की परिचालन क्षमता या बुनियादी ढाँचे को इससे क्या लाभ मिलेगा? सेल्फ-ट्रेडिंग विवाद का समाधान सकारात्मक है, पर नियामकीय हितों के टकराव का दीर्घकालिक प्रश्न — एक एक्सचेंज जो स्वयं सूचीबद्ध हो — अभी भी पूरी तरह अनुत्तरित है।
RashtraPress
19 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर क्या होता है और इसका क्या मतलब है?
सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर इस बात का संकेत है कि नियामक ने IPO दस्तावेज़ों की प्रारंभिक समीक्षा पूरी कर ली है। इसके बाद कंपनी रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल कर IPO की तारीख और मूल्य बैंड की घोषणा कर सकती है।
NSE का IPO ऑफर फॉर सेल क्यों है और इसका निवेशकों पर क्या असर होगा?
NSE का IPO पूरी तरह OFS है, यानी इससे मिलने वाली राशि मौजूदा शेयरधारकों को मिलेगी, न कि NSE को। निवेशकों के लिए इसका अर्थ है कि वे NSE में हिस्सेदारी खरीद सकेंगे, लेकिन कंपनी के पास विस्तार के लिए नई पूंजी नहीं आएगी।
NSE के IPO में कौन-कौन से प्रमुख शेयरधारक हिस्सेदारी बेचेंगे?
SBI ग्रुप (करीब 2.475 करोड़ शेयर), MS स्ट्रैटेजिक (मॉरिशस) लिमिटेड (1.60 करोड़), CPPIB (1.19 करोड़), अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (1.12 करोड़), बैंक ऑफ बड़ौदा (करीब 1.10 करोड़) और स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (करीब 1.09 करोड़) शेयर बेचेंगे। कई सरकारी बीमा कंपनियाँ भी हिस्सेदारी बेच सकती हैं।
NSE के शेयर किस एक्सचेंज पर लिस्ट होंगे और क्या वह अपने ही प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करेगा?
NSE के शेयर BSE पर सूचीबद्ध होंगे। NSE ने स्पष्ट किया है कि वह अपने ही एक्सचेंज पर 'परमिटेड-टू-ट्रेड' श्रेणी के तहत ट्रेडिंग की अनुमति नहीं माँगेगा।
NSE के IPO का अगला कदम क्या होगा?
सेबी का ऑब्जर्वेशन लेटर मिलने के बाद NSE को रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP) दाखिल करना होगा। RHP दाखिल होने के बाद IPO की तारीखें और मूल्य बैंड घोषित होंगे और IPO बाज़ार में आ सकेगा।
राष्ट्र प्रेस
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