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सेबी का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) 3 अगस्त से लागू, प्राइस डिस्कवरी और मार्केट एकरूपता में होगा सुधार

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सेबी का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) 3 अगस्त से लागू, प्राइस डिस्कवरी और मार्केट एकरूपता में होगा सुधार

सारांश

सेबी ने 3 अगस्त 2026 से क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू किया है — VWAP की जगह 20 मिनट का पारदर्शी ऑक्शन, जो NYSE और LSE जैसे वैश्विक बाज़ारों की प्रैक्टिस के अनुरूप है। पैसिव फंड्स की बढ़ती हिस्सेदारी और ग्लोबल इंडेक्स में भारत के बढ़ते भार के बीच यह बदलाव क्लोजिंग प्राइस को अधिक स्थिर और भरोसेमंद बनाएगा।

मुख्य बातें

सेबी (SEBI) ने 3 अगस्त, 2026 से इक्विटी कैश सेगमेंट में 20 मिनट का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) चरणबद्ध तरीके से लागू किया है।
CAS, पुराने VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस) तरीके की जगह लेगा, जो आखिरी 30 मिनट के ट्रेड का औसत निकालता था।
31 मार्च, 2026 तक पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी FPI इक्विटी AUM का 30% और घरेलू म्यूचुअल फंड इक्विटी AUM का 28% हो चुकी है।
MSCI और FTSE सूचकांकों में भारतीय शेयरों का भार बढ़कर 12% से 30% के बीच पहुँचा।
नई प्रणाली NYSE , LSE और HKEX जैसे वैश्विक बाज़ारों की अंतरराष्ट्रीय बेस्ट प्रैक्टिस के अनुरूप है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी/SEBI) ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) एक रणनीतिक बदलाव है, जो घरेलू एक्सचेंजों पर एक ही शेयर की अलग-अलग क्लोजिंग प्राइस की समस्या को दूर करेगा और बाज़ार में एकरूपता तथा पारदर्शी प्राइस डिस्कवरी सुनिश्चित करेगा। इक्विटी कैश सेगमेंट के लिए यह 20 मिनट का विशेष सत्र 3 अगस्त, 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा चुका है।

CAS क्या है और यह क्यों लाया गया

सेबी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया, 'इक्विटी कैश सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके को दुनिया के दूसरे बड़े बाज़ारों के साथ एक जैसा करने और सभी तरह के निवेशकों को निष्पक्ष, समान और पारदर्शी पहुँच देने के लिए CAS का एक फ्रेमवर्क पेश किया गया है।' यह कदम NYSE, LSE और HKEX जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में पहले से अपनाई जा रही बेस्ट प्रैक्टिस के अनुरूप है।

गौरतलब है कि यह बदलाव ऐसे समय में आया है जब भारतीय पूंजी बाज़ार में पैसिव इन्वेस्टिंग की हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ रही है और वैश्विक सूचकांकों में भारत का भार भी पहले से कहीं अधिक हो गया है।

VWAP की सीमाएँ और CAS का समाधान

सेबी ने बताया कि पहले प्रचलित वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) तरीके में कैश सेगमेंट के आखिरी 30 मिनट के ट्रेड का औसत निकाला जाता था। इससे इंट्राडे प्राइस में उतार-चढ़ाव और अस्थिरता देखने को मिलती थी, खासकर इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दौरान, क्योंकि बड़े संस्थागत प्रवाह को रियल-टाइम में संभालना मुश्किल होता था।

CAS इस समस्या का समाधान करता है — यह लिक्विडिटी को एक ही पारदर्शी ऑक्शन में केंद्रित करता है। सेबी के अनुसार, 'खरीद और बिक्री के सभी ऑर्डर को एक साथ काम करने की अनुमति देकर, यह सिस्टम आपूर्ति और मांग के अधिकतम मिलान के आधार पर एक ही संतुलन मूल्य बनाने में मदद करता है।'

पैसिव इन्वेस्टिंग और ग्लोबल इंडेक्स का बढ़ता दबाव

सेबी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी FPI इक्विटी AUM का लगभग 30 प्रतिशत और घरेलू म्यूचुअल फंड इक्विटी AUM का 28 प्रतिशत हो चुकी है। इसके साथ ही MSCI और FTSE जैसे वैश्विक सूचकांकों में भारतीय शेयरों का भार बढ़कर 12 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के बीच पहुँच गया है।

इस बदलाव ने ट्रैकिंग एरर को कम करने के लिए क्लोजिंग प्राइस पर सटीक ट्रेड पूरा करने की माँग को काफी बढ़ा दिया है, जिसे VWAP तरीका पूरी तरह पूरा नहीं कर पाता था।

निवेशकों और बाज़ार पर असर

सेबी का कहना है कि CAS से कीमतों में कम उतार-चढ़ाव और ट्रेड पूरा होने की अधिक निश्चितता सुनिश्चित होगी। अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम के दौरान भी क्लोजिंग प्राइस अधिक स्थिर और भरोसेमंद रहेगी। यह बदलाव खुदरा और संस्थागत — दोनों तरह के निवेशकों को एक समान और निष्पक्ष मंच उपलब्ध कराएगा।

चरणबद्ध क्रियान्वयन से बाज़ार प्रतिभागियों को नई प्रणाली के अनुकूल होने का समय मिलेगा, और आने वाले महीनों में इसके व्यापक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन में है। पैसिव फंड्स की बढ़ती हिस्सेदारी और ग्लोबल इंडेक्स में भारत के बढ़ते वज़न ने यह बदलाव अपरिहार्य बना दिया था — VWAP तरीका बड़े संस्थागत प्रवाह के दौर में क्लोजिंग प्राइस को विश्वसनीय बनाए रखने में विफल साबित हो रहा था। हालाँकि, चरणबद्ध क्रियान्वयन से छोटे और मध्यम आकार के बाज़ार प्रतिभागियों को अनुकूलन का समय मिलेगा, यह देखना होगा कि ऑक्शन विंडो में लिक्विडिटी का केंद्रीकरण वास्तव में उस स्थिरता को लाता है जिसका वादा किया गया है या नई तरह की कीमत-हेरफेर की आशंकाएँ पैदा करता है।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी का क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) क्या है?
CAS एक 20 मिनट का विशेष ऑक्शन सत्र है जो इक्विटी कैश सेगमेंट में शेयरों की क्लोजिंग प्राइस तय करने के लिए 3 अगस्त, 2026 से लागू किया गया है। यह NYSE, LSE और HKEX जैसे वैश्विक बाज़ारों की अंतरराष्ट्रीय बेस्ट प्रैक्टिस के अनुरूप है और सभी निवेशकों को निष्पक्ष व पारदर्शी पहुँच देता है।
CAS, पुराने VWAP तरीके से कैसे अलग है?
VWAP में कैश सेगमेंट के आखिरी 30 मिनट के ट्रेड का औसत निकाला जाता था, जिससे इंट्राडे अस्थिरता और इंडेक्स रीबैलेंसिंग के दौरान प्राइस में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता था। CAS में लिक्विडिटी एक ही पारदर्शी ऑक्शन में केंद्रित होती है, जो आपूर्ति-मांग के अधिकतम मिलान पर एकल संतुलन मूल्य तय करती है।
CAS लागू करने की ज़रूरत क्यों पड़ी?
पैसिव फंड्स की हिस्सेदारी 31 मार्च, 2026 तक FPI इक्विटी AUM का 30% और घरेलू म्यूचुअल फंड इक्विटी AUM का 28% हो चुकी है। साथ ही MSCI और FTSE जैसे वैश्विक सूचकांकों में भारतीय शेयरों का भार 12% से 30% के बीच पहुँच गया है, जिससे सटीक क्लोजिंग प्राइस पर ट्रेड की माँग बढ़ी और VWAP की सीमाएँ उजागर हुईं।
CAS से निवेशकों को क्या फायदा होगा?
सेबी के अनुसार, CAS से कीमतों में कम उतार-चढ़ाव और ट्रेड पूरा होने की अधिक निश्चितता सुनिश्चित होगी। अधिक ट्रेडिंग वॉल्यूम के दौरान भी क्लोजिंग प्राइस स्थिर और भरोसेमंद रहेगी, जिससे खुदरा और संस्थागत — दोनों निवेशकों को समान और निष्पक्ष मंच मिलेगा।
CAS कब से और कैसे लागू होगा?
CAS 3 अगस्त, 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा चुका है। इक्विटी कैश सेगमेंट में नियमित ट्रेडिंग सत्र के बाद 20 मिनट का यह विशेष ऑक्शन सत्र होगा, जिसमें सभी खरीद-बिक्री ऑर्डर एक साथ मिलाए जाएँगे।
राष्ट्र प्रेस
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