सेबी प्रमुख तुहिन कांत पांडे: क्लोजिंग ऑक्शन सेशन में हेरफेर का कोई सबूत नहीं, बाजार के लिए ऐतिहासिक सुधार
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 12 अगस्त 2026 को मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में स्पष्ट किया कि शेयर बाजारों में हाल ही में लागू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) में किसी प्रकार की हेरफेर या अनियमितता के कोई प्रमाण नहीं मिले हैं। उन्होंने इस नई व्यवस्था को भारतीय पूंजी बाजार की संरचना में किया गया एक महत्वपूर्ण सुधार बताया, जो देश के बाजारों को वैश्विक मानकों के करीब लाता है।
क्लोजिंग ऑक्शन सेशन क्या है
स्टॉक एक्सचेंजों ने पिछले सप्ताह क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) की शुरुआत की। इस व्यवस्था के तहत नियमित कारोबार समाप्त होने के बाद 20 मिनट का एक विशेष सत्र आयोजित किया जाता है, जिसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर एकत्र किए जाते हैं। इसके बाद उस स्तर पर क्लोजिंग प्राइस निर्धारित होता है जहाँ सबसे अधिक मात्रा में सौदों का मिलान संभव हो सके।
यह नई प्रणाली पुरानी व्यवस्था की जगह लेती है, जिसमें किसी शेयर का क्लोजिंग प्राइस नियमित कारोबार के अंतिम 30 मिनट में हुए सौदों के भारित औसत मूल्य (Weighted Average Price) के आधार पर तय किया जाता था।
वैश्विक बाजारों से तुलना
पांडे ने कहा, 'CAS बाजार की माइक्रोस्ट्रक्चर में एक बहुत बड़ा सुधार है और हम इसके पीछे मजबूती से खड़े हैं। दुनिया के कई प्रमुख बाजार पहले से इस व्यवस्था को अपना चुके हैं। जापान ने इसे 2024 में लागू किया, जबकि हांगकांग, अमेरिका, जर्मनी, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया में भी यह प्रणाली पहले से मौजूद है।'
गौरतलब है कि भारत इस सुधार को अपनाने वाले प्रमुख उभरते बाजारों में अब शामिल हो गया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब वैश्विक संस्थागत निवेशक भारतीय बाजारों में मूल्य निर्धारण की पारदर्शिता को लेकर अधिक सजग हो रहे हैं।
क्लोजिंग प्राइस का महत्व
सेबी प्रमुख ने बताया कि क्लोजिंग प्राइस का उचित निर्धारण अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसी के आधार पर विभिन्न शेयर सूचकांकों, पैसिव निवेश उत्पादों और म्यूचुअल फंडों की नेट एसेट वैल्यू (NAV) तय होती है। नियामकों और स्टॉक एक्सचेंजों का मानना है कि CAS से मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, कुशल और निष्पक्ष बनेगी — विशेष रूप से बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए, जिनके बड़े ऑर्डर अक्सर बाजार बंद होने के समय निष्पादित होते हैं।
भागीदारी बढ़ाने पर जोर
पांडे ने स्वीकार किया कि फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती इस नई व्यवस्था में बाजार सहभागिता बढ़ाना है। उन्होंने कहा, 'कई ब्रोकरों ने संकेत दिए हैं कि भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है। CAS एक पूरी तरह पारदर्शी बाजार व्यवस्था है, जहाँ कीमतों का निर्धारण खुली प्रक्रिया के जरिए होता है। इसमें हर गतिविधि दिखाई देती है और अंत में एक निष्पक्ष मूल्य सामने आता है।'
सेबी लगातार विभिन्न हितधारकों से बातचीत कर रही है और सभी सुझावों तथा फीडबैक पर विचार किया जा रहा है। यदि भागीदारी बढ़ाने या प्रक्रिया को और बेहतर बनाने के लिए किसी अतिरिक्त कदम की आवश्यकता होगी, तो उस पर भी विचार किया जाएगा।
आगे की राह
तुहिन कांत पांडे ने दोहराया कि सेबी इस नई व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रही है और अब तक ऐसी कोई जानकारी नहीं मिली है जिससे बाजार में हेरफेर की आशंका जाहिर हो। उन्होंने विश्वास जताया कि जैसे-जैसे अधिक निवेशक और ब्रोकर इस प्रणाली में भागीदारी बढ़ाएंगे, CAS भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक सफल और दीर्घकालिक सुधार साबित होगा।