सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का ऐलान: FPI ऑनबोर्डिंग होगी आसान, कमोडिटी डेरिवेटिव्स में बढ़ेगी विदेशी भागीदारी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी/SEBI) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को मुंबई में आयोजित जेपी मॉर्गन इंडिया कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि नियामक भारतीय पूंजी बाजार को और अधिक सुलभ, कुशल एवं आकर्षक बनाने के लिए कई बड़े सुधारों पर सक्रिय रूप से काम कर रहा है। पांडे ने कहा कि सेबी का मुख्य जोर विदेशी निवेशकों की बाजार पहुंच को सरल बनाने, कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाने और नवीन निवेश उत्पादों के विकास पर है।
विदेशी निवेशकों के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग
पांडे ने बताया कि सेबी विदेश में रहने वाले निवेशकों के लिए डिजिटल ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया को और अधिक तीव्र एवं जोखिम-अनुकूल बनाने की दिशा में कार्यरत है। उन्होंने कहा कि नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागियों ने पहले ही डिजिटल वर्कफ्लो और एपीआई-आधारित एकीकरण अपनाना शुरू कर दिया है, जिससे विदेशी निवेशकों के पंजीकरण और ऑनबोर्डिंग में लगने वाला समय उल्लेखनीय रूप से कम हुआ है। सेबी अब इस तकनीक-आधारित ढाँचे को पूरे बाजार तंत्र में व्यापक रूप से लागू करने पर ज़ोर दे रहा है।
स्वागत-एफआई फ्रेमवर्क और कमोडिटी बाजार
पांडे ने स्वागत-एफआई फ्रेमवर्क का उल्लेख करते हुए बताया कि यह ढाँचा कम जोखिम वाले और विश्वसनीय विदेशी निवेशकों के लिए विशेष रूप से विकसित किया गया है। 1 जून 2026 को इसके लागू होने के बाद से अब तक लगभग 205 विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) इस व्यवस्था का उपयोग कर चुके हैं। इसके अलावा, सेबी FPI को गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव बाजारों में अधिक भागीदारी की अनुमति देने और रीट्स (REITs) तथा इनविट्स (InvITs) की इकाइयों के विरुद्ध डिपॉजिटरी रिसीट्स जारी करने जैसे कदमों पर भी सक्रियता से विचार कर रहा है।
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार और नए निवेश उपकरण
कॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए सेबी मार्केट मेकिंग फ्रेमवर्क पर काम कर रहा है। पांडे ने कहा कि इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए बॉन्ड बाजार तक पहुंच सुगम बनाना और रेपो बाजार के उपयोग को प्रोत्साहित करना है। सेबी फिक्स्ड इनकम चैनल पार्टनर्स की शुरुआत पर भी परामर्श कर रहा है, जिससे विनियमित ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से बॉन्ड निवेशकों तक पहुंच और विस्तृत होगी।
गौरतलब है कि निवेशकों को ऋण साधनों में निहित जोखिमों की स्पष्ट समझ देने के लिए एक क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर ढाँचा लाने पर भी विचार-विमर्श जारी है।
डेरिवेटिव्स सेटलमेंट और म्यूचुअल फंड सुधार
पांडे ने बताया कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) लागू होने के बाद अब सेबी डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के दिन सेटलमेंट कीमतों से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है, जिस पर एक परामर्श पत्र पहले ही जारी किया जा चुका है। म्यूचुअल फंड क्षेत्र में भी सेबी नकद बाजार में म्यूचुअल फंड स्कीम्स के लिए नेट सेटलमेंट ऑफ फंड्स की व्यवस्था पर विचार कर रहा है।
बाजार की मजबूती पर दीर्घकालिक दृष्टिकोण
यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक निवेशक उभरते बाजारों में नए अवसर तलाश रहे हैं और भारत की विकास दर इसे एक प्रमुख गंतव्य बना रही है। पांडे ने स्पष्ट किया कि बाजार तक आसान पहुंच, व्यापक निवेशक भागीदारी और बाजार की दीर्घकालिक मजबूती सेबी की प्रमुख प्राथमिकताएँ बनी रहेंगी। सेबी सिक्योरिटीज लेंडिंग एंड बॉरोइंग मैकेनिज्म को सुदृढ़ करने तथा हेजिंग और आर्बिट्राज गतिविधियों को बढ़ावा देने के प्रयास भी जारी रखेगा, जिससे बेहतर प्राइस डिस्कवरी में मदद मिलेगी।