सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को दिया धैर्य रखने का सुझाव, बाजार की मजबूती पर जोर

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सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को दिया धैर्य रखने का सुझाव, बाजार की मजबूती पर जोर

सारांश

सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत का पूंजी बाजार मजबूती से बढ़ रहा है। उन्होंने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे अस्थायी उतार-चढ़ाव पर धैर्य बनाए रखें और बाजार के स्थायित्व को बनाए रखने के लिए कदम उठाने की आवश्यकता बताई।

Key Takeaways

  • ग्लोबल अस्थिरता के बावजूद भारत के पूंजी बाजार में मजबूती है।
  • रिटेल निवेशकों को धैर्य बनाए रखना चाहिए।
  • बाजार के उतार-चढ़ाव पर तुरंत प्रतिक्रिया न करें।
  • सेबी निवेशकों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठा रहा है।
  • भारतीय बाजार के विकास के लिए तकनीकी नवाचार महत्वपूर्ण हैं।

नई दिल्ली, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने शनिवार को कहा कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत के पूंजी बाजार लगातार मजबूत और विविध होते जा रहे हैं।

राष्ट्रीय राजधानी में एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए, सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न करें।

उन्होंने कहा, "रिटेल निवेशकों के लिए सबसे अच्छी रणनीति धैर्य बनाए रखना है।" उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक रूप से, बड़े वैश्विक संकटों के बाद बाजार में सुधार देखने को मिलता है।

पांडे ने बताया कि भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं।

उन्होंने कहा, "हमारे बाजार लगातार गहरे और विविध हो रहे हैं और उनकी मजबूती भी बढ़ रही है, लेकिन जैसे-जैसे बाजार का आकार और जटिलता बढ़ती है, वैसे-वैसे वे वैश्विक घटनाओं से भी अधिक प्रभावित होने लगते हैं।"

वैश्विक बाजारों में अस्थिरता को स्वीकार करते हुए, उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, तकनीकी बदलाव और ऊर्जा संकट अनिश्चितता में योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "भू-राजनीतिक तनाव आर्थिक संबंधों को आकार दे रहे हैं। मध्य पूर्व में संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित किया है।"

उन्होंने बताया कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है, जिसका प्रभाव वैश्विक पूंजी बाजारों पर भी पड़ा है।

पांडे के अनुसार, आज के वित्तीय बाजारों की एक खासियत यह है कि उनमें अस्थिरता ज्यादा देखने को मिलती है, क्योंकि जानकारी और खबरें तेजी से पूरी दुनिया में फैलती हैं। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे दौर स्थायी नहीं होते।

उन्होंने कहा, "एक बात स्पष्ट है कि अत्यधिक अस्थिरता के दौर हमेशा के लिए नहीं रहते।"

वैश्विक बाजारों में हो रहे संरचनात्मक बदलावों का जिक्र करते हुए सेबी चीफ ने कहा कि आर्थिक विभाजन, बदलते व्यापार मार्ग और तकनीक की बढ़ती भूमिका बाजारों को तेजी से बदल रही है।

उन्होंने बताया कि एल्गोरिदमिक ट्रेडिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एडवांस्ड डेटा एनालिटिक्स के कारण बाजार पहले से कहीं ज्यादा तेजी से काम कर रहे हैं।

सेबी चेयरमैन ने यह भी कहा कि आज के दौर में जानकारी बहुत तेजी से फैलती है और राय उससे भी तेज, जिसके कारण बाजार अक्सर खबरों और कथाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देने लगते हैं।

उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बाजार की तेजी के साथ उसकी स्थिरता भी बनी रहे।

आगे की दिशा पर बात करते हुए सेबी प्रमुख ने कहा कि भारत के आर्थिक विकास के अगले चरण के लिए मजबूत बॉंड बाजार, संस्थागत निवेशकों की ज्यादा भागीदारी और तकनीकी नवाचार जरूरी होंगे।

उन्होंने यह भी बताया कि निवेशकों की सुरक्षा के लिए सेबी कई कदम उठा रहा है, जिनमें सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी की निगरानी और पीएआरआरवीए जैसे निगरानी सिस्टम को मजबूत करना शामिल है, ताकि बाजार में संभावित हेरफेर और गलत जानकारी का पता लगाया जा सके।

Point of View

जो वित्तीय स्थिरता के लिए आवश्यक है।
NationPress
14/03/2026

Frequently Asked Questions

सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को क्या सलाह दी?
सेबी प्रमुख ने रिटेल निवेशकों को सलाह दी कि वे बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर जल्दबाजी में प्रतिक्रिया न करें और धैर्य बनाए रखें।
भारत के पूंजी बाजार में क्या विशेषताएँ हैं?
भारत के पूंजी बाजार आकार, विविधता और मजबूती के मामले में तेजी से बढ़ रहे हैं।
वैश्विक अस्थिरता का भारत के बाजार पर क्या प्रभाव है?
वैश्विक अस्थिरता से भारत के पूंजी बाजार भी प्रभावित होते हैं, लेकिन इसके बावजूद बाजार की मजबूती बनी हुई है।
सेबी किस प्रकार निवेशकों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रहा है?
सेबी निवेशकों की सुरक्षा के लिए सोशल मीडिया पर भ्रामक जानकारी की निगरानी और पीएआरआरवीए जैसे सिस्टम को मजबूत कर रहा है।
भारतीय पूंजी बाजार के अगले चरण के लिए क्या आवश्यक है?
भारतीय पूंजी बाजार के अगले चरण के लिए मजबूत बॉंड बाजार, संस्थागत निवेशकों की भागीदारी और तकनीकी नवाचार आवश्यक हैं।
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