सेबी प्रमुख का बयान: भारत वैश्विक निवेश के लिए बना है एक प्रमुख गंतव्य

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सेबी प्रमुख का बयान: भारत वैश्विक निवेश के लिए बना है एक प्रमुख गंतव्य

सारांश

नई दिल्ली, 11 अप्रैल। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि भारत आज भी वैश्विक निवेश के लिए एक खुला और आकर्षक गंतव्य है। उन्होंने मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार और तेजी से बढ़ते निवेशक आधार की बात की।

Key Takeaways

  • भारत का मैक्रोइकॉनॉमिक आधार मजबूत है
  • वैश्विक निवेश के लिए आकर्षण बढ़ रहा है
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ा है
  • स्थायी विकास के लिए वैश्विक साझेदारी आवश्यक है
  • नीतियों में सुधार से निवेश को सरल बनाया गया है

नई दिल्ली, 11 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के प्रमुख तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि भारत आज भी वैश्विक निवेश के लिए एक खुला और आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। उन्होंने बताया कि भारत का मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार, तेजी से बढ़ता निवेशक आधार और सुधारों पर केंद्रित नीतियां इसे वैश्विक पूंजी के लिए एक विशेष स्थान बनाती हैं।

सेबी प्रमुख ने ये बातें अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और भारतीय महावाणिज्य दूतावास (सीजीआई) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित एक इंटरएक्टिव सत्र के दौरान कही। इस सत्र में वैश्विक निवेशकों और वेंचर कैपिटल से जुड़े दिग्गजों ने भारत में निवेश के अवसरों और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों पर चर्चा की।

अपने संबोधन में, सेबी प्रमुख ने पारदर्शी, परामर्श-आधारित और तकनीक-संचालित नियामकीय ढांचे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि सेबी का ध्यान जोखिम-आधारित और निवेश को आसान बनाने वाली नीतियों पर है, जिससे विदेशी निवेशकों के लिए बाजार में प्रवेश सरल हो सके और पूंजी बाजार की स्थिरता बनी रहे।

उन्होंने बताया कि हाल के समय में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) के रजिस्ट्रेशन और री-केवाईसी प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। साथ ही, डिजिटल प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल में बढ़ोतरी, आईपीओ बाजार की मजबूती और वैकल्पिक निवेश फंड्स (एआईएफ) की बढ़ती भूमिका ने बाजार को और मजबूत किया है। इसके अलावा, घरेलू निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भी बाजार को स्थिरता और गहराई प्रदान कर रही है।

आर्थिक स्थिति पर चर्चा करते हुए पांडे ने कहा कि नियंत्रित महंगाई, मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार और संतुलित बाहरी खाते भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देते हैं, जिससे यह दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में बना हुआ है।

सैन फ्रांसिस्को में भारत के महावाणिज्य दूत के. श्रीकर रेड्डी ने कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। उन्होंने बताया कि सुधारों, मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के चलते भारत का विकास तेज हो रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।

इस मौके पर सीआईआई के प्रेसिडेंट डिजिग्नेट और टाटा केमिकल्स के एमडी और सीईओ रामकृष्णन मुकुंदन ने सरकार, उद्योग और वैश्विक निवेशकों के बीच सहयोग को भारत के भविष्य की ग्रोथ के लिए आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि भारत की आने वाली प्रगति वैश्विक साझेदारी पर निर्भर करेगी, खासकर अमेरिका के साथ, जिससे इन्वोवेशन, मैन्युफैक्चरिंग और सतत विकास को बढ़ावा मिलेगा।

इस सत्र के दौरान निवेशकों और नीति-निर्माताओं के बीच खुलकर बातचीत हुई, जिसमें नियामकीय प्रक्रियाओं को और सरल बनाने, क्रॉस-बॉर्डर निवेश नियमों में स्पष्टता लाने, डीप-टेक सेक्टर के लिए फंडिंग बढ़ाने और डिजिटल प्रक्रियाओं को तेज करने जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई।

Point of View

NationPress
12/04/2026

Frequently Asked Questions

भारत में वैश्विक निवेश के अवसर क्या हैं?
भारत का मजबूत मैक्रोइकॉनॉमिक आधार और तेजी से बढ़ता निवेशक आधार इसे वैश्विक निवेश के लिए एक आकर्षक गंतव्य बनाते हैं।
सेबी का क्या कार्य है?
सेबी का कार्य भारतीय पूंजी बाजार को विनियमित करना और विदेशी निवेशकों के लिए इसे आकर्षक बनाना है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार का क्या हाल है?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार 240 अरब डॉलर से अधिक हो चुका है, और इसे 2030 तक 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है।
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