सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे का स्पष्ट संदेश: एआई उपकरणों की जवाबदेही विनियमित संस्थाओं पर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 19 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि सेबी के नियामकीय दायरे में आने वाली सभी संस्थाएँ अपने द्वारा उपयोग किए जाने वाले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग उपकरणों के लिए पूरी तरह जवाबदेह होंगी — चाहे वे उपकरण स्वयं विकसित किए गए हों या किसी तीसरे पक्ष से प्राप्त किए गए हों। यह घोषणा मुंबई में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (FICCI) द्वारा आयोजित फिक्की कैपाम 2026 के 23वें संस्करण को संबोधित करते हुए की गई।
एआई जवाबदेही पर सेबी का रुख
पांडे ने सम्मेलन में कहा, "एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग के साथ, सेबी द्वारा विनियमित प्रत्येक संस्था उस एआई या मशीन लर्निंग उपकरण के लिए पूरी तरह जवाबदेह रहेगी जिसका वह उपयोग करती है, चाहे वह आंतरिक रूप से विकसित किया गया हो या बाहरी स्रोत से लिया गया हो।" यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब वित्तीय बाजारों में एआई-आधारित ट्रेडिंग एल्गोरिदम और स्वचालित निर्णय-प्रणालियों का उपयोग तेज़ी से बढ़ रहा है।
सेबी अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि निवेशकों के हितों की सुरक्षा और बाज़ार की विश्वसनीयता नियामक की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि नियामक ऐसी व्यवस्था विकसित कर रहा है जो नवाचार को प्रोत्साहित करे, लेकिन जवाबदेही और पारदर्शिता से कोई समझौता न हो।
आईटी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना
पांडे ने बताया कि बाज़ार अवसंरचना संस्थानों की तकनीकी क्षमता का आकलन करने के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने कहा, "हम बाज़ार अवसंरचना संस्थानों के लिए एक सूचना प्रौद्योगिकी सुदृढ़ता सूचकांक की संभावना का अध्ययन कर रहे हैं, जिससे महत्वपूर्ण प्रणालियों की मजबूती का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सके।" इस सूचकांक का उद्देश्य प्रणालीगत जोखिम-प्रतिरोधकता को मापने के लिए एक वस्तुनिष्ठ ढाँचा तैयार करना है।
पूंजी बाज़ार और निवेश संस्कृति
सेबी चेयरमैन ने कहा कि भारत के पूंजी बाज़ार अब केवल आर्थिक गतिविधियों का दर्पण नहीं रहे, बल्कि "स्वयं आर्थिक वृद्धि के महत्वपूर्ण चालक बन चुके हैं।" उन्होंने म्यूचुअल फंड और सिस्टेमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) की सराहना करते हुए कहा कि इन माध्यमों ने बड़ी संख्या में घरेलू परिवारों को बाज़ार-आधारित निवेश से जोड़ा है और भारतीय पूंजी बाज़ार की नींव मजबूत की है।
गौरतलब है कि पांडे ने यह भी स्वीकार किया कि पूंजी बाज़ार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने की अभी भी पर्याप्त संभावनाएँ मौजूद हैं। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि वित्तीय परिसंपत्तियों में निवेश की संस्कृति को और व्यापक एवं गहरा बनाने की आवश्यकता है।
नियामकीय रणनीति: संतुलन और भविष्य-दृष्टि
पांडे के अनुसार, सेबी की नियामकीय रणनीति संतुलित, अनुपातिक और भविष्योन्मुखी नियमों पर आधारित है। उन्होंने कहा कि भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था निवेश के नए अवसर पैदा करेगी, इसलिए पूंजी बाज़ार को अधिक गहरा, नवोन्मेषी और व्यापक बनाना होगा — साथ ही उनकी निष्पक्षता, सुरक्षा और विश्वसनीयता भी सुनिश्चित करनी होगी। उन्होंने कहा, "मुख्य प्रश्न यह है कि हम ऐसे बाज़ार कैसे विकसित करें जो अधिक गहरे और अधिक नवोन्मेषी हों, लेकिन साथ ही अधिक निष्पक्ष, सुरक्षित और भरोसेमंद भी बने रहें।"
सेबी का यह रुख संकेत देता है कि आने वाले समय में एआई-संचालित वित्तीय सेवाओं के लिए नियामकीय ढाँचा और अधिक स्पष्ट एवं कड़ा होगा।