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सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की चेतावनी: CAS में हेरफेर पर होगी तत्काल सख्त कार्रवाई

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सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे की चेतावनी: CAS में हेरफेर पर होगी तत्काल सख्त कार्रवाई

सारांश

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने मुंबई में साफ किया — CAS में गड़बड़ी की तो तत्काल कार्रवाई होगी। नई प्रणाली पुराने VWAP सिस्टम से ज़्यादा हेरफेर-रोधी है और 20 मिनट के विशेष सेशन में क्लोजिंग प्राइस तय करती है।

मुख्य बातें

सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 19 अगस्त को मुंबई में CAS में हेरफेर पर तत्काल कार्रवाई की चेतावनी दी।
नई CAS प्रणाली इस महीने की शुरुआत में लागू हुई; बाज़ार बंद होने के बाद 20 मिनट के अलग सेशन में क्लोजिंग प्राइस तय होती है।
CAS ने पुराने VWAP आधारित सिस्टम की जगह ली, जो नियमित बाज़ार के अंतिम 30 मिनट की औसत कीमत पर निर्भर था।
सेबी के अनुसार नई प्रणाली में हेरफेर पकड़ना पुरानी व्यवस्था की तुलना में अधिक आसान है।
CAS का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस निर्धारण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने बुधवार, 19 अगस्त को मुंबई में स्पष्ट किया कि नवलागू क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) प्रणाली में किसी भी प्रकार की हेराफेरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के विरुद्ध तत्काल कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह चेतावनी फिक्की कैपिटल मार्केट्स कॉन्फ्रेंस के हाशिये पर मीडिया से बातचीत के दौरान दी।

मुख्य घोषणा

पांडे ने सीधे शब्दों में कहा, 'हम एक बात साफ करना चाहते हैं कि अगर लोग CAS में हेरफेर करते हैं, तो हम उनके खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई करेंगे।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि जो लोग यह सोचते हैं कि वे CAS को बदनाम करने के लिए उसमें गड़बड़ी कर सकते हैं, वे गलतफहमी में हैं।

CAS बनाम पुराना VWAP सिस्टम

सेबी प्रमुख ने बताया कि नई CAS प्रणाली पुराने वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) आधारित तंत्र की तुलना में हेरफेर पकड़ने में कहीं अधिक सक्षम है। उनके अनुसार, 'CAS सिस्टम में हम हेरफेर को अपेक्षाकृत आसानी से पकड़ सकते हैं।' पुरानी व्यवस्था में नियमित बाज़ार के अंतिम 30 मिनट के ट्रेड की औसत कीमत के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय होती थी, जो हेरफेर के प्रति अधिक संवेदनशील मानी जाती थी।

CAS प्रणाली कैसे काम करती है

इस महीने की शुरुआत में लागू किए गए CAS के तहत बाज़ार बंद होने के बाद 20 मिनट का एक अलग सेशन चलता है। इस दौरान एक्सचेंज खरीद और बिक्री के ऑर्डर संग्रहीत करते हैं और शेयर की क्लोजिंग प्राइस उस स्तर पर निर्धारित की जाती है जहाँ सर्वाधिक वॉल्यूम का ट्रेड संभव हो। यह प्रणाली विशेष रूप से बड़े ऑर्डर के निष्पादन को अधिक कुशल और पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।

पारदर्शिता और निष्पक्षता पर जोर

पांडे ने रेखांकित किया कि CAS का मूल उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस निर्धारण को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है। गौरतलब है कि भारतीय पूंजी बाज़ार में क्लोजिंग प्राइस को लेकर हेरफेर की आशंकाएँ पहले भी उठती रही हैं, और सेबी का यह कदम उन्हीं चिंताओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है। सेबी ने बाज़ार प्रतिभागियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि नई व्यवस्था की प्रभावशीलता पर संदेह पैदा करने की कोई भी कोशिश नज़रअंदाज़ नहीं होगी।

आगे क्या

सेबी की यह सख्त चेतावनी ऐसे समय में आई है जब CAS प्रणाली अभी अपने शुरुआती चरण में है और बाज़ार प्रतिभागी इसकी कार्यप्रणाली को समझ रहे हैं। नियामक की निगरानी क्षमता और त्वरित कार्रवाई की प्रतिबद्धता बाज़ार में विश्वास बनाए रखने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि केवल चेतावनी जारी करे। गौरतलब है कि भारतीय बाज़ार में क्लोजिंग प्राइस हेरफेर के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, इसलिए नई प्रणाली की विश्वसनीयता उसके क्रियान्वयन पर टिकी है।
RashtraPress
19 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) क्या है?
CAS एक नई प्रणाली है जिसे सेबी ने अगस्त 2025 में लागू किया है। इसमें बाज़ार बंद होने के बाद 20 मिनट के अलग सेशन में खरीद-बिक्री के ऑर्डर एकत्र कर शेयर की क्लोजिंग प्राइस उस स्तर पर तय की जाती है जहाँ सर्वाधिक वॉल्यूम का ट्रेड संभव हो।
CAS ने किस पुरानी व्यवस्था की जगह ली है?
CAS ने VWAP (वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस) आधारित सिस्टम की जगह ली है, जिसमें नियमित बाज़ार के अंतिम 30 मिनट के ट्रेड की औसत कीमत के आधार पर क्लोजिंग प्राइस तय होती थी।
सेबी ने CAS में हेरफेर पर क्या कहा?
सेबी चेयरमैन तुहिन कांत पांडे ने 19 अगस्त को स्पष्ट किया कि CAS में हेरफेर करने वालों के विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नई प्रणाली में हेरफेर पकड़ना पुरानी व्यवस्था की तुलना में अधिक आसान है।
CAS से बाज़ार प्रतिभागियों को क्या फायदा होगा?
CAS क्लोजिंग प्राइस निर्धारण को अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनाती है। विशेष रूप से बड़े ऑर्डर के निष्पादन में यह प्रणाली अधिक कुशल मानी जाती है और हेरफेर की संभावना को कम करती है।
सेबी ने CAS क्यों लागू किया?
सेबी ने क्लोजिंग प्राइस तय करने की प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए CAS लागू किया। पुरानी VWAP प्रणाली में हेरफेर की आशंकाएँ थीं, जिन्हें दूर करने के लिए यह नया ढाँचा तैयार किया गया।
राष्ट्र प्रेस
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