अखिलेश के आरोपों पर योगी मंत्रियों का पलटवार: 'सपा राज में नौकरी का रेट तय होता था'
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के दो वरिष्ठ मंत्रियों ने 3 अक्टूबर को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयान पर कड़ा पलटवार किया। व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल और राज्य मंत्री हंसराज विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में सरकारी नौकरियाँ पैसे और सिफारिश के बल पर मिलती थीं, जबकि वर्तमान योगी सरकार ने भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है।
मंत्री अग्रवाल के आरोप
कपिल देव अग्रवाल ने कहा कि जिस पार्टी के शासनकाल में परीक्षाओं में सामूहिक नकल होती थी, प्रश्नपत्र लीक होते थे और सरकारी नौकरियों में जातिगत पक्षपात के आरोप लगते थे, उसके नेता का आज उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर टिप्पणी करना प्रदेश की जनता को हास्यास्पद लगता है। उन्होंने कहा कि उस दौर में नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं और उनके परिवारों को कथित सौदेबाजी और सिफारिश के चक्कर में पड़ना पड़ता था।
अग्रवाल ने दावा किया कि योगी सरकार में अब तक 9.5 लाख से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरियाँ दी गई हैं। उनके अनुसार, इन नियुक्तियों में जाति या किसी अन्य आधार पर भेदभाव नहीं किया गया। उन्होंने पुलिस और पीएसी भर्ती में बेटियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का भी उल्लेख किया।
विश्वकर्मा की प्रतिक्रिया
हंसराज विश्वकर्मा ने कहा कि अखिलेश यादव को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर सवाल उठाने से पहले सपा सरकार के अपने कार्यकाल पर नज़र डालनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा शासन में हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर नकल होती थी और सरकारी नौकरियों में राजनीतिक पहुँच रखने वालों को प्राथमिकता मिलती थी।
विश्वकर्मा ने कहा कि मौजूदा सरकार ने भर्ती आयोगों के माध्यम से नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया है और आज अभ्यर्थी बिना किसी भय के परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं। उन्होंने आशा बहुओं, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, पीआरडी जवानों, होमगार्ड और पुलिसकर्मियों के लिए किए गए कार्यों का भी उल्लेख किया।
सपा पर व्यापक आरोप
दोनों मंत्रियों ने पूर्ववर्ती सपा सरकार पर भू-माफिया, शिक्षा माफिया और अपराधियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि योगी सरकार ने जनता से किए गए वादों को ज़मीन पर उतारने का काम किया है। विश्वकर्मा ने छात्रवृत्ति योजनाओं और विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं को भी सरकार की उपलब्धियों से जोड़ा।
आगे क्या
यह राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप ऐसे समय में सामने आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की पृष्ठभूमि में भर्ती पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था प्रमुख चुनावी मुद्दे बन रहे हैं। गौरतलब है कि सपा और BJP दोनों ही युवा मतदाताओं को साधने के लिए रोज़गार और परीक्षा सुधार के मुद्दों पर एक-दूसरे पर हमलावर रहते हैं। अखिलेश यादव की ओर से इन आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।