22 सितंबर 2026
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योगी सरकार में मेरिट से भर्ती, पहले बिकती थीं नौकरियाँ: मनोज पांडे का अखिलेश पर पलटवार

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योगी सरकार में मेरिट से भर्ती, पहले बिकती थीं नौकरियाँ: मनोज पांडे का अखिलेश पर पलटवार

सारांश

यूपी के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे ने अखिलेश यादव के पीडीए-अधिकारी हटाने के आरोप को सिरे से खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार में 2 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की पारदर्शी भर्ती हुई और 9.5 लाख युवाओं को नौकरी मिली — जबकि पहले हजरतगंज-लालबाग में नौकरियाँ खुलेआम बिकती थीं।

मुख्य बातें

कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे ने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ में अखिलेश यादव के पीडीए अधिकारियों को हटाने के आरोप पर पलटवार किया।
पांडे का दावा: योगी सरकार में 2 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती मेरिट के आधार पर हुई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने के दावे को मंत्री ने बड़ी पहल बताया।
पांडे ने हजरतगंज और लालबाग का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में नौकरियाँ कथित तौर पर खुलेआम बिकती थीं।
भर्ती में भ्रष्टाचार पर शून्य-सहनशीलता की नीति; दोषी को जेल तक की चेतावनी — मुख्यमंत्री के निर्देश के हवाले से।
लोधी, पटेल, कुमार, प्रजापति, पासवान, गौतम सहित वंचित समुदायों को भर्ती में समान अवसर देने पर जोर।

उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे ने 22 सितंबर 2026 को लखनऊ में समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव के उस आरोप पर तीखा पलटवार किया, जिसमें यादव ने दावा किया था कि योगी सरकार पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) श्रेणी के अधिकारियों को पदों से हटा रही है। पांडे ने कहा कि मौजूदा सरकार में भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह योग्यता और निष्पक्षता पर आधारित है, जबकि पिछली सरकारों में सरकारी नौकरियाँ कथित तौर पर खुलेआम बिकती थीं।

अखिलेश के आरोप पर मंत्री का पलटवार

मनोज पांडे ने रामचरितमानस की उक्ति का उल्लेख करते हुए कहा कि 'व्यक्ति की जैसी दृष्टि होती है, उसे वैसा ही दिखाई देता है।' उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग आज पीडीए की राजनीति कर रहे हैं, उन्हें अपने शासनकाल में पिछड़े और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर उठे सवालों का जवाब पहले देना चाहिए। पांडे ने लखनऊ के हजरतगंज और लालबाग का हवाला देते हुए दावा किया कि पूर्व सरकारों के दौर में सरकारी नौकरियों के नाम पर खुलेआम लेन-देन की बात सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा थी।

योगी सरकार की भर्ती प्रक्रिया पर दावे

मंत्री ने दावा किया कि योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में 2 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की गई है और इन भर्तियों पर व्यापक स्तर पर सवाल नहीं उठे। उन्होंने कहा कि आज उत्तर प्रदेश में ऐसे युवाओं को भी सरकारी नौकरी मिल रही है जिन्होंने कभी इसकी कल्पना नहीं की थी। पुलिस भर्ती समेत तमाम सरकारी नियुक्तियों में जाति नहीं, बल्कि योग्यता को आधार बनाया जा रहा है।

पांडे ने लोधी, पटेल, कुमार, प्रजापति, पासवान और गौतम सहित विभिन्न पिछड़े और वंचित समुदायों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन वर्गों के युवा अब भर्ती प्रक्रिया में आगे आ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी गाँव या जाति के युवा को भर्ती प्रक्रिया से वंचित नहीं रहना चाहिए।

भ्रष्टाचार पर मुख्यमंत्री की सख्त चेतावनी

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा नियुक्ति पत्र वितरण के दौरान दिए गए निर्देशों का जिक्र करते हुए पांडे ने कहा कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि नियुक्ति के बाद यदि किसी स्तर पर पैसे के लेन-देन की बात सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति को कानून का सामना करना पड़ेगा और जेल जाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार करने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

आम जनता और युवाओं पर असर

मुख्यमंत्री के 9.5 लाख युवाओं को नौकरी देने के दावे का हवाला देते हुए पांडे ने इसे उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी बड़ी पहल बताया। उन्होंने कहा कि सरकारी नौकरी केवल एक व्यक्ति का रोजगार नहीं है, बल्कि उसके पूरे परिवार और भविष्य से जुड़ी होती है — इसलिए भर्ती में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार युवाओं के साथ सीधा अन्याय है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि योगी सरकार में कानून-व्यवस्था के सुधार के चलते महिलाएँ और बेटियाँ रात तक अपने काम से सुरक्षित लौट सकती हैं।

आगे क्या होगा

मनोज पांडे ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय में भी सरकार भर्तियों और रोजगार के क्षेत्र में काम जारी रखेगी और युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव की पृष्ठभूमि में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच पिछड़े और वंचित वर्गों के प्रतिनिधित्व को लेकर सियासी तकरार तेज हो रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन UPPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक के कुछ मामले सार्वजनिक रिकॉर्ड में दर्ज हैं। '9.5 लाख नियुक्ति पत्र' के आँकड़े की स्वतंत्र सत्यापन अभी बाकी है। असली मुद्दा यह है कि दोनों पक्ष पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व को चुनावी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, जबकि ज़मीनी स्तर पर भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को मापने का कोई स्वतंत्र तंत्र सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मनोज पांडे ने अखिलेश यादव के पीडीए आरोप पर क्या जवाब दिया?
कैबिनेट मंत्री मनोज पांडे ने कहा कि समाजवादी पार्टी की सरकारों में कथित तौर पर नौकरियाँ जाति और प्रभाव के आधार पर मिलती थीं, जबकि योगी सरकार में भर्ती योग्यता पर आधारित है। उन्होंने रामचरितमानस की उक्ति का हवाला देते हुए कहा कि जिसकी जैसी दृष्टि हो, उसे वैसा ही दिखता है।
योगी सरकार में कितनी पुलिस भर्तियाँ हुई हैं?
मनोज पांडे ने दावा किया है कि योगी सरकार के कार्यकाल में 2 लाख से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती हुई है। उनके अनुसार, इन भर्तियों पर व्यापक स्तर पर सवाल नहीं उठाए गए और विभिन्न सामाजिक वर्गों के युवाओं को इसमें अवसर मिला।
योगी आदित्यनाथ ने नियुक्तियों में भ्रष्टाचार पर क्या निर्देश दिए हैं?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि नियुक्ति के बाद यदि किसी स्तर पर पैसे के लेन-देन की बात सामने आती है तो संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई होगी और उसे जेल जाना पड़ सकता है। भर्ती प्रक्रिया में भ्रष्टाचार को लेकर शून्य-सहनशीलता की नीति की बात मंत्री ने दोहराई।
पीडीए क्या है और इसे लेकर राजनीतिक विवाद क्यों है?
पीडीए का अर्थ है पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — यह समाजवादी पार्टी का एक राजनीतिक गठबंधन सूत्र है। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि योगी सरकार इस श्रेणी के अधिकारियों को पदों से हटा रही है, जिस पर मनोज पांडे ने पलटवार करते हुए कहा कि सपा सरकार के दौर में इन्हीं वर्गों के साथ भेदभाव होता था।
उत्तर प्रदेश में 9.5 लाख नौकरियों का दावा क्या है?
मनोज पांडे ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस दावे का उल्लेख किया जिसमें प्रदेश के 9.5 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र देने की बात कही गई है। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश के युवाओं के भविष्य से जुड़ी बड़ी पहल बताया, हालाँकि विपक्ष इसे 'जुमलेबाजी' कहता रहा है।
राष्ट्र प्रेस
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