वोटर आईडी-आधार विवाद: मेघवाल बोले — राहुल गांधी को हर सकारात्मक पहल में आलोचना का बहाना मिल जाता है
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय कानून और न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शनिवार, 7 नवंबर 2026 को बीकानेर में मीडिया से बात करते हुए कांग्रेस और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राजनीतिक चरित्र शुरू से ही सकारात्मक पहलों और रचनात्मक कदमों का विरोध करने के इर्द-गिर्द बना रहा है। यह बयान ऐसे समय में आया जब राहुल गांधी ने आधार को मतदाता पहचान पत्र (EPIC) से जोड़ने और कल्याणकारी योजनाओं में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के प्रस्ताव को 'षड्यंत्र' और 'अधिकारों की चोरी' करार दिया था।
मेघवाल का सीधा हमला
मेघवाल ने कहा, 'राहुल गांधी आजकल हर सकारात्मक पहल की आलोचना करते हैं, बिना उसके पीछे के कारणों या उद्देश्य पर विचार किए। तकनीकी विकास एक निरंतर प्रक्रिया है, तो इसमें आलोचना करने लायक क्या है?' उन्होंने आगे कहा कि सरकार का काम चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, विपक्षी नेता को हमेशा कुछ न कुछ आलोचना करने को मिल ही जाता है। मेघवाल ने यह भी उल्लेख किया कि राहुल गांधी ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की भी आलोचना की थी।
राहुल गांधी का आरोप और विवाद की पृष्ठभूमि
राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के उस प्रस्ताव को 'षड्यंत्र' बताया था जिसमें आधार को मतदाता पहचान पत्रों (EPIC) से बदलने और लाभार्थी योजनाओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अनिवार्य करने की बात कही गई थी। उन्होंने इसे 'अधिकारों की चोरी' का प्रयास बताया और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता पर सवाल उठाए। गौरतलब है कि वोटर आईडी और आधार को जोड़ने का मुद्दा चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं से जुड़ा है और विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर सीधे हमले के रूप में देख रहा है।
गहलोत प्रकरण और आकाशवाणी विवाद
राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की टिप्पणियों पर निशाना साधते हुए मेघवाल ने कहा कि नई दिल्ली स्थित आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) परिसर में उनके आचरण पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग से मिलने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति को प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की सूची के साथ एक ज्ञापन प्रस्तुत करना होता है, जिसके बाद आयोग बैठक का समय तय करता है। उनके अनुसार, गहलोत ने न तो ऐसी सूची प्रस्तुत की और न ही कोई ज्ञापन तैयार किया, बल्कि बैठक आकाशवाणी परिसर में ही करने पर जोर दिया।
'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान
मेघवाल ने बताया कि इन्हीं घटनाक्रमों के मद्देनज़र भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' अभियान शुरू किया है। उन्होंने कहा कि जो दल दूसरों पर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाते हैं, उन्हें देश के राजनीतिक इतिहास में 1975 के आपातकाल का स्मरण करना चाहिए। उनके अनुसार, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल में लागू आपातकाल के दौरान मुख्य न्यायाधीश तक को हस्तक्षेप करना पड़ा था।
राजनीतिक संदर्भ और आगे की राह
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब वोटर आईडी और आधार को जोड़ने का मुद्दा संसदीय बहस का केंद्र बन रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि इस कदम से वंचित वर्गों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं, जबकि BJP इसे तकनीकी दक्षता और लाभार्थी सत्यापन की दिशा में एक सकारात्मक कदम बताती है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसदीय सत्र और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं में और अधिक केंद्रीय भूमिका निभा सकता है।