11 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

सीईसी पर आरोप राजनीति से प्रेरित: मेघवाल बोले — संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राहुल गांधी की आदत

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
सीईसी पर आरोप राजनीति से प्रेरित: मेघवाल बोले — संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राहुल गांधी की आदत

सारांश

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने बीकानेर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव करते हुए राहुल गांधी पर निशाना साधा — आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना उनकी आदत है। साथ ही विपक्ष से पूछा: वोटर लिस्ट से मृत मतदाताओं के नाम हटाने पर उनकी आपत्ति क्यों?

मुख्य बातें

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 4 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगे आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया।
मेघवाल के अनुसार, राहुल गांधी की आदत है कि वे अच्छा काम करने वाली संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करते हैं।
चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का काम शुरू किया है।
मेघवाल ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह वोटर लिस्ट शुद्धिकरण के सवालों का जवाब देने से कतराता है।
BJP संगठनात्मक स्तर पर संभाग प्रभारियों की नियुक्ति और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया पर मंथन शुरू हो चुका है।

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 4 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस पर कड़ा पलटवार किया। मेघवाल ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राहुल गांधी की स्थायी आदत बन चुकी है।

मेघवाल का सीधा हमला

केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा, 'सीईसी ने सब कुछ पूरी तरह साफ कर दिया है। यह सब राजनीतिक कारणों से हो रहा है — वे हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा रहे हैं।' उन्होंने जोड़ा कि राहुल गांधी की आदत बन गई है कि वे भारत की उन संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करें जो अच्छा काम कर रही हैं, और इसके अलावा उनके पास न कोई और मकसद है और न ही कोई असली मुद्दा।

वोटर लिस्ट शुद्धिकरण पर विपक्ष को चुनौती

मेघवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का मुद्दा उठाया है, लेकिन विपक्ष इसका कोई ठोस जवाब नहीं दे रहा। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या जो वोटर अब जीवित नहीं हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में बने रहना चाहिए? क्या जो लोग कहीं और चले गए हैं, उनके नाम भी बने रहें?' उनके अनुसार विपक्ष इन दोनों सवालों का जवाब देने से बचता है।

मेघवाल ने विपक्ष की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'आरोप लगाना, झूठ बोलना और भाग जाना — यही उनकी फितरत बन गई है।' गौरतलब है कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और चुनाव में धांधली के आरोप लगाता रहा है।

पृष्ठभूमि: सीईसी विवाद क्या है

हाल के हफ्तों में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की सफाई का बचाव किया है और इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।

संगठनात्मक तैयारी पर भी की चर्चा

मेघवाल ने संगठनात्मक विषयों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि संभाग के प्रभारी नियुक्त हो चुके हैं, जो पहले संगठन की बैठक लेंगे और धरातल पर मजबूत उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तय करेंगे। उन्होंने कहा, 'संभाग के प्रभारियों और समितियों के प्रभारियों से नाम आएंगे, जिसके बाद बैठकर मंथन होगा।'

आगे क्या

चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले समय में और तीखा हो सकता है, खासतौर पर जब SIR प्रक्रिया की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों के लिए यह विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाला अहम मुद्दा बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर मतदाता-सूची संशोधन पर पारदर्शिता की माँग को 'झूठ बोलना' कहना बहस को संकीर्ण करता है। मुख्यधारा की कवरेज जो चूक जाती है वह यह है कि विपक्ष के सवाल भले ही राजनीतिक हों, लेकिन वोटर लिस्ट की विश्वसनीयता का मुद्दा लोकतांत्रिक प्रक्रिया के लिए वास्तविक सार्वजनिक हित का है।
RashtraPress
11 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अर्जुन राम मेघवाल ने सीईसी विवाद पर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 4 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में कहा कि सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह राजनीतिक कारणों से हैं और चुनाव आयुक्त ने सब कुछ साफ कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी पर संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने का आरोप लगाया।
वोटर लिस्ट से नाम हटाने पर विवाद क्यों है?
चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का काम शुरू किया है। विपक्षी दल इस प्रक्रिया पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं, जबकि सरकार इसे नियमित प्रशासनिक कदम बता रही है।
राहुल गांधी पर मेघवाल ने कौन-से आरोप लगाए?
मेघवाल ने कहा कि राहुल गांधी की आदत बन गई है कि वे अच्छा काम करने वाली संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करें और उनके पास इसके अलावा कोई असली मुद्दा नहीं है। उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली को 'आरोप लगाना, झूठ बोलना और भाग जाना' बताया।
SIR प्रक्रिया क्या है?
SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण वह प्रक्रिया है जिसके तहत चुनाव आयोग मतदाता सूचियों की समीक्षा करता है और मृत, स्थानांतरित या डुप्लिकेट मतदाताओं के नाम हटाता है। चुनाव आयोग के अनुसार यह एक नियमित और जरूरी प्रशासनिक प्रक्रिया है।
BJP के संगठनात्मक मोर्चे पर क्या तैयारी चल रही है?
मेघवाल ने बताया कि संभाग स्तर पर प्रभारियों की नियुक्ति हो चुकी है जो संगठन की बैठकें लेंगे और धरातल पर मजबूत उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तैयार करेंगे। समितियों के प्रभारियों से नाम आने के बाद मंथन किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 11 घंटे पहले
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 7 महीने पहले
  6. 10 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले