सीईसी पर आरोप राजनीति से प्रेरित: मेघवाल बोले — संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राहुल गांधी की आदत
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 4 अक्टूबर 2026 को बीकानेर में पत्रकारों से बात करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर लगाए जा रहे आरोपों को पूरी तरह राजनीति से प्रेरित बताया और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा कांग्रेस पर कड़ा पलटवार किया। मेघवाल ने आरोप लगाया कि संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करना राहुल गांधी की स्थायी आदत बन चुकी है।
मेघवाल का सीधा हमला
केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने कहा, 'सीईसी ने सब कुछ पूरी तरह साफ कर दिया है। यह सब राजनीतिक कारणों से हो रहा है — वे हमारे मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लगा रहे हैं।' उन्होंने जोड़ा कि राहुल गांधी की आदत बन गई है कि वे भारत की उन संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करें जो अच्छा काम कर रही हैं, और इसके अलावा उनके पास न कोई और मकसद है और न ही कोई असली मुद्दा।
वोटर लिस्ट शुद्धिकरण पर विपक्ष को चुनौती
मेघवाल ने कहा कि चुनाव आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मृत और स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाने का मुद्दा उठाया है, लेकिन विपक्ष इसका कोई ठोस जवाब नहीं दे रहा। उन्होंने सवाल उठाया, 'क्या जो वोटर अब जीवित नहीं हैं, उन्हें वोटर लिस्ट में बने रहना चाहिए? क्या जो लोग कहीं और चले गए हैं, उनके नाम भी बने रहें?' उनके अनुसार विपक्ष इन दोनों सवालों का जवाब देने से बचता है।
मेघवाल ने विपक्ष की कार्यशैली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा, 'आरोप लगाना, झूठ बोलना और भाग जाना — यही उनकी फितरत बन गई है।' गौरतलब है कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर वोटर लिस्ट में गड़बड़ी और चुनाव में धांधली के आरोप लगाता रहा है।
पृष्ठभूमि: सीईसी विवाद क्या है
हाल के हफ्तों में कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने सीईसी ज्ञानेश कुमार पर मतदाता सूची प्रबंधन को लेकर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया के तहत मतदाता सूचियों की सफाई का बचाव किया है और इसे नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में चुनावी तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं और मतदाता सूचियों की विश्वसनीयता एक संवेदनशील राजनीतिक मुद्दा बन चुकी है।
संगठनात्मक तैयारी पर भी की चर्चा
मेघवाल ने संगठनात्मक विषयों पर भी बात की। उन्होंने बताया कि संभाग के प्रभारी नियुक्त हो चुके हैं, जो पहले संगठन की बैठक लेंगे और धरातल पर मजबूत उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया तय करेंगे। उन्होंने कहा, 'संभाग के प्रभारियों और समितियों के प्रभारियों से नाम आएंगे, जिसके बाद बैठकर मंथन होगा।'
आगे क्या
चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले समय में और तीखा हो सकता है, खासतौर पर जब SIR प्रक्रिया की अंतिम रिपोर्ट सार्वजनिक होगी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस दोनों के लिए यह विवाद चुनावी माहौल को प्रभावित करने वाला अहम मुद्दा बन सकता है।