सीजेपी आंदोलन पर रामदास आठवले का हमला: 'यह बाबा साहब के संविधान के खिलाफ, पुलिस कार्रवाई सही'
सारांश
मुख्य बातें
केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी (CJP) के प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग को लेकर कड़ी आलोचना की। उन्होंने इस आंदोलन को बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के संविधान के विरुद्ध बताते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अभिजीत दिपके पर सीधा निशाना साधा।
आठवले के मुख्य आरोप
आठवले ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की माँग करने का इनको अधिकार नहीं है।' उनका तर्क था कि मुख्य चुनाव आयुक्त संविधान के प्रावधानों के अनुसार नियुक्त होते हैं और सरकार से स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव सूची को सही बनाना, अवैध नामों को हटाना और प्रत्येक नागरिक को मतदान का अधिकार सुनिश्चित करना चुनाव आयोग का संवैधानिक दायित्व है।
राहुल गांधी के '13 करोड़ वोट' के दावे पर पलटवार
राहुल गांधी के इस दावे पर कि 13 करोड़ लोगों के वोट काटे गए, आठवले ने विस्तृत खंडन प्रस्तुत किया। उनके अनुसार, इन 13 करोड़ में से 6 करोड़ ऐसे लोग हैं जो एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित हो चुके हैं और जहाँ वे अब रहते हैं, वहाँ उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज है। उन्होंने आगे कहा कि 3 करोड़ लोग ऐसे हैं जिन्होंने कभी मतदान ही नहीं किया, इसलिए उनके नाम सूची से हटाए गए। 2 करोड़ लोगों की मृत्यु हो चुकी थी और 1 करोड़ ऐसे लोग थे जिनका नाम गाँव और शहर — दोनों जगह दर्ज था।
आठवले ने कहा कि इन तथ्यों के आलोक में राहुल गांधी का आरोप निराधार है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि राष्ट्रपति ने स्वयं वोट चोरी के साक्ष्य माँगे थे, जो अब तक प्रस्तुत नहीं किए गए।
आंदोलन पर सरकार की प्रतिक्रिया
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सीजेपी का यह प्रदर्शन 'फेल हो चुका है' क्योंकि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को कई स्थानों पर रोक लिया। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई को उचित ठहराते हुए कहा कि आम नागरिकों को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की निष्पक्षता को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
आठवले ने यह भी कहा कि जब कांग्रेस पार्टी की सरकार थी, तब विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिया जाता था और 10-15 दिनों तक जेल में रखा जाता था। उनका इशारा था कि विरोध प्रदर्शन पर कार्रवाई कोई नई बात नहीं है।
सीजेपी की भूमिका पर सवाल
आठवले ने सीजेपी की स्थापना और उसकी मौजूदा गतिविधियों पर भी सवाल उठाए। उनके अनुसार, यह संगठन कथित तौर पर नीट परीक्षा पेपर लीक मामले के संदर्भ में अस्तित्व में आया था, लेकिन अब हर मुद्दे पर इस्तीफे की माँग करने लगा है। उन्होंने अभिजीत दिपके द्वारा प्रधानमंत्री के बारे में की गई टिप्पणियों को भी 'अनुचित' बताया।
आगे की राह
आठवले ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार का एजेंडा विकास पर केंद्रित है और देश में स्थिरता बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने विपक्ष को चेताया कि गलत मुद्दों पर आंदोलन करना और अराजकता को बढ़ावा देना लोकतंत्र के हित में नहीं है। यह देखना अहम होगा कि विपक्ष इन आरोपों का जवाब कैसे देता है और चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर बहस आगे क्या रुख लेती है।