2 नवंबर 2026
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रामदास आठवले का राहुल गांधी पर करारा पलटवार: 'मोदी हटाने हैं तो 2029 का चुनाव लड़ो, आंदोलन नहीं'

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रामदास आठवले का राहुल गांधी पर करारा पलटवार: 'मोदी हटाने हैं तो 2029 का चुनाव लड़ो, आंदोलन नहीं'

सारांश

रामदास आठवले ने इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान रैली के बाद राहुल गांधी को सीधी चुनौती दी — संवैधानिक अधिकारी आंदोलन से नहीं हटते, उसके लिए 2029 का चुनाव है। साथ ही SIR में 13 करोड़ नामों की समीक्षा का पूरा ब्यौरा देकर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिया।

मुख्य बातें

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 2 नवंबर 2026 को राहुल गांधी की सीईसी ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग को सिरे से खारिज किया।
आठवले ने कहा कि भारत आंबेडकर के संविधान से चलता है, आंदोलन से संवैधानिक पदाधिकारी नहीं हटाए जा सकते।
SIR प्रक्रिया में 13 करोड़ नामों की समीक्षा हुई — 6.2 करोड़ स्थानांतरित, 2.8 करोड़ मृत और शेष डुप्लीकेट या पता न अपडेट करने वाले मतदाताओं के नाम हटाए गए।
आठवले ने दावा किया कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और 80 करोड़ लोगों को निःशुल्क अनाज मिल रहा है।
विपक्ष को 2029 के लोकसभा चुनाव में मुकाबले की चुनौती दी गई।

केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने 2 नवंबर 2026 को इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान रैली और कांग्रेस नेता राहुल गांधी की मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग पर कड़ा पलटवार किया। आठवले ने स्पष्ट कहा कि भारत डॉ. बी. आर. आंबेडकर के संविधान से चलता है और यहाँ आंदोलन के ज़रिए किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी को नहीं हटाया जा सकता।

मतदाता सूची समीक्षा पर सरकार का पक्ष

आठवले ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया का ब्यौरा देते हुए बताया कि 13 करोड़ नामों की समीक्षा की गई। उनके अनुसार इनमें से 6.2 करोड़ मतदाता वे थे जो स्थानांतरित हो चुके थे और उनके नाम नई जगह पहले से दर्ज थे, इसलिए पुरानी प्रविष्टि हटाई गई। 2.8 करोड़ मतदाताओं का निधन हो चुका था, जिससे उनके नाम सूची से हटाए गए। इसके अलावा 3 करोड़ मतदाताओं ने अपना पता अपडेट नहीं किया था, और लगभग 1 करोड़ ऐसे मतदाता थे जो एक ज़िले से दूसरे ज़िले या गाँव से मुंबई जैसे बड़े शहरों में आ बसे थे।

आठवले ने कहा कि जब किसी व्यक्ति का नाम दो जगह दर्ज हो, तो नियम के अनुसार केवल एक ही स्थान पर नाम रहना चाहिए। उन्होंने इस पूरी कवायद को बोगस वोटिंग रोकने और चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की दिशा में उठाया गया ज़रूरी कदम बताया।

राहुल गांधी की माँग पर सीधा जवाब

आठवले ने राहुल गांधी को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'राहुल गांधी बोल रहे हैं कि वो ज्ञानेश कुमार को हटाएंगे। वो कैसे हटा सकते हैं।' उन्होंने इस सोच की तुलना बांग्लादेश की राजनीतिक अस्थिरता से करते हुए कहा कि भारत में ऐसी स्थिति कभी नहीं बन सकती, क्योंकि यहाँ संवैधानिक संस्थाएँ लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुसार काम करती हैं।

उन्होंने विपक्ष को स्पष्ट चुनौती दी कि अगर किसी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सत्ता से हटाना है, तो इसका एकमात्र रास्ता 2029 का लोकसभा चुनाव है, न कि सड़क आंदोलन।

मोदी सरकार की उपलब्धियाँ गिनाईं

आठवले ने कहा कि इंडिया गठबंधन इसलिए परेशान है क्योंकि मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। उन्होंने सरकार की उपलब्धियों में 80 करोड़ लोगों को सात-आठ वर्षों से निःशुल्क अनाज, 60 करोड़ लोगों के बैंक खाते खुलवाना, करोड़ों लोगों को आवास, हवाई अड्डों का विकास और बेहतर सड़क अवसंरचना को गिनाया।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की नीति हिंदू, मुस्लिम या किसी भी जाति-धर्म के व्यक्ति के साथ न्याय करने की है।

विपक्षी नेताओं पर निशाना

आठवले ने कहा कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और अखिलेश यादव समेत तमाम विपक्षी नेता मोदी सरकार की उपलब्धियों से परेशान दिखाई देते हैं। उन्होंने कहा कि 2029 के चुनाव में एनडीए भी तैयार है और विपक्ष को भी तैयार रहना चाहिए — जिसे जनता बहुमत देगी, सरकार वही बनाएगा।

आगे क्या

मतदाता सूची पुनरीक्षण और सीईसी की नियुक्ति-प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद गहराता दिख रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब बिहार और कुछ अन्य राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। आलोचकों का कहना है कि मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की स्वतंत्र जाँच होनी चाहिए, जबकि सरकार इसे पारदर्शिता का कदम बता रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि सत्तापक्ष की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है जो चुनाव आयोग पर उठे सवालों को 'असंवैधानिक माँग' के रूप में फ्रेम कर विपक्ष को रक्षात्मक स्थिति में ले जाना चाहती है। हालाँकि, SIR में एक साथ 13 करोड़ नाम हटाए जाने की प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा का सवाल अनुत्तरित रहता है — सरकारी आँकड़े देने मात्र से वह पारदर्शिता नहीं आती जो लोकतांत्रिक विश्वसनीयता के लिए चाहिए। 2029 का चुनावी आह्वान भले ही संवैधानिक रूप से सही हो, लेकिन जब तक मतदाता सूची की निष्पक्षता सुनिश्चित नहीं होती, तब तक यह तर्क खोखला लग सकता है।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रामदास आठवले ने राहुल गांधी को क्या जवाब दिया?
आठवले ने कहा कि राहुल गांधी आंदोलन करके सीईसी ज्ञानेश कुमार को नहीं हटा सकते क्योंकि भारत आंबेडकर के संविधान से चलता है। उन्होंने विपक्ष को 2029 के लोकसभा चुनाव में सीधे मुकाबले की चुनौती दी।
SIR प्रक्रिया में मतदाता सूची से कितने नाम हटाए गए और क्यों?
आठवले के अनुसार 13 करोड़ नामों की समीक्षा में 6.2 करोड़ स्थानांतरित, 2.8 करोड़ मृत और 3 करोड़ पता न अपडेट करने वाले मतदाताओं के नाम हटाए गए। लगभग 1 करोड़ ऐसे मतदाता थे जो एक ज़िले से दूसरे ज़िले में जा चुके थे।
इंडिया ब्लॉक की रामलीला मैदान रैली किस माँग पर आयोजित हुई?
इंडिया ब्लॉक ने रामलीला मैदान में रैली आयोजित कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतदाता सूची पुनरीक्षण की समीक्षा की माँग उठाई। राहुल गांधी ने रैली में मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाए।
आठवले ने मोदी सरकार की कौन-सी उपलब्धियाँ गिनाईं?
आठवले ने कहा कि भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इसके अलावा 80 करोड़ लोगों को सात-आठ वर्षों से निःशुल्क अनाज, 60 करोड़ लोगों के बैंक खाते, करोड़ों को आवास और बेहतर सड़क-हवाई अड्डा अवसंरचना को सरकार की उपलब्धियों में गिनाया।
क्या आंदोलन से मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया जा सकता है?
संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया संसदीय महाभियोग जैसी है, न कि किसी बाहरी दबाव से। आठवले ने इसी आधार पर राहुल गांधी की माँग को असंवैधानिक करार दिया।
राष्ट्र प्रेस
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