सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का भाजपा पर हमला: 'मुख्य चुनाव आयुक्त हटाओ, 2027 में सपा सरकार बनेगी'
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 1 नवंबर 2026 को केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि देशभर में भाजपा सरकार के विरुद्ध जनाक्रोश चरम पर है और नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित 'इंडिया' ब्लॉक की रैली को उन्होंने विपक्षी एकता का ऐतिहासिक प्रदर्शन बताया।
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की माँग
मेहरोत्रा ने कहा, "पूरा देश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की माँग कर रहा है, और पूरी भाजपा सरकार सिर्फ एक व्यक्ति को बचाने में लग गई है।" उन्होंने आरोप लगाया कि एक व्यक्ति की सुरक्षा के लिए पुलिस, सेना और अर्धसैनिक बलों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो उनके अनुसार देश के लिए गंभीर खतरे का संकेत है।
रामलीला मैदान की इस रैली में 'इंडिया' ब्लॉक के कई दलों ने हिस्सा लिया। सपा विधायक के अनुसार रैली में तीन प्रमुख माँगें रखी गईं — मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाना, एसआईआर (SIR) को रद्द करना और मतदाता सूची को दुरुस्त करना।
रैली को बताया ऐतिहासिक, राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा
मेहरोत्रा ने कहा, "'इंडिया' ब्लॉक की यह रैली बेहद बड़ी और ऐतिहासिक रही। सभी दलों ने एकस्वर से कहा कि संविधान और लोकतंत्र खतरे में हैं।" उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब एक राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा।
गौरतलब है कि यह रैली ऐसे समय आयोजित हुई जब विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर सातत्यपूर्ण दबाव बना रहे हैं।
भाजपा पर 'तानाशाही' का आरोप
सपा विधायक ने गृह मंत्री के हालिया बयानों को निशाने पर लेते हुए कहा कि "भाजपा सरकार के लोगों, खासकर गृह मंत्री के बयान पूरी तरह से तानाशाही से भरे हैं।" उन्होंने कहा कि सरकार कौन बनाएगा, यह जनता तय करती है, कोई एक दल नहीं।
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियाँ जोर पकड़ रही हैं। मेहरोत्रा ने दावा किया कि 2027 में उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की और 2029 में केंद्र में 'इंडिया' ब्लॉक की सरकार बनेगी।
नेपाल बांग्लादेश से तुलना पर विवाद
मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि "देश में वैसी ही स्थिति बन रही है, जैसी कुछ दिन पहले नेपाल और बांग्लादेश में देखी गई थी, और युवाओं को सड़कों पर संघर्ष करने के लिए मजबूर किया जा रहा है।" यह बयान राजनीतिक रूप से विवादास्पद है क्योंकि दोनों पड़ोसी देशों में हाल के वर्षों में सत्ता परिवर्तन की बड़ी घटनाएँ घटी थीं।
आगे की दिशा
विपक्षी खेमे के इस आक्रामक सुर के साथ 'इंडिया' ब्लॉक के राष्ट्रव्यापी आंदोलन की रणनीति अगले कुछ हफ्तों में और स्पष्ट होने की उम्मीद है। सपा की यह राजनीतिक सक्रियता उत्तर प्रदेश के चुनावी समीकरणों को कितना प्रभावित करती है, यह देखना अहम होगा।