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राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे, रैली फ्लॉप: BJP का पलटवार

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राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहे, रैली फ्लॉप: BJP का पलटवार

सारांश

दिल्ली में विपक्ष की रैली के जवाब में BJP ने दोहरे मोर्चे पर हमला बोला — राहुल गांधी को संवैधानिक संस्थाओं के 'दुश्मन' और रैली को 'फ्लॉप शो' बताया। SIR विवाद और ईवीएम आरोपों पर BJP की यह प्रतिक्रिया बताती है कि लोकतंत्र की बहस अब और तीखी होगी।

मुख्य बातें

BJP बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं को 'धमकाने का नाटक' कर रहे हैं और उन्हें जनता का समर्थन नहीं है।
BJP ने रामलीला मैदान की विपक्षी रैली को 'फ्लॉप' बताया, दावा किया कि बड़ी संख्या में कुर्सियाँ खाली रहीं।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी को 'असफल और राजनीतिक रूप से बेरोज़गार नेता' करार दिया।
BJP ने विपक्ष पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया — सत्ता में रहने पर ईवीएम ठीक, विपक्ष में जाने पर हैकिंग के आरोप।
अखिलेश यादव को 'राजनीतिक वनवास' में बताते हुए सवाल किया कि वे कांग्रेस का सहारा क्यों ले रहे हैं।
मल्लिकार्जुन खड़गे को गांधी परिवार की 'कठपुतली' बताया गया।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेताओं ने 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली में विपक्ष की रैली को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन पर तीखा हमला बोला। BJP नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है। साथ ही, नेताओं ने दावा किया कि रैली बुरी तरह नाकाम रही और जनता का समर्थन विपक्ष के साथ नहीं है।

BJP बिहार अध्यक्ष का हमला

BJP बिहार के अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि राहुल गांधी संवैधानिक संस्थाओं को धमकाने के लिए 'नया नाटक' कर रहे हैं और उन्हें जनता का समर्थन नहीं मिल रहा। सरावगी ने कहा, 'लोकतंत्र और संविधान की हत्या कांग्रेस की सरकारें करती रही हैं। जब देश में कांग्रेस की सरकार थी, तब उन्होंने जिस तरह राज्य सरकारों को गिराया और राष्ट्रपति शासन लगाया, उससे बड़ा संविधान का उल्लंघन और क्या हो सकता है?'

उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता के समर्थन से प्रधानमंत्री हैं, न कि राहुल गांधी की वजह से। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया की शुरुआत बिहार से हुई, लेकिन विपक्ष एक भी गलत मतदाता का उदाहरण सामने नहीं ला सका — यह सरावगी का दावा है।

ईवीएम और मतदाता सूची पर BJP का सवाल

सरावगी ने विपक्ष पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि जब कांग्रेस की सरकार बनती है तो सब कुछ ठीक रहता है, लेकिन जैसे ही विपक्ष में जाते हैं तो ईवीएम हैक और वोट चोरी के आरोप सामने आ जाते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि जिन राज्यों में विपक्ष की सरकारें हैं, वहाँ के लोग SIR की तारीफ कर रहे हैं।

गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष रामलीला मैदान में मतदाता सूची में कथित हेरफेर के खिलाफ रैली आयोजित कर चुका है। BJP ने सवाल उठाया कि रैली में उपस्थित लोगों में से कितनों के नाम वास्तव में मतदाता सूची से काटे गए हैं।

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल के आरोप

BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी को 'असफल और राजनीतिक रूप से बेरोज़गार नेता' बताया। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस की सरकार है, वहाँ के कामकाज पर कोई चर्चा नहीं होती — यही वजह है कि जनता चुनावों में उन्हें नकार देती है।

खंडेलवाल ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर भी तंज कसा और कहा कि वह गांधी परिवार की 'कठपुतली' की तरह काम कर रहे हैं। उन्होंने आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला देते हुए कांग्रेस पर लोकतंत्र की रक्षा का दावा करने का नैतिक अधिकार न होने का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव पर निशाना

खंडेलवाल ने समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर भी हमला बोला और कहा कि वह 'राजनीतिक वनवास' में हैं। उन्होंने सवाल किया कि अगर अखिलेश इतने मजबूत हैं तो कांग्रेस का सहारा लेने की बजाय अकेले चुनाव क्यों नहीं लड़ते।

यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी 'इंडिया' गठबंधन की एकजुटता पहले से सवालों के घेरे में है। BJP की इस प्रतिक्रिया को विपक्ष की रैली के राजनीतिक असर को कुंद करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

आगे का राजनीतिक घटनाक्रम

BJP की इस आक्रामक प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता, मतदाता सूची की विश्वसनीयता और SIR प्रक्रिया पर राजनीतिक बहस और तेज़ होगी। विपक्ष की ओर से प्रतिक्रिया अभी प्रतीक्षित है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है — हर विपक्षी विरोध को 'संस्था-विरोधी' के रूप में फ्रेम करो और रैली की असफलता को केंद्रीय कथा बनाओ। लेकिन SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची की पारदर्शिता पर उठे सवाल सिर्फ विपक्षी राजनीति नहीं हैं — ये लोकतांत्रिक जवाबदेही के मूल प्रश्न हैं जिनका उत्तर सत्ता पक्ष को देना होगा। कांग्रेस के इतिहास पर BJP के हमले वैध हैं, लेकिन वर्तमान शासन की जवाबदेही से ध्यान हटाने का औज़ार नहीं बन सकते। असली परीक्षा यह है कि चुनाव आयोग SIR की प्रक्रिया में निष्पक्षता का सार्वजनिक सत्यापन किस हद तक करता है।
RashtraPress
1 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP ने विपक्ष की दिल्ली रैली पर क्या आरोप लगाए?
BJP ने रैली को 'फ्लॉप' बताया और आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं को कमज़ोर करने और चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। BJP बिहार अध्यक्ष संजय सरावगी ने कहा कि रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में कुर्सियाँ खाली रहीं।
SIR विवाद क्या है और BJP का क्या कहना है?
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मतदाता सूची की समीक्षा प्रक्रिया है जिसकी शुरुआत बिहार से हुई। BJP का कहना है कि विपक्ष एक भी गलत मतदाता का ठोस उदाहरण सामने नहीं ला सका, जबकि विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया में वैध मतदाताओं के नाम काटे गए।
BJP सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने राहुल गांधी के बारे में क्या कहा?
खंडेलवाल ने राहुल गांधी को 'असफल और राजनीतिक रूप से बेरोज़गार नेता' बताया और कहा कि उनके पास सिर्फ विवाद खड़ा करना और सुर्खियों में बने रहना ही काम बचा है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस सरकार है, वहाँ के कामकाज पर राहुल गांधी कोई चर्चा नहीं करते।
BJP ने कांग्रेस पर लोकतंत्र की बात करने का नैतिक अधिकार न होने का आरोप क्यों लगाया?
BJP ने आपातकाल (1975) और 1984 के सिख विरोधी दंगों का हवाला देते हुए कहा कि जो पार्टी इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार रही है, उसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का दावा करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
BJP ने अखिलेश यादव को लेकर क्या कहा?
BJP सांसद खंडेलवाल ने कहा कि अखिलेश यादव 'राजनीतिक वनवास' में हैं और कहीं भी उनकी सरकार नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि अगर वे इतने मज़बूत हैं तो कांग्रेस का सहारा लेने की बजाय अकेले चुनाव क्यों नहीं लड़ते।
राष्ट्र प्रेस
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