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आंध्र प्रदेश नगर निकाय चुनाव: जगन मोहन रेड्डी ने मतदान को बताया 'लोकतंत्र का काला अध्याय'

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आंध्र प्रदेश नगर निकाय चुनाव: जगन मोहन रेड्डी ने मतदान को बताया 'लोकतंत्र का काला अध्याय'

सारांश

जगन मोहन रेड्डी का यह बयान महज राजनीतिक बयानबाज़ी नहीं है — यह YSRCP और TDP के बीच उस गहरे राजनीतिक युद्ध की अगली कड़ी है जो नामांकन चरण से ही शुरू हो चुकी थी। सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँची शिकायतें और अब पुनर्मतदान की माँग आंध्र प्रदेश की स्थानीय शासन प्रणाली की साख पर सवाल खड़े करती हैं।

मुख्य बातें

वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 1 नवंबर 2026 के आंध्र प्रदेश ULB मतदान को 'लोकतंत्र का काला अध्याय' बताया।
पुलिवेंदुला में 80 में से 70 मतदान केंद्रों पर YSRCP एजेंटों को कथित तौर पर प्रवेश नहीं दिया गया।
पार्टी ने कडपा, तिरूपति, विशाखापत्तनम, विजयवाड़ा सहित दर्जनों निर्वाचन क्षेत्रों में अनियमितताओं का आरोप लगाया।
YSRCP राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने पुनर्मतदान, राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा उठाने और अदालती कार्रवाई का ऐलान किया।
पार्टी ने 1,500 से 2,000 लोगों से संबंधित सबूत लेकर सर्वोच्च न्यायालय का रुख पहले ही किया था।
राज्य चुनाव आयोग ने CCTV निगरानी और नामांकन समय सीमा विस्तार के निर्देशों को कथित तौर पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया।

वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने 1 नवंबर 2026 को आंध्र प्रदेश में संपन्न शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनावों को लोकतंत्र के इतिहास का काला अध्याय करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर राज्य भर में बड़े पैमाने पर धांधली, मतदाताओं को डराने और मतदान एजेंटों को बूथों से बाहर निकाले जाने के आरोप लगाए। यह बयान ऐसे समय आया है जब तेलुगु देशम पार्टी (TDP) सरकार पर विपक्ष का दबाव पहले से ही बढ़ा हुआ है।

जगन के आरोप: क्या कहा एक्स पोस्ट में

जगन मोहन रेड्डी ने एक्स पर लिखा, 'दिनदहाड़े धांधली, मतदान एजेंटों को रोका जाना और बाहर निकाला जाना, और मतदाताओं को खुलेआम धमकाया जाना और उनके मतदान के अधिकार का प्रयोग करने से रोका जाना — ये सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ।' उन्होंने भावुक होकर लिखा: 'हे राम! लोकतंत्र बचाओ!' इस पोस्ट के साथ उन्होंने एक वीडियो क्लिप भी साझा की, जिसमें कथित तौर पर TDP कार्यकर्ताओं द्वारा की गई अनियमितताएँ दिखाई गई हैं।

जगन ने विशेष रूप से अपने गृह निर्वाचन क्षेत्र पुलिवेंदुला का ज़िक्र करते हुए कहा कि वहाँ 80 में से 70 मतदान केंद्रों पर YSRCP के एजेंटों को प्रवेश नहीं दिया गया। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में मतदाता की पहचान कौन सुनिश्चित करेगा।

कहाँ-कहाँ हुईं कथित अनियमितताएँ

YSRCP प्रमुख ने पुलिवेंदुला के अलावा कडपा, अनंतपुर, तिरूपति, कुरनूल, चित्तूर, ओंगोल, गुंटूर, नेल्लोर, विशाखापत्तनम (GVMC), विजयवाड़ा, माचेरला, चिलकलुरिपेट, विनुकोंडा, जम्मलमाडुगु, नंद्याल, चीमाकुर्थी, येम्मिगनूर, सुल्लुरपेटा, पलासा, नायडूपेटा, नंदीगामा, जग्गय्यापेटा, कुप्पम, पुत्तूर, भीमुनिपट्टनम और पार्वतीपुरम सहित दर्जनों निर्वाचन क्षेत्रों में इसी तरह की घटनाओं का उल्लेख किया।

जगन ने कहा कि मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू के कार्यकाल में आंध्र प्रदेश की चुनावी व्यवस्था 'भयावह रूप से ध्वस्त' हो रही है और लोकतांत्रिक संस्थाओं का पूरी तरह अपहरण हो चुका है। उनके शब्दों में: 'यह अब चुनाव नहीं रहा; यह तो बस आपका चयन है।'

पार्टी नेताओं की प्रतिक्रिया और आगामी कदम

YSRCP के राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी ने पार्टी के केंद्रीय कार्यालय में कहा कि नगर निकाय चुनाव प्रक्रिया महज़ एक मजाक बनकर रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि चंद्रबाबू नायडू ने कृत्रिम जीत हासिल करने के लिए बड़े पैमाने पर चुनावी हेरफेर का सहारा लिया।

सज्जाला ने स्पष्ट किया कि पार्टी तीन मोर्चों पर लड़ाई लड़ेगी — पुनर्मतदान की मांग, अनियमितताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और अदालतों का रुख करना।

नामांकन से मतदान तक: आरोपों की पूरी कड़ी

YSRCP के अनुसार अनियमितताएँ मतदान के दिन तक सीमित नहीं थीं, बल्कि नामांकन प्रक्रिया के दौरान ही शुरू हो गई थीं। पार्टी ने आरोप लगाया कि उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया, नामांकन पत्र फाड़े गए, अंतिम सूचियों से नाम गायब किए गए, उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया और नेताओं पर मुकदमे चलाए गए।

सज्जाला ने बताया कि पार्टी लगभग 1,500 से 2,000 लोगों से संबंधित सबूत लेकर सर्वोच्च न्यायालय में गई थी, लेकिन CCTV निगरानी और नामांकन की समय सीमा बढ़ाने के निर्देशों को भी राज्य चुनाव आयोग ने प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब आंध्र प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हों — राज्य की चुनावी राजनीति में TDP और YSRCP के बीच टकराव की यह एक पुरानी कड़ी है।

क्या होगा आगे

YSRCP ने संकेत दिए हैं कि वह अपने कानूनी और राजनीतिक विकल्पों का पूरा इस्तेमाल करेगी। पार्टी नेताओं ने विशेष रूप से उन महिला कार्यकर्ताओं की सराहना की जिन्होंने कथित दबाव के बावजूद डटे रहने का प्रयास किया। चुनाव परिणामों और किसी भी पुनर्मतदान की माँग पर अदालती सुनवाई अगले कुछ दिनों में निर्णायक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि YSRCP जब सत्ता में थी तब भी TDP ने इसी तरह के चुनावी धांधली के आरोप लगाए थे — दोनों पार्टियों के बीच यह आरोप-प्रत्यारोप का एक चिरपरिचित चक्र है। असली सवाल यह है कि जब सर्वोच्च न्यायालय से निर्देश मिलने के बावजूद राज्य चुनाव आयोग उन्हें लागू करने में विफल रहा, तो संस्थागत जवाबदेही का तंत्र कहाँ है। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि स्थानीय निकाय चुनावों में धाँधली के आरोप देश के कई राज्यों में सत्ता परिवर्तन के बाद एक पैटर्न बन चुके हैं — असली परीक्षा अदालती और चुनाव आयोग की कार्रवाई में होगी, न कि सोशल मीडिया पोस्ट में।
RashtraPress
2 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जगन मोहन रेड्डी ने आंध्र प्रदेश ULB चुनाव को 'काला अध्याय' क्यों कहा?
जगन मोहन रेड्डी ने 1 नवंबर 2026 को हुए शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में बड़े पैमाने पर धांधली, मतदाताओं को डराने और YSRCP एजेंटों को बूथों से बाहर रखने के आरोपों के चलते इसे लोकतंत्र का काला अध्याय बताया। उन्होंने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए कहा कि यह सब पुलिस की मौजूदगी में हुआ।
पुलिवेंदुला में क्या हुआ?
YSRCP के अनुसार जगन मोहन रेड्डी के गृह निर्वाचन क्षेत्र पुलिवेंदुला में 80 में से 70 मतदान केंद्रों पर पार्टी के एजेंटों को प्रवेश नहीं दिया गया। पार्टी का कहना है कि इससे मतदाता पहचान की निष्पक्ष निगरानी संभव नहीं हो पाई।
YSRCP अब क्या कदम उठाएगी?
YSRCP राज्य समन्वयक सज्जाला रामकृष्ण रेड्डी के अनुसार पार्टी तीन मोर्चों पर लड़ेगी — पुनर्मतदान की माँग, अनियमितताओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना और अदालत में कानूनी लड़ाई। पार्टी पहले ही 1,500 से 2,000 लोगों से संबंधित सबूतों के साथ सर्वोच्च न्यायालय जा चुकी है।
क्या राज्य चुनाव आयोग ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का पालन किया?
YSRCP का आरोप है कि राज्य चुनाव आयोग ने CCTV निगरानी और नामांकन समय सीमा विस्तार से संबंधित सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं किया। यह आरोप चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
इस चुनावी विवाद का TDP सरकार पर क्या असर पड़ेगा?
YSRCP के आरोप और संभावित अदालती कार्रवाई मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की TDP सरकार के लिए राजनीतिक दबाव बढ़ा सकती है। हालाँकि TDP की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है; अदालती सुनवाई और चुनाव आयोग का अगला कदम स्थिति की दिशा तय करेगा।
राष्ट्र प्रेस
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