असम राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 7 राज्यों के स्थापना दिवस पर सहकारी संघवाद का आह्वान किया
सारांश
मुख्य बातें
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 1 नवंबर 2026 को गुवाहाटी में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच गहरे सहयोग का आग्रह किया। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की सांस्कृतिक विविधता और नागरिकों का सामूहिक संकल्प ही 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की असली नींव है। यह कार्यक्रम आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, चंडीगढ़ और पुडुचेरी के स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।
समारोह का आयोजन और पृष्ठभूमि
यह कार्यक्रम गुवाहाटी के श्रीमंत शंकरदेव अंतर्राष्ट्रीय सभागार में लोक भवन असम द्वारा आयोजित किया गया। गौरतलब है कि प्रत्येक वर्ष 1 नवंबर को कई राज्यों का स्थापना दिवस एक साथ मनाया जाता है, जो भाषाई पुनर्गठन की ऐतिहासिक विरासत को याद दिलाता है। इस बार असम में आयोजित इस समारोह ने पूर्वोत्तर और शेष भारत के बीच सांस्कृतिक सेतु की भूमिका निभाई।
राज्यपाल के मुख्य विचार
राज्यपाल आचार्य ने कहा कि प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और परंपराएँ हैं, किंतु सभी एकसमान राष्ट्रीय भावना से एकजुट हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 'भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है' और प्रत्येक राज्य देश के समग्र विकास में बराबरी का योगदान करता है।
उन्होंने कृषि, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, कला, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में राज्यों की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि राज्यों के बीच सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान, पारस्परिक सहयोग और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा सहकारी संघवाद को और मज़बूत करेगी।
विकसित भारत 2047 और समावेशी विकास
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'विकसित भारत 2047' के विज़न का संदर्भ देते हुए राज्यपाल आचार्य ने कहा कि इस राष्ट्रीय लक्ष्य को पाने के लिए हर राज्य और हर नागरिक की समन्वित प्रतिबद्धता अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास तभी सार्थक है जब उसका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, कृषि, नवाचार, कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण में निरंतर निवेश और प्रयासों की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। यह वक्तव्य ऐसे समय में आया है जब केंद्र सरकार राज्यों के साथ मिलकर 'विकसित भारत' के एजेंडे को ज़मीनी स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है।
एक भारत, श्रेष्ठ भारत की भावना
राज्यपाल ने राष्ट्र निर्माण को एक साझा ज़िम्मेदारी बताते हुए नागरिकों से आग्रह किया कि वे अपनी सांस्कृतिक पहचान पर गर्व करते हुए विकास पहलों में सक्रिय योगदान दें। उन्होंने कहा कि अन्य समुदायों की परंपराओं और उपलब्धियों का सम्मान करने से 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' की भावना और सुदृढ़ होगी।
समारोह में सातों भाग लेने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए गए, जिनमें लोक परंपराओं, कला रूपों और विशिष्ट सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों की झलक दिखाई गई। आने वाले समय में इस तरह के अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक मंचों की भूमिका और बढ़ने की उम्मीद है।