गुजरात-महाराष्ट्र स्थापना दिवस: राज्यपाल मंगुभाई पटेल बोले — 'विकास की अद्भुत यात्राओं का अभिनंदन पर्व है यह दिन'
सारांश
Key Takeaways
मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने 1 मई 2026 को भोपाल के लोकभवन स्थित सांदीपनि सभागार में आयोजित गुजरात एवं महाराष्ट्र राज्य स्थापना दिवस के संयुक्त समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि 1 मई देश के दो अत्यंत समृद्ध और सशक्त राज्यों के प्रशासनिक गठन के स्मरण का दिवस है और यह उनकी विकास की अद्भुत यात्राओं का अभिनंदन पर्व है। इस समारोह में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का आयोजन 'एक भारत–श्रेष्ठ भारत' संकल्पना के तहत किया गया था।
विविधता में एकता ही भारत की शक्ति
राज्यपाल पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की भौगोलिक और सांस्कृतिक विविधताएं हमारी सबसे बड़ी शक्ति हैं, और इन विविधताओं के बीच की एकता ही सशक्त, समृद्ध एवं आत्मनिर्भर भारत की नींव है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की औद्योगिक क्षमता और वित्तीय नेतृत्व के साथ गुजरात की उद्यमशीलता, व्यापारिक दक्षता, समुद्री विकास और नवकरणीय ऊर्जा मिलकर विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बनाते हैं। उन्होंने नागरिकों, विशेषकर युवाओं से आह्वान किया कि वे इस विविधता की अतुलनीय ताकत को पहचानें और एकजुट होकर विकसित भारत के निर्माण में सहभागी बनें।
गुजरात की सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान
राज्यपाल पटेल ने गुजरात की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका नगरी और विश्व प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर जैसे पवित्र तीर्थ स्थल गुजरात की आध्यात्मिक पहचान हैं। उन्होंने कहा कि कच्छ का रण, गिर के वन, साबरमती का तट और स्टैच्यू ऑफ यूनिटी राज्य की विविधता को अद्वितीय छटा प्रदान करते हैं। महात्मा गांधी और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महापुरुषों ने गुजरात की धरती से दुनिया में भारत की विशिष्ट पहचान बनाई। आर्थिक दृष्टि से गुजरात आज 'मेक इन इंडिया' और 'स्टार्टअप इंडिया' अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
महाराष्ट्र की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक धरोहर
राज्यपाल पटेल ने महाराष्ट्र की गौरवशाली परंपरा का वर्णन करते हुए कहा कि मां गोदावरी की अविरल धारा, सह्याद्री की भव्यता, अजंता-एलोरा की गुफाएं, त्र्यम्बकेश्वर ज्योतिर्लिंग तथा शिरडी और पंढरपुर जैसे तीर्थ राज्य की समृद्ध पौराणिक और सांस्कृतिक धरोहर के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि संत ज्ञानेश्वर, संत तुकाराम और संत नामदेव की भक्ति परंपरा ने समाज में नैतिकता और आध्यात्मिक चेतना का विकास किया। छत्रपति शिवाजी महाराज के अदम्य साहस और स्वराज की भावना ने भारतीयों में आत्मगौरव का संचार किया, जबकि लोकमान्य तिलक, वीर सावरकर और गोपाल कृष्ण गोखले ने स्वतंत्रता संग्राम में राष्ट्रीय जागरण का कार्य किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ और उपस्थित गणमान्य
समारोह में गुजराती समाज की ओर से 'वायब्रेंट स्पिरिट ऑफ गुजरात' थीम पर आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुति दी गई। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत का संदेश प्रसारित किया गया और गुजरात के इतिहास व कला-संस्कृति पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। आई साहेब ग्रुप द्वारा महाराष्ट्र की ऐतिहासिकता, आध्यात्मिकता और विरासत पर प्रस्तुति दी गई और महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा का संदेश भी प्रसारित हुआ। समारोह में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई, राज्यपाल के प्रमुख सचिव डॉ. नवनीत मोहन कोठारी, उप सचिव सुनील दुबे, गुजराती समाज के अध्यक्ष संजय पटेल, मराठी समाज के प्रतिनिधि अभिजीत देशमुख और शैला प्रधान सहित दोनों राज्यों के मध्य प्रदेश में निवासरत नागरिक उपस्थित रहे।
राष्ट्र निर्माण का संकल्प
राज्यपाल पटेल ने उपस्थित जनों को 'एक भारत–श्रेष्ठ भारत' के संकल्प को साकार करने में सक्रिय सहभागिता और राष्ट्र के नव निर्माण में सर्वोत्तम योगदान का संकल्प दिलाया। दोनों राज्यों के मध्य प्रदेश में निवासरत प्रतिनिधियों ने राज्यपाल पटेल का अपनी-अपनी संस्कृति के अनुरूप पारंपरिक स्वागत किया और उन्हें मराठी साठा तथा स्मृति चिन्ह भेंट किए। यह समारोह भारत की सांस्कृतिक विविधता और राष्ट्रीय एकता के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।