क्या राज्य स्थापना दिवस समारोह राष्ट्रीय एकता और अखंडता को मजबूत कर रहा है? : अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल
सारांश
Key Takeaways
- राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने वाले आयोजन महत्वपूर्ण होते हैं।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान से आपसी समझ बढ़ती है।
- उत्तर प्रदेश ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई।
- राज्यपाल ने विकास में उत्तर प्रदेश के लोगों का योगदान सराहा।
- समारोह ने 'एकता में विविधता' का संदेश दिया।
ईटानगर, 24 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। अरुणाचल प्रदेश के लोक भवन में शनिवार को उत्तर प्रदेश दिवस का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम ईटानगर में स्थित लोक भवन में उत्तर प्रदेश के निवासियों के लिए आयोजित किया गया, जहाँ ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को स्पष्टता से दर्शाया गया।
समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप ऐसे आयोजन राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारे और देश की अखंडता को मज़बूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने उत्तर प्रदेश के लोगों की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में राज्य विकास की नई ऊँचाइयों को छू रहा है। राज्यपाल ने बताया कि उत्तर प्रदेश आज सूचना प्रौद्योगिकी का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है और आध्यात्मिकता की भूमि के रूप में भी इसकी विशिष्ट पहचान है। यह राज्य तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए पसंदीदा स्थलों में से एक है, जो परंपरा में निहित भारत की प्रगति का प्रतीक है।
राज्यपाल ने उत्तर प्रदेश के राज्य स्थापना दिवस की शुभकामनाएं देते हुए अरुणाचल प्रदेश में विभिन्न पेशों और व्यवसायों से जुड़े उत्तर प्रदेश के लोगों को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के विकास, प्रगति और सामाजिक ताने-बाने में उनके योगदान के लिए आभार भी व्यक्त किया।
उत्तर प्रदेश की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने कहा कि सांस्कृतिक धरोहर, कलात्मक परंपराओं और क्रांतिकारी चेतना के माध्यम से इस राज्य ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई है।
लेफ्टिनेंट जनरल परनाइक (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ऐसे साझा मंच लोगों को एक-दूसरे के करीब लाते हैं और आपसी समझ को गहरा करते हैं। ये आयोजन इस विचार को सुदृढ़ करते हैं कि विविध संस्कृतियों और परंपराओं के बावजूद देश एक परिवार के रूप में एकजुट है। यह समारोह संस्कृतियों के सुंदर संगम का प्रतीक रहा और भारत की ‘एकता में विविधता’ को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में खास रंग भर दिया। उत्तर प्रदेश समुदाय के सदस्यों ने पारंपरिक प्रस्तुतियां दीं, वहीं अरुणाचल के बच्चों ने उत्तर प्रदेश के लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। यह सांस्कृतिक आदान-प्रदान और पारस्परिक सम्मान का प्रतीक रहा।