एक भारत, श्रेष्ठ भारत: राज्यपाल आचार्य बोले — विविधता को एकता के सूत्र में पिरोता है यह अभियान
सारांश
मुख्य बातें
असम के राज्यपाल लक्ष्मण प्रसाद आचार्य ने 13 सितंबर 2026 को गुवाहाटी स्थित लोकभवन में स्पष्ट किया कि 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों को सांस्कृतिक और सामाजिक धागे में पिरोने का एक सजीव राष्ट्रीय अभियान है। उन्होंने यह विचार उत्तर प्रदेश से आए 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल के साथ संवाद के दौरान साझा किए।
विविधता में एकता: राज्यपाल का मुख्य संदेश
राज्यपाल आचार्य ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी बहुआयामी विविधता है। उन्होंने रेखांकित किया कि अलग-अलग राज्यों की भाषा, संस्कृति, परंपरा, खान-पान और जीवनशैली भले ही भिन्न हों, परंतु इन सबके बीच भारतीयता का एक अटूट सूत्र मौजूद है।
उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न प्रांतों के लोगों का परस्पर राज्यों में आना-जाना और वहाँ की संस्कृति व परंपराओं को निकट से समझना राष्ट्रीय एकता की जड़ों को और गहरा करता है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब क्षेत्रीय पहचानें मजबूत हो रही हैं और राष्ट्रीय एकजुटता को निरंतर नई ऊर्जा की आवश्यकता है।
असम: विकास, संस्कृति और पर्यटन का संगम
राज्यपाल ने असम की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और असाधारण प्राकृतिक विविधता के कारण देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है। उन्होंने जोर दिया कि बुनियादी ढाँचे और कनेक्टिविटी के क्षेत्र में हो रहे निरंतर कार्य से विकास की गति तेज हुई है और पर्यटन, व्यापार तथा रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं।
गौरतलब है कि असम में पर्यटन की व्यापक संभावनाएँ हैं, और राज्यपाल ने रेखांकित किया कि विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
मीडिया की भूमिका और राजभवन का दायित्व
आचार्य ने मीडिया की भूमिका को विशेष महत्व देते हुए कहा कि मीडिया केवल समाचारों को सामने रखने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और देश के विभिन्न हिस्सों के बीच सेतु का काम करने वाला सशक्त माध्यम है। उन्होंने राजभवन और लोकभवन जैसे संवैधानिक संस्थानों को जनता से संवाद और सेवा का केंद्र बताया।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए जनभागीदारी और जनता से निरंतर संवाद अनिवार्य है। यह उनके उस व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है जिसमें संवैधानिक संस्थाएँ महज प्रशासनिक केंद्र नहीं, बल्कि नागरिकों से जुड़ाव का जीवंत मंच बनें।
UP-असम सांस्कृतिक सेतु: यात्रा का महत्व
उत्तर प्रदेश के 13 सदस्यीय मीडिया प्रतिनिधिमंडल की यह असम यात्रा दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को प्रगाढ़ करने की दिशा में एक ठोस पहल मानी जा रही है। राज्यपाल ने कहा कि असम की विकास गाथा, संस्कृति और विरासत को देश के व्यापक क्षेत्रों तक पहुँचाना समय की माँग है, ताकि राज्य में हो रहे बदलावों और उपलब्ध संभावनाओं से अधिक से अधिक लोग परिचित हो सकें।
आने वाले दिनों में इस तरह के आदान-प्रदान कार्यक्रम 'एक भारत, श्रेष्ठ भारत' अभियान को जमीनी स्तर पर और मजबूती दे सकते हैं।