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भाषा, संस्कृति और परंपरा से समृद्ध है भारत की पहचान: राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति का पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस पर संदेश

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भाषा, संस्कृति और परंपरा से समृद्ध है भारत की पहचान: राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति का पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस पर संदेश

सारांश

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने भुवनेश्वर में पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस पर कहा कि भाषा, संस्कृति और परंपरा भारत की विविधता में एकता को समृद्ध करते हैं। उन्होंने कोलकाता को सांस्कृतिक राजधानी बताया और ओडिशा-पश्चिम बंगाल के साझा सांस्कृतिक बंधन को रेखांकित किया।

मुख्य बातें

ओडिशा के राज्यपाल डॉ.
हरि बाबू कंभमपति ने 21 जून 2026 को भुवनेश्वर में पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया।
उन्होंने कहा कि विविधता में एकता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना इसी से जुड़ी है।
कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी बताया; रवींद्रनाथ टैगोर और सत्यजीत रे जैसी विभूतियों का उल्लेख किया।
दुर्गा पूजा को यूनेस्को द्वारा मान्यता प्राप्त अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में रेखांकित किया।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच साझा इतिहास, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित संबंधों को मजबूत करने का आह्वान किया।

ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने 21 जून 2026 को भुवनेश्वर के लोक भवन स्थित नए अभिषेक हॉल में आयोजित पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि विविधता में एकता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है और यही इसकी स्थिरता व प्रगति की आधारशिला है। प्रत्येक भाषा, संस्कृति, परंपरा और समुदाय इस अनूठी राष्ट्रीय पहचान को और अधिक समृद्ध करते हैं।

राष्ट्रीय एकता पर राज्यपाल का जोर

अपने संबोधन में डॉ. कंभमपति ने कहा कि एक-दूसरे के त्योहारों में भाग लेना, विभिन्न भाषाओं को सीखना और विविध परंपराओं को अपनाना — ये सभी लोगों के बीच भावनात्मक और सामाजिक संबंधों को प्रगाढ़ करते हैं। उन्होंने इस भावना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' दृष्टिकोण से जोड़ा, जो विभिन्न राज्यों के नागरिकों के बीच गहरी सांस्कृतिक समझ और भावनात्मक एकीकरण को प्रोत्साहित करता है।

पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को सराहा

राज्यपाल ने पश्चिम बंगाल को भारत के सबसे जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों में से एक बताया। उन्होंने साहित्य, कला, विज्ञान और राष्ट्र निर्माण में पश्चिम बंगाल के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित किया। कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी की संज्ञा देते हुए उन्होंने कहा कि यह वही भूमि है जिसने रवींद्रनाथ टैगोर और सत्यजीत रे जैसे महान विभूतियों को जन्म दिया।

डॉ. कंभमपति ने पश्चिम बंगाल के संगीत, रंगमंच, खानपान और उत्सवों में झलकती समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की प्रशंसा की। उन्होंने विशेष रूप से दुर्गा पूजा का उल्लेख किया, जिसे यूनेस्को ने मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है।

ओडिशा और पश्चिम बंगाल के आपसी संबंध

राज्यपाल ने दोनों पड़ोसी राज्यों के बीच साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित घनिष्ठ संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने ओडिशा में बसे पश्चिम बंगाल के निवासियों के योगदान की सराहना करते हुए दोनों राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने का आह्वान किया, ताकि एक अधिक समावेशी, सामंजस्यपूर्ण और समृद्ध भारत का निर्माण हो सके।

समारोह का आयोजन

इस अवसर पर राज्यपाल की आयुक्त-सह-सचिव डॉ. रूपा रोशन साहू ने स्वागत भाषण दिया। ओडिशा में रह रहे पश्चिम बंगाल के निवासियों ने अपने अनुभव साझा किए, जबकि एक सांस्कृतिक कार्यक्रम ने समारोह को उत्सवी रंग दिया। यह आयोजन दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि क्या ये भावनाएँ ज़मीनी स्तर पर अंतर-राज्यीय सहयोग में परिवर्तित होती हैं। ओडिशा में बसे बंगाली समुदाय की भागीदारी इस दिशा में एक सकारात्मक संकेत है, पर नीतिगत ढाँचे के बिना ऐसे समारोह प्रतीकात्मक ही रह जाते हैं।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस समारोह भुवनेश्वर में क्यों आयोजित हुआ?
यह समारोह ओडिशा में रहने वाले पश्चिम बंगाल के निवासियों के लिए आयोजित किया गया, जो दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक और भावनात्मक जुड़ाव को रेखांकित करता है। 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के तहत ऐसे अंतर-राज्यीय सांस्कृतिक आयोजन प्रोत्साहित किए जाते हैं।
राज्यपाल हरि बाबू कंभमपति ने पश्चिम बंगाल के बारे में क्या कहा?
राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति ने पश्चिम बंगाल को भारत के सबसे जीवंत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राज्यों में से एक बताया। उन्होंने कोलकाता को भारत की सांस्कृतिक राजधानी कहा और रवींद्रनाथ टैगोर व सत्यजीत रे जैसी विभूतियों का उल्लेख किया।
दुर्गा पूजा को यूनेस्को की मान्यता कब मिली?
यूनेस्को ने दुर्गा पूजा को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत के रूप में मान्यता दी है। राज्यपाल कंभमपति ने इस समारोह में इसका विशेष उल्लेख करते हुए इसे पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक बताया।
'एक भारत श्रेष्ठ भारत' दृष्टिकोण क्या है?
यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल है, जो विभिन्न राज्यों के बीच गहरी सांस्कृतिक समझ और भावनात्मक एकीकरण को बढ़ावा देती है। इसके तहत राज्य एक-दूसरे की भाषा, परंपरा और त्योहारों को जानने-समझने के लिए प्रोत्साहित किए जाते हैं।
ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच क्या सांस्कृतिक संबंध हैं?
दोनों राज्यों के बीच साझा इतिहास, सांस्कृतिक जुड़ाव और आध्यात्मिक परंपराओं पर आधारित घनिष्ठ संबंध हैं। ओडिशा में बड़ी संख्या में पश्चिम बंगाल के निवासी रहते हैं, जो दोनों राज्यों के बीच सामाजिक और आर्थिक सेतु का काम करते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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