पश्चिम बंगाल स्थापना दिवस: मुंबई के महाराष्ट्र लोक भवन में सांस्कृतिक संगम, राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने दी शुभकामनाएं
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई स्थित महाराष्ट्र लोक भवन में 20 जून को पश्चिम बंगाल राज्य स्थापना दिवस को भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ मनाया गया। महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने इस अवसर पर महाराष्ट्र और देशभर में बसे पश्चिम बंगाल के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। यह आयोजन भारत सरकार की 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' पहल के अंतर्गत संपन्न हुआ।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की रही धूम
पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर सोलापुर विश्वविद्यालय के छात्रों ने इस कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल की समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने दुर्गा पूजा गीत 'हेलो गिरि शुनो खोबोर' प्रस्तुत किया, जिसमें पश्चिम बंगाल के महान व्यक्तित्वों के जीवन और योगदान को एकालाप के माध्यम से दर्शाया गया। इसके अतिरिक्त, लोक नृत्य और कथक की प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोह लिया।
राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा ने मराठी भाषी छात्रों द्वारा बंगाली गीतों और नृत्यों की उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए विश्वविद्यालय और उसके छात्रों को विशेष रूप से बधाई दी। उन्होंने कहा कि मराठी भाषी छात्रों का यह प्रयास 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना का सच्चा प्रतिबिंब है।
राज्यपाल का संबोधन: दो राज्यों की साझा विरासत
सभा को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यद्यपि महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल के बीच लगभग दो हजार किलोमीटर की दूरी है, फिर भी दोनों राज्यों के लोगों की भावना, सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद की सोच में उल्लेखनीय समानता है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्य इतिहास, संस्कृति, आध्यात्मिकता और राष्ट्रवाद की साझा विरासत से एकजुट हैं।
राज्यपाल ने रेखांकित किया कि दोनों राज्यों ने देश को चैतन्य महाप्रभु, संत तुकाराम, अहिल्यादेवी होल्कर और स्वामी विवेकानंद जैसे महान व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल ने साहित्य और संगीत के क्षेत्र में अपार योगदान दिया है।
स्वतंत्रता संग्राम में दोनों राज्यों की भूमिका
राज्यपाल ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में दोनों राज्यों के अमूल्य योगदान का स्मरण कराया। उन्होंने कहा कि बंगाल ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस और बिपिन चंद्र पाल जैसे नेताओं को जन्म दिया, वहीं महाराष्ट्र ने लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक और गोपाल कृष्ण गोखले जैसे महान व्यक्तित्वों से राष्ट्र को नवाज़ा।
राज्यपाल ने प्रसिद्ध उक्ति — 'जो बंगाल आज सोचता है, वही भारत कल सोचता है' — का उल्लेख करते हुए कहा कि बंगाल के सपूतों ने राष्ट्र को 'वंदे मातरम' और 'जन गण मन' दोनों का अनमोल उपहार दिया है।
मुंबई और कोलकाता: दो राजधानियों का संगम
राज्यपाल ने कहा कि मुंबई जहाँ भारत की वित्तीय राजधानी है, वहीं कोलकाता को व्यापक रूप से देश की सांस्कृतिक राजधानी माना जाता है। उन्होंने बंगाली भाषा की तुलना प्रसिद्ध रसगुल्ले से करते हुए उसे मधुर और मीठी भाषा बताया।
कार्यक्रम के आरंभ में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आर.एन. रवि का एक वीडियो संदेश भी प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम में पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होल्कर सोलापुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रकाश महानवार, राज्यपाल के संयुक्त सचिव एस. राममूर्ति, सांस्कृतिक समन्वयक, लोक भवन के अधिकारी-कर्मचारी और मुंबई के विभिन्न विद्यालयों के छात्र उपस्थित रहे। यह आयोजन दो राज्यों के बीच सांस्कृतिक सेतु को और मज़बूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम साबित हुआ।