पश्चिम बंगाल दिवस पर CM सुवेंदु अधिकारी का हमला — TMC के 'तुष्टीकरण और वोट-बैंक राजनीति के काले अध्याय' का अंत
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने 20 जून 2026 को पश्चिम बंगाल दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को बधाई देते हुए पिछली तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि दशकों बाद पहली बार राज्य में एक राष्ट्रवादी सरकार इस ऐतिहासिक दिन को आधिकारिक मान्यता दे रही है। अधिकारी ने इसे बंगाली अस्मिता की पुनर्स्थापना का ऐतिहासिक क्षण बताया।
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री अधिकारी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा कि कई दशकों के बाद, पहली बार उनकी राष्ट्रवादी सरकार 'भारत केसरी' डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के महान आदर्शों से प्रेरित होकर पश्चिम बंगाल के निर्माण की सच्ची और ऐतिहासिक घटनाओं को पूरी मान्यता देते हुए आधिकारिक रूप से 'पश्चिम बंगाल दिवस' मना रही है। उन्होंने कहा, 'हमारे इतिहास को मिटाने की घिनौनी साजिश आज खत्म हो गई है। वोट-बैंक की राजनीति और तुष्टीकरण के काले अध्याय का अंत हो गया है।'
पिछली सरकार पर आरोप
अधिकारी ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने केवल अपने वोट-बैंक को सुरक्षित रखने और तुष्टीकरण की राजनीति साधने के लिए इस पवित्र दिन के महत्व को जानबूझकर दबाया। उनके अनुसार, बंगाली अस्मिता के लिए किए गए संघर्ष को इतिहास के पन्नों से मिटाने का प्रयास किया गया, ताकि लोग अपनी जड़ों और पश्चिम बंगाल के निर्माण के पीछे के असली नायकों को भूल जाएँ। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने आज उस ऐतिहासिक गलती को सुधारा है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को विशेष रूप से याद किया और कहा कि बंगाली हमेशा उनके ऋणी रहेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब अविभाजित बंगाल को पूरी तरह पाकिस्तान में मिलाने की योजना बनाई जा रही थी, तब डॉ. मुखर्जी एक अटूट किले की तरह उसके विरुद्ध खड़े रहे। उन्हीं के अडिग नेतृत्व, व्यापक आंदोलन और दूरदर्शी सोच की वजह से पश्चिम बंगाल राज्य का गठन संभव हो पाया और वह भारत का अभिन्न अंग बना।
ऐतिहासिक महत्व और संकल्प
अधिकारी ने भारत सेवाश्रम संघ के संस्थापक स्वामी प्रणवानंद महाराज और तत्कालीन पश्चिम बंगाल विधानसभा के उन सभी सदस्यों को भी नमन किया जिनके प्रयासों ने राज्य को भारत का हिस्सा बनाया। उन्होंने कहा कि यदि उन्होंने बंगालियों के लिए यह सुरक्षित ठिकाना न बनाया होता, तो आज बंगाली संस्कृति, भाषा और अस्तित्व ही संकट में होता। मुख्यमंत्री ने राज्यवासियों से आह्वान किया कि वे डॉ. मुखर्जी के सपनों और आदर्शों को मार्गदर्शक मानते हुए एक नए, सुरक्षित और समृद्ध पश्चिम बंगाल के निर्माण का संकल्प लें।