पश्चिम बंगाल दिवस विवाद: शुभंकर सरकार का BJP पर आरोप — इतिहास मिटाने की राजनीति
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने 20 जून 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस को लेकर BJP जनता के बीच ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रही है। उनके अनुसार, आज का दिन वास्तविक अर्थों में पश्चिम बंगाल दिवस नहीं है और इसे इस रूप में मनाना ऐतिहासिक सच्चाई से मुँह मोड़ना है।
ऐतिहासिक मतदान का संदर्भ
सरकार ने उस दौर की मतदान प्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू महासभा की ओर से केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मतदान किया था। उनके अनुसार, ज्योति बसु और रतनलाल ब्राह्मण की ओर से दो मत प्राप्त हुए थे, और कुल 58 लोगों ने पश्चिम बंगाल के पक्ष में मतदान किया था। वहीं 21 लोग ऐसे थे जो पश्चिम बंगाल के पक्ष में नहीं थे और पाकिस्तान के समर्थन में खड़े थे।
सरकार ने कहा कि इस पूरे ऐतिहासिक घटनाक्रम को मिटाने की कोशिश की जा रही है और वर्तमान परिस्थितियों में BJP केवल राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास की पुनर्व्याख्या कर रही है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।
पश्चिम बंगाल दिवस कब होना चाहिए?
कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टिकोणों से पश्चिम बंगाल दिवस 15 अगस्त को मनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि उसी दिन देश को अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिली थी और पश्चिम बंगाल को भी राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी।
सांस्कृतिक संदर्भ देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि बंगाली समाज 14 और 15 अप्रैल को बंगाली नववर्ष मनाता है, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है।
BJP पर प्रोपेगेंडा का आरोप
सरकार ने आरोप लगाया कि BJP राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग अवधारणाएँ स्थापित कर उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की कोशिश करती है। उनके अनुसार, पार्टी पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच भ्रामक और गलत संदेश फैलाने का काम कर रही है।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की रणनीति से BJP को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि बंगाल की जनता ऐतिहासिक तथ्यों से भली-भाँति परिचित है।
आगे क्या
पश्चिम बंगाल दिवस को लेकर यह विवाद राज्य में BJP और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। कांग्रेस के इन आरोपों पर BJP की प्रतिक्रिया का इंतजार है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है।