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पश्चिम बंगाल दिवस विवाद: शुभंकर सरकार का BJP पर आरोप — इतिहास मिटाने की राजनीति

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पश्चिम बंगाल दिवस विवाद: शुभंकर सरकार का BJP पर आरोप — इतिहास मिटाने की राजनीति

सारांश

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने BJP पर इतिहास की पुनर्व्याख्या कर राजनीतिक लाभ उठाने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि 58 मतों वाले ऐतिहासिक तथ्य को दरकिनार कर BJP भ्रम फैला रही है और असली पश्चिम बंगाल दिवस 15 अगस्त होना चाहिए।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने 20 जून को BJP पर इतिहास मिटाने का आरोप लगाया।
ऐतिहासिक मतदान में 58 लोगों ने पश्चिम बंगाल के पक्ष में और 21 लोगों ने विरोध में (पाकिस्तान के पक्ष में) मत दिया था।
हिंदू महासभा की ओर से केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मतदान किया था।
सरकार के अनुसार, पश्चिम बंगाल दिवस 15 अगस्त को मनाया जाना चाहिए, न कि किसी अन्य तिथि को।
BJP पर आरोप है कि वह राजनीतिक फायदे के लिए प्रोपेगेंडा फैला रही है।

पश्चिम बंगाल कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने 20 जून 2026 को भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल दिवस को लेकर BJP जनता के बीच ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रही है। उनके अनुसार, आज का दिन वास्तविक अर्थों में पश्चिम बंगाल दिवस नहीं है और इसे इस रूप में मनाना ऐतिहासिक सच्चाई से मुँह मोड़ना है।

ऐतिहासिक मतदान का संदर्भ

सरकार ने उस दौर की मतदान प्रणाली का हवाला देते हुए कहा कि हिंदू महासभा की ओर से केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मतदान किया था। उनके अनुसार, ज्योति बसु और रतनलाल ब्राह्मण की ओर से दो मत प्राप्त हुए थे, और कुल 58 लोगों ने पश्चिम बंगाल के पक्ष में मतदान किया था। वहीं 21 लोग ऐसे थे जो पश्चिम बंगाल के पक्ष में नहीं थे और पाकिस्तान के समर्थन में खड़े थे।

सरकार ने कहा कि इस पूरे ऐतिहासिक घटनाक्रम को मिटाने की कोशिश की जा रही है और वर्तमान परिस्थितियों में BJP केवल राजनीतिक लाभ के लिए इतिहास की पुनर्व्याख्या कर रही है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

पश्चिम बंगाल दिवस कब होना चाहिए?

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि व्यावहारिक और सैद्धांतिक दोनों दृष्टिकोणों से पश्चिम बंगाल दिवस 15 अगस्त को मनाया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि उसी दिन देश को अंग्रेजी शासन से मुक्ति मिली थी और पश्चिम बंगाल को भी राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त हुई थी।

सांस्कृतिक संदर्भ देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि बंगाली समाज 14 और 15 अप्रैल को बंगाली नववर्ष मनाता है, जो राज्य की सांस्कृतिक पहचान का केंद्र है।

BJP पर प्रोपेगेंडा का आरोप

सरकार ने आरोप लगाया कि BJP राजनीतिक लाभ के लिए अलग-अलग अवधारणाएँ स्थापित कर उन्हें जमीनी स्तर पर लागू करने की कोशिश करती है। उनके अनुसार, पार्टी पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच भ्रामक और गलत संदेश फैलाने का काम कर रही है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस तरह की रणनीति से BJP को कोई राजनीतिक लाभ नहीं होगा, क्योंकि बंगाल की जनता ऐतिहासिक तथ्यों से भली-भाँति परिचित है।

आगे क्या

पश्चिम बंगाल दिवस को लेकर यह विवाद राज्य में BJP और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव का हिस्सा है। कांग्रेस के इन आरोपों पर BJP की प्रतिक्रिया का इंतजार है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गरमा सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही राजनीतिक है जितना कि BJP की तारीख चुनना। गौरतलब है कि बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वर्चस्व के बीच कांग्रेस का यह कदम अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश भी है। असली सवाल यह है कि क्या ऐतिहासिक बहस जनता के वास्तविक मुद्दों — रोजगार, सुरक्षा, विकास — से ध्यान हटाने का माध्यम बन रही है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंगाल दिवस विवाद क्या है?
पश्चिम बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने 20 जून को BJP पर आरोप लगाया कि वह गलत तारीख को पश्चिम बंगाल दिवस के रूप में मनाकर इतिहास को तोड़-मरोड़ रही है। उनके अनुसार, यह दिन ऐतिहासिक तथ्यों पर आधारित नहीं है।
शुभंकर सरकार के अनुसार पश्चिम बंगाल दिवस कब होना चाहिए?
शुभंकर सरकार के अनुसार पश्चिम बंगाल दिवस 15 अगस्त को मनाया जाना चाहिए, क्योंकि उसी दिन भारत को स्वतंत्रता मिली और पश्चिम बंगाल को राज्य के रूप में मान्यता प्राप्त हुई। उन्होंने बंगाली नववर्ष 14-15 अप्रैल का भी सांस्कृतिक संदर्भ दिया।
ऐतिहासिक मतदान में क्या हुआ था?
सरकार के अनुसार उस दौर की मतदान प्रणाली में 58 लोगों ने पश्चिम बंगाल के पक्ष में मत दिया था, जबकि 21 लोग विरोध में थे जो पाकिस्तान के पक्ष में थे। हिंदू महासभा की ओर से केवल श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने मतदान किया था।
कांग्रेस ने BJP पर क्या आरोप लगाए हैं?
कांग्रेस ने BJP पर राजनीतिक लाभ के लिए प्रोपेगेंडा फैलाने और पश्चिम बंगाल के लोगों के बीच भ्रामक संदेश प्रचारित करने का आरोप लगाया है। सरकार ने कहा कि BJP अलग-अलग अवधारणाएँ स्थापित कर इतिहास को मिटाने का काम कर रही है।
इस विवाद का बंगाल की राजनीति पर क्या असर होगा?
यह विवाद राज्य में BJP और विपक्षी दलों के बीच बढ़ते राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। BJP की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी आनी बाकी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा बंगाल की राजनीति में केंद्रीय बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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