11 अगस्त 2026
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पश्चिम बंग दिवस पर अग्निमित्रा पॉल बोलीं — 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी न होते तो आज हम बांग्लादेश में होते'

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पश्चिम बंग दिवस पर अग्निमित्रा पॉल बोलीं — 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी न होते तो आज हम बांग्लादेश में होते'

सारांश

पश्चिम बंग दिवस पर मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंगाल की पहचान का रक्षक बताया — कहा, उनके बिना आज हम बांग्लादेश में होते। PM मोदी भी इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।

मुख्य बातें

पश्चिम बंगाल की मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 20 जून 2026 को पश्चिम बंग दिवस पर भवानीपुर में पत्रकारों से बातचीत की।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शिता के बिना पश्चिम बंगाल आज बांग्लादेश का हिस्सा होता।
तारकेश्वर में हुई बैठक में बंगाल-विभाजन का निर्णय लिया गया था — हिंदू-बहुल क्षेत्र भारत में और शेष पूर्वी पाकिस्तान में।
पिछली राज्य सरकार ने 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' मनाने की अनुमति नहीं दी थी; वह बंगाली नववर्ष को यह दर्जा देना चाहती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य की मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं।

पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 20 जून 2026 को पश्चिम बंग दिवस के अवसर पर भवानीपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह दिन पश्चिम बंगाल के लोगों — विशेष रूप से बंगाली हिंदुओं — के लिए अत्यंत ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। उन्होंने इस उपलब्धि का पूरा श्रेय भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दिया।

मुखर्जी की दूरदर्शिता को श्रेय

मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'यह हम सभी के लिए बहुत भावुक पल है। पश्चिम बंगाल के बंगालियों के पूर्वज हमेशा एक स्वतंत्र बंगाल का सपना देखते थे और पश्चिम बंग दिवस मनाना चाहते थे। यह केवल हमारी पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शिता, संघर्ष और पश्चिम बंगाल के बंगालियों के कल्याण के प्रति उनकी सोच के कारण संभव हो पाया।'

उन्होंने आगे कहा, 'अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज हम बांग्लादेश में होते। आज हम स्वतंत्र हैं और अपनी संस्कृति, विचारधारा तथा पहचान को बचा पाए हैं, तो इसका श्रेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जाता है।'

तारकेश्वर बैठक और विभाजन का निर्णय

पॉल ने बताया कि तारकेश्वर में हुई पहली ऐतिहासिक बैठक में यह तय किया गया था कि स्वतंत्रता के बाद बंगाल का विभाजन होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक थी, उन्हें भारत में रखा जाए, और शेष भाग तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान — यानी आज के बांग्लादेश — में जाए। यह निर्णय आगे चलकर पश्चिम बंगाल के गठन की नींव बना।

पिछली सरकार पर आरोप, इतिहास को भुलाने की कोशिश

मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने पिछली राज्य सरकार से कई बार 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाने की माँग की थी, क्योंकि इसी तिथि को पश्चिम बंगाल का औपचारिक गठन हुआ था। लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उनका आरोप है कि पिछली सरकार चाहती थी कि बंगाली नववर्ष को ही 'पश्चिम बंग दिवस' घोषित किया जाए और वास्तविक ऐतिहासिक तथ्यों को पृष्ठभूमि में धकेल दिया जाए।

PM मोदी और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम में आगमन

अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं और उनके साथ राज्य की मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगी। उन्होंने कहा कि आखिरकार बंगाल की जनता की आवाज़ सुनी गई और यह दिन डॉ. मुखर्जी के योगदान को सम्मान देने का अवसर है।

आगे क्या

गौरतलब है कि 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलने के साथ यह दिन अब राज्य के राजनीतिक और सांस्कृतिक कैलेंडर में स्थायी स्थान पाने की ओर अग्रसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन को लेकर राजनीतिक विमर्श आने वाले समय में और तेज़ होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

या केवल चुनावी ध्रुवीकरण का एक और अध्याय — इसका उत्तर आने वाले विधानसभा चुनाव देंगे।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पश्चिम बंग दिवस क्यों मनाया जाता है?
20 जून को पश्चिम बंगाल का औपचारिक गठन हुआ था, इसलिए इस तिथि को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाया जाता है। यह दिन डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संघर्ष और बंगाल-विभाजन के ऐतिहासिक निर्णय की स्मृति में समर्पित है।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पश्चिम बंगाल के गठन में क्या योगदान था?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी भारतीय जनसंघ के संस्थापक और प्रख्यात नेता थे, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद बंगाल के विभाजन की पैरवी की। तारकेश्वर में हुई बैठक में उनकी पहल पर यह तय हुआ कि हिंदू-बहुल क्षेत्र भारत में रहे, जिससे पश्चिम बंगाल का गठन संभव हुआ।
अग्निमित्रा पॉल ने पिछली राज्य सरकार पर क्या आरोप लगाए?
मंत्री अग्निमित्रा पॉल के अनुसार पिछली राज्य सरकार ने 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' मनाने की अनुमति नहीं दी और बंगाली नववर्ष को यह दर्जा देकर वास्तविक इतिहास को भुलाने की कोशिश की।
पश्चिम बंग दिवस के कार्यक्रम में कौन शामिल हो रहे हैं?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राज्य की मुख्यमंत्री इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। अग्निमित्रा पॉल ने इसे बंगाल की जनता की आवाज़ की जीत बताया।
तारकेश्वर बैठक का ऐतिहासिक महत्व क्या है?
तारकेश्वर में हुई बैठक में स्वतंत्रता के बाद बंगाल के विभाजन का निर्णय लिया गया था। इस बैठक में तय हुआ कि हिंदू-बहुल क्षेत्र भारत में और शेष भाग तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में जाएगा, जो पश्चिम बंगाल के गठन की नींव बनी।
राष्ट्र प्रेस
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