पश्चिम बंग दिवस पर अग्निमित्रा पॉल बोलीं — 'श्यामा प्रसाद मुखर्जी न होते तो आज हम बांग्लादेश में होते'
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल सरकार में मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने 20 जून 2026 को पश्चिम बंग दिवस के अवसर पर भवानीपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि यह दिन पश्चिम बंगाल के लोगों — विशेष रूप से बंगाली हिंदुओं — के लिए अत्यंत ऐतिहासिक और भावनात्मक महत्व रखता है। उन्होंने इस उपलब्धि का पूरा श्रेय भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को दिया।
मुखर्जी की दूरदर्शिता को श्रेय
मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'यह हम सभी के लिए बहुत भावुक पल है। पश्चिम बंगाल के बंगालियों के पूर्वज हमेशा एक स्वतंत्र बंगाल का सपना देखते थे और पश्चिम बंग दिवस मनाना चाहते थे। यह केवल हमारी पार्टी के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की दूरदर्शिता, संघर्ष और पश्चिम बंगाल के बंगालियों के कल्याण के प्रति उनकी सोच के कारण संभव हो पाया।'
उन्होंने आगे कहा, 'अगर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी नहीं होते तो आज हम बांग्लादेश में होते। आज हम स्वतंत्र हैं और अपनी संस्कृति, विचारधारा तथा पहचान को बचा पाए हैं, तो इसका श्रेय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जाता है।'
तारकेश्वर बैठक और विभाजन का निर्णय
पॉल ने बताया कि तारकेश्वर में हुई पहली ऐतिहासिक बैठक में यह तय किया गया था कि स्वतंत्रता के बाद बंगाल का विभाजन होना चाहिए। जिन क्षेत्रों में हिंदू आबादी अधिक थी, उन्हें भारत में रखा जाए, और शेष भाग तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान — यानी आज के बांग्लादेश — में जाए। यह निर्णय आगे चलकर पश्चिम बंगाल के गठन की नींव बना।
पिछली सरकार पर आरोप, इतिहास को भुलाने की कोशिश
मंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने पिछली राज्य सरकार से कई बार 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में मनाने की माँग की थी, क्योंकि इसी तिथि को पश्चिम बंगाल का औपचारिक गठन हुआ था। लेकिन तत्कालीन सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी। उनका आरोप है कि पिछली सरकार चाहती थी कि बंगाली नववर्ष को ही 'पश्चिम बंग दिवस' घोषित किया जाए और वास्तविक ऐतिहासिक तथ्यों को पृष्ठभूमि में धकेल दिया जाए।
PM मोदी और मुख्यमंत्री का कार्यक्रम में आगमन
अग्निमित्रा पॉल ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल होने आ रहे हैं और उनके साथ राज्य की मुख्यमंत्री भी उपस्थित रहेंगी। उन्होंने कहा कि आखिरकार बंगाल की जनता की आवाज़ सुनी गई और यह दिन डॉ. मुखर्जी के योगदान को सम्मान देने का अवसर है।
आगे क्या
गौरतलब है कि 20 जून को 'पश्चिम बंग दिवस' के रूप में आधिकारिक मान्यता मिलने के साथ यह दिन अब राज्य के राजनीतिक और सांस्कृतिक कैलेंडर में स्थायी स्थान पाने की ओर अग्रसर है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दिन को लेकर राजनीतिक विमर्श आने वाले समय में और तेज़ होगा।