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पश्चिम बंग दिवस: मोदी ने तारकेश्वर को क्यों चुना — ऐतिहासिक कारण और ₹18,880 करोड़ किसान निधि

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पश्चिम बंग दिवस: मोदी ने तारकेश्वर को क्यों चुना — ऐतिहासिक कारण और ₹18,880 करोड़ किसान निधि

सारांश

तारकेश्वर महज एक आयोजन-स्थल नहीं — यह 1947 की उस बैठक की धरती है जिसने बंगाल का भविष्य तय किया। मोदी ने यहाँ से पीएम-किसान की 23वीं किस्त, फसल बीमा और डिजिटल कृषि मिशन समेत कई योजनाएँ लॉन्च कीं — इतिहास और विकास को एक मंच पर जोड़ने की सोची-समझी रणनीति।

मुख्य बातें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हुगली जिले के तारकेश्वर से पश्चिम बंग दिवस समारोह में भाग लिया; थीम — 'विरासत, सद्भाव और विकास' ।
पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी — देशभर के 9.44 करोड़ किसानों को ₹18,880 करोड़ से अधिक हस्तांतरित।
पश्चिम बंगाल के 45 लाख किसानों को ₹900 करोड़ से अधिक; राज्य में कुल वितरण ₹15,000 करोड़ पार।
फसल बीमा योजना के तहत 2026-27 में राज्य के 50 लाख किसानों और 14 लाख हेक्टेयर भूमि को ₹28,140 करोड़ मूल्य की फसल सुरक्षा।
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 17,300 हेक्टेयर में 346 क्लस्टर ; धन-धान्य योजना में पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार, झाड़ग्राम शामिल।
तारकेश्वर का चुनाव 15 अप्रैल 1947 की हिंदू महासभा बैठक से जुड़ा है, जिसमें डॉ.
श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंगाल विभाजन की पहल का अधिकार मिला था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 21 जून 2025 को पश्चिम बंगाल दौरे पर हुगली जिले के तारकेश्वर पहुँचे, जो कोलकाता से लगभग 62 किलोमीटर दूर स्थित है। यहाँ से उन्होंने 'पश्चिम बंग दिवस' समारोह में भाग लेते हुए कई केंद्रीय योजनाओं का शुभारंभ किया और विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखी। इस वर्ष समारोह की थीम 'पश्चिम बंगाल: विरासत, सद्भाव और विकास' रखी गई है।

तारकेश्वर का ऐतिहासिक महत्व

तारकेश्वर को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुने जाने के पीछे एक गहरी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि है। 15 अप्रैल 1947 को यहीं अखिल भारतीय हिंदू महासभा की एक निर्णायक बैठक हुई थी, जिसमें भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंगाल के विभाजन के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सौंपा गया था।

उस दौर में बंगाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाने के पक्ष में थे, क्योंकि राज्य में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक थी और हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत थी। डॉ. मुखर्जी ने इसका कड़ा विरोध करते हुए तत्कालीन वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को पत्र लिखा और माँग की कि चाहे भारत का विभाजन हो या न हो, बंगाल का विभाजन अवश्य किया जाए ताकि हिंदू बहुल क्षेत्र पाकिस्तान का हिस्सा न बनें। गौरतलब है कि इसी ऐतिहासिक संघर्ष की स्मृति को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने तारकेश्वर को इस समारोह के लिए चुना।

पीएम-किसान की 23वीं किस्त जारी

इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 23वीं किस्त जारी की। देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के बैंक खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। अकेले पश्चिम बंगाल के 45 लाख से अधिक किसानों को ₹900 करोड़ से ज़्यादा की राशि प्राप्त हुई, जिससे राज्य में इस योजना के तहत अब तक वितरित कुल राशि ₹15,000 करोड़ से अधिक हो गई है। राष्ट्रीय स्तर पर 2019 से अब तक इस योजना के अंतर्गत कुल वितरण ₹4.46 लाख करोड़ से अधिक पहुँच गया है।

कृषि क्षेत्र की प्रमुख योजनाएँ

प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में कई केंद्रीय कृषि योजनाओं का शुभारंभ किया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत वर्ष 2026-27 में राज्य के लगभग 50 लाख किसानों और 14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बीमा सुरक्षा प्रदान करने का लक्ष्य है, जिससे करीब ₹28,140 करोड़ मूल्य की फसलों को कवर मिलेगा।

डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीस्टैक प्लेटफॉर्म के माध्यम से किसानों को उर्वरक वितरण, किसान क्रेडिट कार्ड, प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद जैसी सेवाओं के लिए एकीकृत डिजिटल सुविधा उपलब्ध होगी। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के अंतर्गत राज्य में 17,300 हेक्टेयर क्षेत्र में 346 प्राकृतिक खेती क्लस्टर विकसित किए जाएंगे और 'कृषि सखी' नेटवर्क के ज़रिए पर्यावरण अनुकूल खेती को प्रोत्साहन दिया जाएगा।

धन-धान्य योजना और बुनियादी ढाँचा

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के तहत पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम जिलों को शामिल किया गया है। इस योजना का उद्देश्य कृषि उत्पादकता बढ़ाना, फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करना, सिंचाई एवं भंडारण सुविधाओं को सुदृढ़ करना और किसानों की संस्थागत ऋण तक पहुँच सुनिश्चित करना है। इसके अलावा प्रधानमंत्री ने रेलवे, ग्रामीण विकास, मत्स्य पालन और पशुपालन क्षेत्रों से जुड़ी विकास परियोजनाओं का भी उद्घाटन और शिलान्यास किया।

आगे क्या

यह दौरा ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में केंद्र और राज्य सरकार के बीच योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर राजनीतिक तनाव बना हुआ है। केंद्रीय योजनाओं की सीधी शुरुआत और किसान निधि का प्रत्यक्ष हस्तांतरण इस संदर्भ में महत्वपूर्ण है। एग्रीस्टैक और प्राकृतिक खेती मिशन के ज़मीनी क्रियान्वयन पर नज़र रखना आने वाले महीनों में अहम होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

और सीधे किसान खातों में हस्तांतरण इस टकराव को दरकिनार करने का व्यावहारिक तरीका है। हालाँकि, एग्रीस्टैक और प्राकृतिक खेती मिशन जैसी योजनाओं की सफलता राज्य सरकार के सहयोग के बिना संदिग्ध रहेगी — और यही वह अनुत्तरित प्रश्न है जिसे आज की सुर्खियाँ नज़रअंदाज़ कर रही हैं।
RashtraPress
5 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीएम मोदी ने पश्चिम बंग दिवस के लिए तारकेश्वर को ही क्यों चुना?
तारकेश्वर का ऐतिहासिक महत्व है — 15 अप्रैल 1947 को यहाँ अखिल भारतीय हिंदू महासभा की बैठक हुई थी, जिसमें डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को बंगाल विभाजन के लिए आवश्यक कदम उठाने का अधिकार दिया गया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे 'पश्चिम बंग दिवस' समारोह का केंद्र बनाया।
पीएम-किसान की 23वीं किस्त में कितनी राशि जारी की गई?
23वीं किस्त के तहत देशभर के 9.44 करोड़ से अधिक किसानों के खातों में ₹18,880 करोड़ से अधिक की राशि सीधे हस्तांतरित की गई। पश्चिम बंगाल के 45 लाख से अधिक किसानों को इसमें से ₹900 करोड़ से ज़्यादा की राशि प्राप्त हुई।
पश्चिम बंगाल में किन कृषि योजनाओं की शुरुआत हुई?
प्रधानमंत्री ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, डिजिटल एग्रीकल्चर मिशन के तहत एग्रीस्टैक, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन और प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना की शुरुआत की। धन-धान्य योजना में पुरुलिया, दार्जिलिंग, अलीपुरद्वार और झाड़ग्राम जिलों को शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से पश्चिम बंगाल के कितने किसानों को फायदा होगा?
वर्ष 2026-27 में राज्य के लगभग 50 लाख किसानों और 14 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को बीमा सुरक्षा देने का लक्ष्य है। इससे करीब ₹28,140 करोड़ मूल्य की फसलों को सुरक्षा कवर मिलेगा।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने बंगाल विभाजन की माँग क्यों की थी?
उस समय बंगाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री हुसैन शहीद सुहरावर्दी पूरे बंगाल को पाकिस्तान में मिलाना चाहते थे, क्योंकि राज्य में मुस्लिम आबादी बहुसंख्यक थी और हिंदुओं की हिस्सेदारी लगभग 42 प्रतिशत थी। डॉ. मुखर्जी ने इसके विरोध में वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन को पत्र लिखकर माँग की कि हिंदू बहुल क्षेत्रों को पाकिस्तान का हिस्सा बनने से बचाने के लिए बंगाल का विभाजन किया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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