20 सितंबर 2026
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गुजरात: टेंडर वैलिडिटी 120 से घटाकर 90 दिन, मंजूरी के लिए 51 66 दिन की समय सीमा तय

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गुजरात: टेंडर वैलिडिटी 120 से घटाकर 90 दिन, मंजूरी के लिए 51 66 दिन की समय सीमा तय

सारांश

गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडिटी 120 से घटाकर 90 दिन कर दी है और मंजूरी की समय सीमा 51 66 दिन तय की है। इस सुधार में जवाबदेही तंत्र भी शामिल है — देरी होने पर संबंधित अधिकारी जिम्मेदार होगा। सड़क, पुल और सरकारी भवन जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ इसके दायरे में आएंगी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने टेंडर वैलिडिटी 120 दिनों से घटाकर 90 दिन की।
केवल फाइनेंशियल बिड वाले टेंडर की मंजूरी अब अधिकतम 51 दिनों में होगी।
तकनीकी एवं वित्तीय बिड वाले टेंडर की पूरी प्रक्रिया 66 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।
नेगोशिएशन अब केवल एक स्तर पर — सक्षम अधिकारी के स्तर पर — होगी; बहु स्तरीय बातचीत पर रोक।
समय सीमा उल्लंघन पर संबंधित अधिकारी की जवाबदेही तय करने का प्रावधान।
सड़क, पुल और सरकारी भवनों सहित सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ नई व्यवस्था के दायरे में।

गुजरात सरकार ने 20 सितंबर 2026 को राज्य में विकास और निर्माण कार्यों के लिए टेंडर मंजूरी की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने का बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल की सरकार ने टेंडर वैलिडिटी की अवधि को मौजूदा 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया है और विभिन्न श्रेणी के टेंडरों की मंजूरी के लिए स्पष्ट समय सीमाएँ निर्धारित की हैं। इस पहल का उद्देश्य प्रशासनिक देरी को कम करना और इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को तय समय पर शुरू करना है।

नई समय सीमाएँ: क्या बदला

नई व्यवस्था के अंतर्गत टेंडरों को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। जिन टेंडरों में कॉन्ट्रैक्टर की प्री क्वालिफिकेशन की जरूरत नहीं होती और केवल फाइनेंशियल बिड शामिल होती है, उनकी संपूर्ण मंजूरी प्रक्रिया अधिकतम 51 दिनों में पूरी करनी होगी। इसमें फील्ड या क्षेत्रीय कार्यालय स्तर से लेकर सचिवालय और वित्त विभाग तक की समूची प्रक्रिया शामिल है।

दूसरी ओर, जिन टेंडरों में कॉन्ट्रैक्टर की प्री क्वालिफिकेशन अनिवार्य है और जिनमें तकनीकी एवं वित्तीय दोनों बिड्स का मूल्यांकन होता है, उनके लिए पूरी प्रक्रिया — सभी स्तरों पर जाँच सहित — 66 दिनों के भीतर पूरी करनी होगी।

नेगोशिएशन पर अंकुश

सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में बातचीत (नेगोशिएशन) को भी सीमित करने का निर्णय लिया है। निर्धारित व्यापक प्रचार प्रसार के बाद यदि एक से अधिक टेंडर प्राप्त होते हैं, तो सामान्य परिस्थितियों में नेगोशिएशन से बचा जाएगा। यदि नेगोशिएशन अपरिहार्य समझी जाती है, तो वह केवल एक स्तर पर — यानी सक्षम अधिकारी के स्तर पर — ही की जाएगी। कई स्तरों पर बातचीत की अनुमति नहीं होगी।

जवाबदेही तंत्र

नई प्रणाली में समय सीमा उल्लंघन के लिए जवाबदेही तय करने का भी स्पष्ट प्रावधान है। यदि किसी प्रस्ताव पर तय अवधि के भीतर कार्रवाई नहीं होती, तो संबंधित स्तर पर देरी के कारणों को दर्ज करना होगा और देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी। यदि प्रस्ताव अधूरा होने के कारण देरी होती है, तो उसकी जिम्मेदारी उस स्तर पर होगी जहाँ से प्रस्ताव प्रेषित किया गया था।

किन परियोजनाओं पर लागू होगा

ये बदलाव सड़कें, पुल, सरकारी भवनों सहित विभिन्न इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के टेंडर मंजूरी पर लागू होंगे। अधिकारियों के अनुसार, "यह प्रक्रिया प्रशासनिक देरी को कम करने और नागरिकों को जल्द सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तथा सेवाओं का लाभ दिलाने में भी मदद करेगी।"

आगे क्या होगा

यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में कई बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएँ प्रशासनिक देरी के कारण अपेक्षित समय से पीछे चल रही हैं। गौरतलब है कि गुजरात देश में 'ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस' सुधारों के मामले में अग्रणी राज्यों में रहा है, और यह निर्णय उसी दिशा में एक और कदम माना जा रहा है। नई समय सीमाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर ही इस सुधार की सफलता निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन है। राज्य में पूर्व में भी प्रशासनिक सुधारों की घोषणाएँ हुई हैं, जिनका ज़मीनी असर सीमित रहा क्योंकि जवाबदेही तंत्र कमज़ोर था। इस बार देरी पर अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने का प्रावधान एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन यह देखना होगा कि क्या इसे वास्तव में लागू किया जाएगा या यह महज काग़ज़ी आदेश बनकर रह जाएगा। ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस में अग्रणी राज्य के रूप में गुजरात की साख को यह सुधार मज़बूत कर सकता है — बशर्ते परियोजनाओं की वास्तविक प्रारंभ तिथियाँ नई समय सीमाओं के अनुरूप हों।
RashtraPress
20 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात सरकार ने टेंडर प्रक्रिया में क्या बदलाव किए हैं?
गुजरात सरकार ने टेंडर वैलिडिटी को 120 दिनों से घटाकर 90 दिन कर दिया है और मंजूरी के लिए स्पष्ट समय सीमाएँ तय की हैं — फाइनेंशियल बिड के लिए 51 दिन और तकनीकी व वित्तीय दोनों बिड वाले टेंडर के लिए 66 दिन। नेगोशिएशन को एक स्तर तक सीमित किया गया है और देरी के लिए अधिकारी की जवाबदेही का प्रावधान भी जोड़ा गया है।
नई टेंडर व्यवस्था किन परियोजनाओं पर लागू होगी?
यह नई व्यवस्था सड़क, पुल, सरकारी भवनों सहित गुजरात में विकास और निर्माण से जुड़ी सभी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के टेंडर मंजूरी पर लागू होगी। इसमें फील्ड कार्यालय से लेकर सचिवालय और वित्त विभाग तक की पूरी प्रक्रिया शामिल है।
टेंडर में नेगोशिएशन को लेकर नया नियम क्या है?
नए नियम के अनुसार, यदि तय प्रचार प्रसार के बाद एक से अधिक टेंडर प्राप्त होते हैं तो सामान्यतः नेगोशिएशन से बचा जाएगा। यदि नेगोशिएशन अनिवार्य हो, तो वह केवल एक स्तर — यानी सक्षम अधिकारी के स्तर — पर ही होगी; बहु स्तरीय बातचीत की अनुमति नहीं होगी।
समय सीमा न पालने पर क्या होगा?
यदि तय समय सीमा में कार्रवाई नहीं होती, तो देरी के कारणों को संबंधित स्तर पर दर्ज करना होगा और जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही निर्धारित की जाएगी। यदि प्रस्ताव अधूरा होने के कारण देरी हुई, तो जवाबदेही उस स्तर पर होगी जहाँ से प्रस्ताव भेजा गया था।
इस बदलाव का आम नागरिकों पर क्या असर होगा?
अधिकारियों के अनुसार, इस सुधार से प्रशासनिक देरी कम होगी और नागरिकों को सड़क, पुल व सरकारी भवन जैसी सार्वजनिक सेवाएँ और इंफ्रास्ट्रक्चर तेज़ी से मिल सकेंगे। परियोजनाओं के तय शेड्यूल पर शुरू होने से विकास कार्यों में आने वाली लागत वृद्धि पर भी लगाम लगने की उम्मीद है।
राष्ट्र प्रेस
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