डूसू चुनाव: एबीवीपी ने 4 में से 3 सीटें जीतीं, भाजपा नेताओं ने कांग्रेस-केजरीवाल पर साधा निशाना
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव 2026 के नतीजों में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने 4 में से 3 प्रमुख सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने बाजी मारी। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस जीत को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में युवाओं के भरोसे का प्रमाण बताते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
मुख्य चुनाव परिणाम
एबीवीपी ने 20 सितंबर 2026 को घोषित डूसू चुनाव नतीजों में तीन अहम सीटें अपने नाम कीं। वाइस प्रेसिडेंट के पद पर निर्दलीय उम्मीदवार शौकीन ने जीत दर्ज की। भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) — कांग्रेस का छात्र संगठन — एक भी सीट नहीं जीत सका।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
श्रीनगर से भाजपा सांसद सत शर्मा ने कहा, 'देश में एक अच्छा बदलाव हो रहा है। लोगों को पता है कि एबीवीपी एक ऐसा छात्र संगठन है जो लगातार छात्रों के बीच रहता है, उनकी परेशानियों और मुश्किलों को सुनता है और उन्हें हल करने की कोशिश करता है। एनएसयूआई की बात करें तो कांग्रेस ने अपनी पूरी ताकत लगा दी, फिर भी उनके लोग एक भी सीट नहीं जीत पाए।'
दिल्ली से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने नतीजों को विपक्ष के लिए 'करारा जवाब' करार देते हुए कहा, 'इस नतीजे से पूरा विपक्ष बेनकाब हो गया है। एबीवीपी ने तीन अहम सीटें जीतीं, जो साफ तौर पर दिखाता है कि देश के युवाओं और छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर पूरा भरोसा है। दूसरी ओर विपक्षी पार्टियाँ हैं, जिनका एकमात्र काम अपने राजनीतिक फायदे के लिए माहौल खराब करना है।'
राहुल गांधी के कार्यक्रम पर तंज
हैदराबाद से भाजपा नेता टी.आर. श्रीनिवास ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम पर कटाक्ष करते हुए डूसू नतीजों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा, 'दिल्ली में राहुल गांधी की छात्रों की गूंज सुनाई नहीं दे रही है।' श्रीनिवास ने बोस्टन के अल्बर्ट आइंस्टीन इंस्टीट्यूट और बेलग्रेड के कैनवस इंस्टीट्यूट का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि विपक्षी छात्र नेताओं ने वहाँ से 'टूलकिट' प्रशिक्षण लिया है, जो भारत में काम नहीं आएगा।
श्रीनिवास ने आगे कहा, 'छात्रों का भरोसा और विश्वास मोदी पर ही बना रहा। इस संदर्भ में केजरीवाल और राहुल गांधी के लिए एक बहुत पुराना गाना है — दिल के अरमान आंसुओं में बह गए — बस इसे गुनगुनाते रहिए। संक्षेप में कहें तो यही उनकी असल स्थिति है।'
राजनीतिक संदर्भ
गौरतलब है कि डूसू चुनाव राष्ट्रीय राजनीतिक दलों के लिए छात्र जनमत का एक महत्वपूर्ण पैमाना माना जाता है। यह ऐसे समय में आया है जब आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस दोनों दिल्ली में युवा मतदाताओं से जुड़ने की कोशिश में हैं। एबीवीपी की लगातार मजबूत उपस्थिति इस चुनाव में भाजपा के लिए नैरेटिव-निर्माण का अवसर बन गई है।
आगे क्या
नवनिर्वाचित छात्रसंघ पदाधिकारी जल्द ही कार्यभार ग्रहण करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इन नतीजों का असर दिल्ली विश्वविद्यालय परिसर की आंतरिक राजनीति के साथ-साथ आगामी राज्य और राष्ट्रीय चुनावों के पूर्व युवा राजनीति की दिशा पर भी पड़ सकता है।