डूसू चुनाव में एबीवीपी की जीत पर अमित शाह बोले — 'राष्ट्रविरोधी ताकतों को करारा जवाब'
सारांश
मुख्य बातें
गृह मंत्री अमित शाह ने 19 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की जीत को 'राष्ट्रविरोधी ताकतों को स्पष्ट संदेश' बताया — उन ताकतों को, जो युवा शक्ति को अपने राष्ट्रविरोधी एजेंडे की प्रयोगशाला बनाना चाहती हैं। एबीवीपी ने चार में से तीन सीटें जीतीं, जबकि एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी रहा।
शाह का एक्स पर बयान
गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि दिल्ली विश्वविद्यालय सिर्फ एक शिक्षण संस्थान नहीं है — देश के कोने-कोने से छात्र यहाँ पढ़ने आते हैं, और इस विश्वविद्यालय का जनादेश पूरे भारत के युवाओं की भावनाओं का प्रतिबिंब है। उन्होंने आगे कहा कि एबीवीपी की यह जीत उन राष्ट्रविरोधी ताकतों को स्पष्ट संदेश है जो युवाओं को अपने एजेंडे का माध्यम बनाना चाहती हैं।
शाह ने यह भी कहा कि देश के युवा आज 'राष्ट्र प्रथम' की विचारधारा के साथ मजबूती से खड़े हैं, और यही इस जनादेश का सबसे बड़ा संदेश है। अपनी एक अन्य पोस्ट में उन्होंने एबीवीपी के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए कहा कि यह जीत छात्र कल्याण के प्रति संगठन की प्रतिबद्धता में युवाओं के अटूट विश्वास को दर्शाती है।
शाह ने अपनी पोस्ट में विश्वास जताया कि एबीवीपी के कार्यकर्ता इस जीत से नई ऊर्जा लेकर स्वामी विवेकानंद के आदर्शों का पालन करते हुए राष्ट्र-निर्माण के काम को आगे बढ़ाते रहेंगे।
रक्षा मंत्री और भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी एक्स पर एक पोस्ट में एबीवीपी की जीत को 'राष्ट्र प्रथम' नीति में युवाओं के अटूट विश्वास का प्रतीक बताया। उन्होंने विजयी उम्मीदवारों और कार्यकर्ताओं को बधाई देते हुए भरोसा जताया कि एबीवीपी छात्रों के हितों और राष्ट्र सेवा के लिए उसी समर्पण के साथ काम जारी रखेगा।
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि यह जीत 'राष्ट्र प्रथम' की भावना पर आधारित सकारात्मक और रचनात्मक छात्र राजनीति में युवाओं के विश्वास और 'विकसित भारत' की परिकल्पना में योगदान देने के उनके दृढ़ संकल्प को दर्शाती है।
पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह सफलता छात्र शक्ति के उत्साह, संगठन के प्रति विश्वास और राष्ट्रहित के प्रति युवाओं की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने भी सभी विजयी प्रत्याशियों और एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को बधाई और शुभकामनाएँ दीं।
डूसू चुनाव का महत्व
गौरतलब है कि दिल्ली विश्वविद्यालय देश के सबसे बड़े केंद्रीय विश्वविद्यालयों में से एक है, और डूसू चुनाव को राष्ट्रीय स्तर पर युवा राजनीति का बैरोमीटर माना जाता है। यहाँ के चुनावी नतीजे अक्सर राजनीतिक दलों और उनके छात्र संगठनों की ताकत को परखने की कसौटी बनते हैं।
यह ऐसे समय में आया है जब छात्र राजनीति में विचारधाराओं की टकराहट तेज हुई है। एबीवीपी की चार में से तीन सीटों पर जीत को सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) से जुड़े नेताओं ने व्यापक राजनीतिक संदर्भ में पेश किया है।
आगे की राह
नवनिर्वाचित छात्र संघ प्रतिनिधियों से अपेक्षा है कि वे विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ छात्रों से जुड़े मुद्दों पर संवाद करेंगे। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से आई बधाइयाँ संकेत देती हैं कि भाजपा इस जीत को संगठनात्मक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानती है।