UPI पर MDR विवाद: BJD नेता संतृप्त मिश्रा ने केंद्र से माँगे फंडिंग के वैकल्पिक रास्ते
सारांश
मुख्य बातें
बीजू जनता दल (BJD) के नेता संतृप्त मिश्रा ने 19 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्र सरकार से आग्रह किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने और साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए फंडिंग के वैकल्पिक तरीके खोजे जाएँ — और यह बोझ छोटे व्यवसायों या आम उपभोक्ताओं पर न डाला जाए। उनकी यह माँग ₹2,000 से अधिक के कुछ UPI लेनदेन पर हाल ही में घोषित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर उठे राष्ट्रव्यापी विवाद के बीच आई है।
मिश्रा की मुख्य दलीलें
पत्रकारों से बातचीत में संतृप्त मिश्रा ने कहा कि UPI एक 'अत्यंत महत्वपूर्ण इनोवेशन' है और इसकी तकनीकी प्रगति के लिए निरंतर निवेश अनिवार्य है। उन्होंने कहा, 'सवाल यह नहीं है कि फंडिंग की ज़रूरत है या नहीं — सवाल यह है कि फंडिंग कैसे होगी, खर्च कौन उठाएगा और इस प्रक्रिया में निरंतर निवेश कैसे सुनिश्चित होगा।'
उन्होंने स्पष्ट किया कि BJD का रुख है कि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों को सुरक्षा मिलनी चाहिए। उनके अनुसार, 'फंड जुटाने के कई और रास्ते हो सकते हैं — हमें उन सभी पर विचार करना चाहिए, न कि छोटे व्यवसायों पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ लादना चाहिए।'
नवीन पटनायक की चिंता और BJD का रुख
18 सितंबर 2026 को ओडिशा में विपक्ष के नेता और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक ने भी प्रस्तावित MDR पर चिंता ज़ाहिर करते हुए कहा था कि आम नागरिकों और छोटे दुकानदारों के हितों की रक्षा होनी चाहिए। यह ऐसे समय में आया है जब UPI देश भर में लाखों छोटे विक्रेताओं की आजीविका का अहम हिस्सा बन चुका है।
संसदीय समिति पर पारदर्शिता की माँग
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि वित्त मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने केंद्र सरकार के 'UPI टैक्स प्रस्ताव' पर चर्चा नहीं की। इस पर संतृप्त मिश्रा ने कहा कि उन्हें इस संबंध में जानकारी नहीं है, लेकिन उन्होंने समिति के अध्यक्ष भर्तृहरि महताब से आग्रह किया कि वे स्पष्ट करें कि समिति में UPI मुद्दे पर चर्चा हुई या नहीं और यदि हुई तो उसका स्वरूप क्या था।
मिश्रा ने यह भी कहा कि जनहित के मामलों में संसदीय समितियों के कामकाज में अधिक पारदर्शिता होनी चाहिए। 'जनता को यह जानने का अधिकार है कि किसी खास मुद्दे पर वास्तव में क्या चर्चा हुई और रचनात्मक सुझावों को क्यों नहीं माना गया।'
ओडिशा कांग्रेस की तीखी प्रतिक्रिया
ओडिशा कांग्रेस ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए UPI लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत MDR की तुलना ऐतिहासिक 'जजिया कर' से की। गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय उठा है जब भारत की डिजिटल भुगतान प्रणाली विश्व स्तर पर एक सफल मॉडल के रूप में उभरी है और इस पर शुल्क लगाने का कोई भी कदम करोड़ों उपयोगकर्ताओं को सीधे प्रभावित कर सकता है।
आगे क्या होगा
BJD, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के विरोध के मद्देनज़र केंद्र सरकार पर MDR प्रस्ताव की समीक्षा करने का दबाव बढ़ता दिख रहा है। भर्तृहरि महताब की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति की भूमिका और उसकी कार्यवाही का खुलासा इस पूरे विवाद की अगली महत्वपूर्ण कड़ी होगी।