UPI पर 0.4% MDR चार्ज: BJP बोली — ग्राहक पर नहीं पड़ेगा बोझ, कांग्रेस पर लगाया भ्रम फैलाने का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026। UPI पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर देशभर में राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने स्पष्ट किया है कि यह शुल्क आम उपभोक्ता की जेब पर नहीं पड़ेगा, जबकि विपक्षी दल — विशेषकर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) — इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले बोल रहे हैं। केंद्र सरकार की ओर से अभी अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन इस विषय पर बहस अपने चरम पर है।
मुख्य घटनाक्रम
जम्मू-कश्मीर से BJP प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने कहा कि UPI पर MDR लगाया जाना उचित नहीं है और वे इससे सहमत हैं। उन्होंने स्पष्ट किया, 'कमेटी ने यह कदम उठाया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से अभी तक कोई आदेश नहीं आया है। इस बात पर चर्चा चल रही है कि दुकानदारों पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।'
दिल्ली में BJP प्रवक्ता आरपी सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) नेता मनीष सिसोदिया के बयान पर पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि UPI पर बनी समिति में AAP के सदस्य भी शामिल थे और यह फैसला सर्वसम्मति से लिया गया था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के उस बयान का समर्थन किया जिसमें कहा गया कि जनता से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा।
BJP नेताओं का कांग्रेस पर हमला
हमीरपुर से BJP सांसद अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस की आलोचना को खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष को हमेशा कोई न कोई बहाना चाहिए होता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिजिटल लेनदेन शुरू किया था, तब कांग्रेस नेताओं ने देश में इंटरनेट और स्मार्टफोन की उपलब्धता पर सवाल उठाए थे।
विजयवाड़ा में BJP राष्ट्रीय परिषद की सदस्य यामिनी शर्मा ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी को शायद यह भी पता नहीं कि उनकी अपनी पार्टी के पाँच सांसदों — जिनमें पी. चिदंबरम शामिल हैं — ने UPI इकोसिस्टम पर 0.4 प्रतिशत की फीस का समर्थन किया है। उन्होंने कांग्रेस पर 'झूठ की दुकान' की तरह काम करने का आरोप लगाया।
BJP सांसद रेखा शर्मा ने कहा कि इस मामले में कोई विवाद नहीं है और ग्राहक पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि मुद्दों की कमी के चलते वह 'झूठे मुद्दे' तलाश रहा है।
दिल्ली में मंत्री मिथिलेश तिवारी ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि दिल्ली से राज्यों को भेजे गए 1 रुपये में से अलग-अलग कटौती के बाद सिर्फ 15 पैसे ही पहुँचते हैं। उन्होंने कहा कि वही कांग्रेस आज UPI पर सवाल उठा रही है।
सहयोगी दल की अलग राय
गठबंधन की साझेदार शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता मनीषा कायंदे ने सरकार से इस मामले पर पुनर्विचार की अपील की। उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही है और दूसरी ओर शुल्क भी लगाया जा रहा है, जो कोविड और नोटबंदी के बाद डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने की कोशिशों को झटका दे सकता है। उनका मत है कि व्यापारी अंततः यह चार्ज ग्राहकों पर ही डालेंगे।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब भारत में UPI लेनदेन का दायरा अभूतपूर्व रूप से बढ़ा है और छोटे दुकानदारों से लेकर रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं तक डिजिटल भुगतान की आदत बन चुकी है। गौरतलब है कि MDR शुल्क अभी तक केवल समिति के स्तर पर प्रस्तावित है; केंद्र सरकार का अंतिम आदेश अभी बाकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह शुल्क व्यापारियों पर लागू हुआ, तो उसके ग्राहकों तक पहुँचने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
क्या होगा आगे
फिलहाल सभी की नजरें केंद्र सरकार के अंतिम आदेश पर टिकी हैं। BJP ने आश्वस्त किया है कि आम उपभोक्ता पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं डाला जाएगा, लेकिन राजनीतिक बहस तब तक जारी रहने की संभावना है जब तक सरकार इस पर स्पष्ट नीतिगत घोषणा नहीं करती।