UPI पर MDR टैक्स: विपक्ष का आरोप — अमेरिकी कंपनियों को फायदा पहुँचाने की साज़िश
सारांश
मुख्य बातें
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के प्रस्ताव के विरुद्ध 16 सितंबर को विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी (APCC), राष्ट्रीय जनता दल (RJD), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) के नेताओं ने आरोप लगाया कि यह कदम आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर आर्थिक बोझ डालेगा तथा अमेरिकी तकनीकी कंपनियों के हितों की पूर्ति करेगा। सभी नेताओं ने सरकार से इस निर्णय को तत्काल वापस लेने की माँग की।
क्या है विवाद का केंद्र
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार, ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट यूपीआई ट्रांजैक्शन पर 0.4 फीसदी का शुल्क लगाया जा सकता है। यूपीआई को वर्षों तक शून्य-शुल्क प्रणाली के रूप में प्रचारित किया गया था और सरकार ने शुरुआती दौर में स्पष्ट किया था कि MDR के तहत इस तरह के लेनदेन पर कोई प्रभार नहीं लगेगा। विपक्ष का कहना है कि अब इस नीति को पलटना डिजिटल भुगतान की दिशा में की गई प्रगति को नुकसान पहुँचा सकता है।
नेताओं की प्रतिक्रियाएँ
APCC के वाइस प्रेसिडेंट गुरुनाधम ने कहा, 'शहरों व मेट्रो इलाकों में लोग अब चाय-कॉफी के लिए भी यूपीआई से पेमेंट करने के आदी हो गए हैं। शुरुआत में भारत सरकार ने कहा था कि ऐसे ट्रांजेक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। अब सरकार कारोबारियों और आम लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है। इस फैसले पर सरकार को दोबारा विचार करना चाहिए।'
RJD सांसद मनोज झा ने इस कदम को 'अमेरिकी साम्राज्यवाद' से जोड़ते हुए कहा, 'लोगों को डिजिटल ट्रांजैक्शन अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप लोग कैश ट्रांजेक्शन से दूर होने लगे थे। अब आप यह शुरू कर रहे हैं और हम जानते हैं कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं। यह आपका अपना फैसला नहीं है।' उन्होंने चेतावनी दी कि इससे लोग फिर से नकद लेनदेन की ओर लौट सकते हैं।
NCP (शरद पवार गुट) के राष्ट्रीय प्रवक्ता क्लाइड क्रास्टो ने कहा, 'अगर कोई व्यक्ति कुछ खरीदता है, तो दुकानदार को टैक्स देना होगा। कौन सा दुकानदार अपनी जेब से यह टैक्स देगा? कहीं न कहीं, वह इस बोझ को उस ग्राहक पर डालने का तरीका ढूंढ ही लेगा जो खरीदारी कर रहा है।' उन्होंने सरकार से 'लोगों के विरुद्ध काम करना बंद' करने का आह्वान किया।
कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र राजपूत ने सीधे अमेरिकी कंपनियों का नाम लेते हुए आरोप लगाया, 'भाजपा एक तरफ डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा दे रही थी और अब आम आदमी की जेब काटने की तैयारी कर रही है। अमेरिका की कंपनी गूगल, यूपीआई वालमार्ट को फायदा पहुँचाने के लिए यूपीआई ट्रांजेक्शन पर टैक्स लगाने की कवायद की जा रही है।'
आम जनता और व्यापारियों पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि MDR लागू होता है, तो इसका सबसे अधिक असर छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और उन उपभोक्ताओं पर पड़ेगा जो रोज़मर्रा की खरीदारी के लिए यूपीआई का उपयोग करते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत में यूपीआई लेनदेन की संख्या लगातार नए रिकॉर्ड बना रही है और डिजिटल भुगतान को वित्तीय समावेश का एक अहम स्तंभ माना जा रहा है।
क्या होगा आगे
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने अभी तक इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया है। विपक्ष की माँग है कि सरकार संसद में इस विषय पर चर्चा करे और छोटे व्यापारियों व उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए MDR प्रस्ताव को वापस ले। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक और नीतिगत बहस तेज़ होने की संभावना है।