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यूपीआई पर एमडीआर का प्रस्ताव शुरुआती चरण में — आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले, लागत किसी को तो चुकानी होगी

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यूपीआई पर एमडीआर का प्रस्ताव शुरुआती चरण में — आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले, लागत किसी को तो चुकानी होगी

सारांश

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ़ कहा — UPI चलाने की लागत किसी को तो देनी होगी, पर उपभोक्ता पर बोझ डालना अनिवार्य नहीं। वित्त मंत्रालय का ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर व्यापारियों से MDR वसूलने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मुंबई प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि UPI की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन आम उपभोक्ताओं पर इसका बोझ डालना ज़रूरी नहीं।
वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया है।
प्रस्ताव के अनुसार ₹2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर व्यापारियों से MDR वसूलने की कानूनी गुंजाइश बन सकती है।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, 90% से अधिक रोज़मर्रा के UPI लेनदेन किसी भी MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर कोई MDR लागू नहीं है; प्रस्तावित संशोधन इस व्यवस्था में बदलाव का रास्ता खोलेगा।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 अगस्त 2025 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली को सुचारू रखने की लागत अंततः किसी न किसी को वहन करनी होगी — लेकिन यह भार सीधे आम उपभोक्ताओं पर डाले जाने की अनिवार्यता नहीं है। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावना पर उन्होंने कहा कि अभी कोई भी निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।

गवर्नर ने क्या कहा

मल्होत्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, 'इस बारे में अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाज़ी होगी। आने वाले घटनाक्रम का इंतज़ार करना चाहिए। आखिरकार लागत किसी न किसी को वहन करनी होती है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि इसका भार आम उपभोक्ताओं पर ही पड़े।' गौरतलब है कि पिछले महीने भी उन्होंने डिजिटल भुगतान अवसंरचना की लागत को किसी न किसी रूप में पूरा करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया था।

वित्त मंत्रालय का प्रस्तावित संशोधन

वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया है। इस संशोधन का उद्देश्य शून्य-शुल्क से जुड़े कठोर प्रावधानों को हटाकर सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क-संबंधी अधिसूचना जारी करने की अधिक नीतिगत लचीलापन देना है। प्रस्ताव के अनुसार, ₹2,000 से अधिक मूल्य के UPI लेनदेन पर व्यापारियों से MDR वसूलने की कानूनी गुंजाइश बनाई जा सकती है।

वर्तमान कानून के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI एवं RuPay डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित माध्यमों पर कोई शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इस व्यवस्था में परिवर्तन का रास्ता खोल सकता है।

आम उपभोक्ताओं पर असर

वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्ज़ी, किराना और अन्य रोज़मर्रा की खरीदारी से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक UPI लेनदेन किसी भी संभावित MDR के दायरे में नहीं आएंगे। यानी आम नागरिकों के दैनिक भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क लगने की संभावना फिलहाल बेहद कम है। सरकार और RBI दोनों ने संकेत दिया है कि किसी भी बदलाव का ध्येय डिजिटल भुगतान प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है।

मौजूदा एमडीआर व्यवस्था

यह ऐसे समय में आया है जब क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के ज़रिए होने वाले लेनदेन पर MDR पहले से लागू है। हालाँकि अधिकांश व्यापारी यह अतिरिक्त लागत सीधे ग्राहकों से नहीं वसूलते और स्वयं वहन करते हैं। UPI के लिए इसी मॉडल की संभावना तलाशी जा रही है, जहाँ बोझ उपभोक्ता की बजाय व्यापारी पर पड़े।

आगे क्या होगा

UPI पर MDR को लेकर अंतिम निर्णय भविष्य की परिस्थितियों और नीतिगत ज़रूरतों के आधार पर लिया जाएगा। प्रस्तावित कानूनी संशोधन अभी संसद में विचाराधीन है और किसी भी शुल्क-ढाँचे की अधिसूचना के लिए सरकार को अलग से कदम उठाने होंगे। डिजिटल भुगतान उद्योग और उपभोक्ता संगठन इस विषय पर बारीकी से नज़र बनाए हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

उतनी अधिक अवसंरचना लागत, और उतना ही कम राजस्व। सरकार वर्षों से इस लागत को सब्सिडी देती रही है, लेकिन अब धारा 10A संशोधन के ज़रिए वह कानूनी लचीलापन तैयार कर रही है जो भविष्य में शुल्क लगाने का विकल्प खुला रखे। असली सवाल यह नहीं कि MDR लगेगा या नहीं — बल्कि यह है कि जब लगेगा, तो उसका बोझ व्यापारी उठाएगा या उपभोक्ता। ₹2,000 की सीमा और '90% लेनदेन मुक्त' का आश्वासन राजनीतिक बचाव की भाषा लगती है — क्योंकि छोटे व्यापारी अतिरिक्त लागत अंततः कीमतों में जोड़ते हैं।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर एमडीआर क्या होता है और यह प्रस्ताव क्यों चर्चा में है?
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारी से वसूला जाता है। वर्तमान में UPI पर यह शून्य है, लेकिन वित्त मंत्रालय के प्रस्तावित संशोधन से भविष्य में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर यह लागू हो सकता है।
क्या आम उपभोक्ताओं को यूपीआई इस्तेमाल करने पर शुल्क देना होगा?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सामान्य उपभोक्ताओं के नियमित UPI भुगतान आगे भी निःशुल्क बने रहेंगे। 90% से अधिक रोज़मर्रा के लेनदेन — जैसे किराना, सब्ज़ी — किसी भी संभावित MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में क्या बदलाव प्रस्तावित है?
वित्त मंत्रालय ने अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में रखा है, जिससे शून्य-शुल्क के कठोर प्रावधान हटेंगे और सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर शुल्क-संबंधी अधिसूचना जारी करने की स्वतंत्रता मिलेगी।
आरबीआई गवर्नर ने यूपीआई एमडीआर पर क्या रुख अपनाया है?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी और आने वाले घटनाक्रम का इंतज़ार करना चाहिए। उन्होंने माना कि डिजिटल भुगतान की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन यह बोझ सीधे उपभोक्ताओं पर डालना ज़रूरी नहीं।
क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर एमडीआर कैसे काम करता है और यूपीआई से क्या फर्क है?
क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR पहले से लागू है, जिसे अधिकांश व्यापारी स्वयं वहन करते हैं और ग्राहकों से नहीं वसूलते। UPI पर अभी कोई MDR नहीं है — प्रस्तावित संशोधन इसी अंतर को नीतिगत रूप से बदलने का विकल्प खुला रखता है।
राष्ट्र प्रेस
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