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यूपीआई पर एमडीआर का प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, लागत किसी को तो चुकानी होगी

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यूपीआई पर एमडीआर का प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, लागत किसी को तो चुकानी होगी

सारांश

UPI पर MDR लागू होगा या नहीं — यह सवाल अभी अनुत्तरित है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ कहा कि डिजिटल भुगतान की लागत किसी को तो चुकानी होगी, लेकिन उपभोक्ताओं पर बोझ डालना अनिवार्य नहीं। वित्त मंत्रालय का धारा 10A संशोधन प्रस्ताव इस पूरी बहस को नया आयाम दे रहा है।

मुख्य बातें

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 5 अगस्त 2026 को कहा कि UPI की परिचालन लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, पर आम उपभोक्ताओं पर बोझ अनिवार्य नहीं।
UPI पर MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) लागू करने का प्रस्ताव अभी शुरुआती चरण में है; कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ।
वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जो सरकार को भविष्य में शुल्क अधिसूचना जारी करने की स्वतंत्रता देगा।
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, रोज़मर्रा के 90% से अधिक UPI लेनदेन किसी भी संभावित MDR के दायरे से बाहर रहेंगे।
₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से शुल्क लेने की संभावना पर विचार हो रहा है; सामान्य उपभोक्ता भुगतान निःशुल्क रहेंगे।

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने की लागत किसी न किसी रूप में वहन करनी होगी — लेकिन यह बोझ जरूरी नहीं कि आम उपभोक्ताओं के कंधों पर डाला जाए। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और इस पर जल्दबाजी में राय देना उचित नहीं होगा।

गवर्नर ने क्या कहा

मल्होत्रा ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, 'इस बारे में अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी। आने वाले घटनाक्रम का इंतजार करना चाहिए। आखिरकार लागत किसी न किसी को वहन करनी होती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि इसका भार आम उपभोक्ताओं पर ही पड़े।' गौरतलब है कि पिछले महीने भी उन्होंने डिजिटल भुगतान अवसंरचना को बनाए रखने और विकसित करने की लागत को किसी न किसी रूप में पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।

फिलहाल आम उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव या नीतिगत ढाँचा सामने नहीं आया है।

वित्त मंत्रालय का प्रस्तावित संशोधन

इस बीच, वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य शून्य-शुल्क से जुड़े कठोर प्रावधानों को हटाकर सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क संबंधी अधिसूचना जारी करने की अधिक स्वतंत्रता देना है। लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक के अनुसार, सरकार को यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि कौन से भुगतान माध्यम शुल्क-मुक्त रहेंगे और किन पर भविष्य में MDR लागू हो सकता है।

वर्तमान कानून के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI एवं RuPay डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित माध्यमों पर कोई शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इस व्यवस्था में बदलाव का रास्ता खोल सकता है।

आम उपभोक्ताओं पर असर

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्जी, किराना और अन्य रोज़मर्रा की खरीदारी से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक UPI लेनदेन किसी भी संभावित MDR शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ₹2,000 से अधिक मूल्य के UPI ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से शुल्क लेने की संभावना को कानूनी आधार देने पर विचार हो रहा है — लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं के नियमित भुगतान आगे भी निःशुल्क बने रहेंगे।

यह ऐसे समय में आया है जब UPI की लेनदेन मात्रा लगातार बढ़ रही है और डिजिटल भुगतान अवसंरचना की परिचालन लागत भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर MDR लागू होता है, जिसे अधिकांश व्यापारी स्वयं वहन करते हैं और सीधे ग्राहकों पर नहीं डालते।

आगे क्या होगा

सरकार और RBI दोनों ने संकेत दिया है कि किसी भी संभावित बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। UPI पर MDR को लेकर अंतिम निर्णय भविष्य की परिस्थितियों और नीतिगत आवश्यकताओं के आधार पर लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक परामर्श और संसदीय समिति की समीक्षा आवश्यक होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

न ना। लेकिन वित्त मंत्रालय का धारा 10A संशोधन प्रस्ताव यह संकेत देता है कि नीतिगत दिशा तय हो चुकी है, केवल समय और राजनीतिक माहौल का इंतजार है। असली सवाल यह नहीं कि MDR लगेगा या नहीं, बल्कि यह है कि लागत का बोझ व्यापारी उठाएंगे या अंततः वह ग्राहकों तक पहुँचेगा — जैसा क्रेडिट कार्ड के मामले में अक्सर होता है। UPI की सफलता काफी हद तक उसकी शून्य-लागत की छवि पर टिकी है; MDR का कोई भी रूप उस भरोसे को चुनौती दे सकता है और छोटे व्यापारियों को नकद लेनदेन की ओर वापस धकेल सकता है।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

यूपीआई पर एमडीआर क्या होता है और यह अभी क्यों चर्चा में है?
MDR (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) वह शुल्क है जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने पर व्यापारियों से लिया जाता है। वर्तमान में UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर यह शून्य है। वित्त मंत्रालय के धारा 10A संशोधन प्रस्ताव और RBI गवर्नर के बयान के बाद यह विषय फिर से चर्चा में आ गया है।
क्या यूपीआई से पैसे भेजना भविष्य में महंगा हो जाएगा?
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, सामान्य उपभोक्ताओं के नियमित UPI भुगतान आगे भी निःशुल्क बने रहेंगे। 90% से अधिक रोज़मर्रा के लेनदेन किसी भी संभावित MDR के दायरे से बाहर रहेंगे; केवल ₹2,000 से अधिक के व्यापारिक लेनदेन पर शुल्क की संभावना पर विचार हो रहा है।
वित्त मंत्रालय का भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव क्या है?
वित्त मंत्रालय ने अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव लोकसभा में पेश किया है। इसके तहत शून्य-शुल्क के कठोर प्रावधान हटाकर सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क अधिसूचना जारी करने की अधिक स्वतंत्रता दी जाएगी।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने यूपीआई लागत पर क्या कहा?
मल्होत्रा ने 5 अगस्त 2026 को मुंबई में कहा कि UPI जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली की लागत किसी न किसी को वहन करनी होगी, लेकिन इसका बोझ आम उपभोक्ताओं पर डालना अनिवार्य नहीं है। उन्होंने MDR पर कोई अंतिम राय देने से यह कहते हुए परहेज किया कि अभी इस पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी।
क्रेडिट और डेबिट कार्ड पर एमडीआर कैसे काम करता है, और यूपीआई से क्या फर्क है?
वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड लेनदेन पर MDR लागू होता है, जिसे अधिकांश व्यापारी स्वयं वहन करते हैं। UPI और RuPay डेबिट कार्ड पर अभी MDR शून्य है। प्रस्तावित संशोधन इस अंतर को बदल सकता है, हालाँकि सरकार ने उपभोक्ताओं पर सीधा बोझ न डालने का संकेत दिया है।
राष्ट्र प्रेस
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