यूपीआई पर एमडीआर का प्रस्ताव अभी शुरुआती दौर में: आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा, लागत किसी को तो चुकानी होगी
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) जैसी डिजिटल भुगतान प्रणाली को संचालित करने की लागत किसी न किसी रूप में वहन करनी होगी — लेकिन यह बोझ जरूरी नहीं कि आम उपभोक्ताओं के कंधों पर डाला जाए। UPI पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावनाओं पर उन्होंने कहा कि अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है और इस पर जल्दबाजी में राय देना उचित नहीं होगा।
गवर्नर ने क्या कहा
मल्होत्रा ने पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, 'इस बारे में अभी कुछ कहना बहुत जल्दबाजी होगी। आने वाले घटनाक्रम का इंतजार करना चाहिए। आखिरकार लागत किसी न किसी को वहन करनी होती है, लेकिन जरूरी नहीं है कि इसका भार आम उपभोक्ताओं पर ही पड़े।' गौरतलब है कि पिछले महीने भी उन्होंने डिजिटल भुगतान अवसंरचना को बनाए रखने और विकसित करने की लागत को किसी न किसी रूप में पूरा करने की आवश्यकता पर जोर दिया था।
फिलहाल आम उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर कोई औपचारिक प्रस्ताव या नीतिगत ढाँचा सामने नहीं आया है।
वित्त मंत्रालय का प्रस्तावित संशोधन
इस बीच, वित्त मंत्रालय ने भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव रखा है। इसका उद्देश्य शून्य-शुल्क से जुड़े कठोर प्रावधानों को हटाकर सरकार को भविष्य में विभिन्न डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क संबंधी अधिसूचना जारी करने की अधिक स्वतंत्रता देना है। लोकसभा में पेश किए गए इस विधेयक के अनुसार, सरकार को यह तय करने का अधिकार मिलेगा कि कौन से भुगतान माध्यम शुल्क-मुक्त रहेंगे और किन पर भविष्य में MDR लागू हो सकता है।
वर्तमान कानून के तहत बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को UPI एवं RuPay डेबिट कार्ड जैसे अधिसूचित माध्यमों पर कोई शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। प्रस्तावित संशोधन इस व्यवस्था में बदलाव का रास्ता खोल सकता है।
आम उपभोक्ताओं पर असर
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, दूध, सब्जी, किराना और अन्य रोज़मर्रा की खरीदारी से जुड़े 90 प्रतिशत से अधिक UPI लेनदेन किसी भी संभावित MDR शुल्क के दायरे में नहीं आएंगे। वरिष्ठ अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि ₹2,000 से अधिक मूल्य के UPI ट्रांजैक्शन पर व्यापारियों से शुल्क लेने की संभावना को कानूनी आधार देने पर विचार हो रहा है — लेकिन सामान्य उपभोक्ताओं के नियमित भुगतान आगे भी निःशुल्क बने रहेंगे।
यह ऐसे समय में आया है जब UPI की लेनदेन मात्रा लगातार बढ़ रही है और डिजिटल भुगतान अवसंरचना की परिचालन लागत भी उसी अनुपात में बढ़ रही है। वर्तमान में क्रेडिट कार्ड और डेबिट कार्ड के माध्यम से होने वाले लेनदेन पर MDR लागू होता है, जिसे अधिकांश व्यापारी स्वयं वहन करते हैं और सीधे ग्राहकों पर नहीं डालते।
आगे क्या होगा
सरकार और RBI दोनों ने संकेत दिया है कि किसी भी संभावित बदलाव का उद्देश्य डिजिटल भुगतान प्रणाली को दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ बनाना है। UPI पर MDR को लेकर अंतिम निर्णय भविष्य की परिस्थितियों और नीतिगत आवश्यकताओं के आधार पर लिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुद्दे पर सार्वजनिक परामर्श और संसदीय समिति की समीक्षा आवश्यक होगी।