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यूपीआई पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं, नया एमडीआर ढांचा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को करेगा मज़बूत: फोनपे सीईओ समीर निगम

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यूपीआई पर ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं, नया एमडीआर ढांचा डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को करेगा मज़बूत: फोनपे सीईओ समीर निगम

सारांश

फोनपे के सीईओ समीर निगम ने साफ किया — नया एमडीआर ढांचा आने के बाद भी यूपीआई यूजर्स के लिए सब कुछ पहले जैसा मुफ्त रहेगा। शुल्क केवल ₹2,000 से ऊपर के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगेगा, वह भी व्यापारी पर — ताकि सालाना ₹10,000–12,000 करोड़ की लागत वाला यूपीआई इकोसिस्टम टिकाऊ बना रहे।

मुख्य बातें

फोनपे सीईओ समीर निगम ने 16 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि नए एमडीआर ढांचे में यूपीआई ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा।
P2P और P2M — दोनों प्रकार के यूपीआई भुगतान उपयोगकर्ताओं के लिए पूरी तरह निःशुल्क रहेंगे।
₹1 लाख से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी एमडीआर के दायरे से बाहर; बड़े व्यापारियों के 96% ट्रांजैक्शन ( ₹2,000 से कम) पर भी कोई शुल्क नहीं।
₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% एमडीआर लागू, भुगतान व्यापारी करेगा।
यूपीआई इकोसिस्टम पर उद्योग का सालाना खर्च ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक है।
यूपीआई उपयोगकर्ता 2020 के 20 करोड़ से बढ़कर अब 50–55 करोड़ हो चुके हैं।

फोनपे के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समीर निगम ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को स्पष्ट किया कि नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) ढांचे के लागू होने के बाद भी यूपीआई उपयोगकर्ताओं से किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बदलाव भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को दीर्घकालिक रूप से वित्तीय रूप से टिकाऊ बनाने के लिए अनिवार्य है।

ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा

समीर निगम ने साफ शब्दों में कहा, 'नहीं, यूपीआई ग्राहकों के लिए कोई शुल्क नहीं है। ग्राहकों से यूपीआई इस्तेमाल करने के लिए कभी शुल्क नहीं लिया गया और भविष्य में भी नहीं लिया जाएगा।' उन्होंने बताया कि व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति-से-व्यापारी (P2M) — दोनों प्रकार के यूपीआई भुगतान ग्राहकों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहेंगे।

इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह भी कहा कि जो व्यापारी एमडीआर का भुगतान करेंगे, वे इस शुल्क का बोझ ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे।

एमडीआर का ढांचा और छूट की सीमा

नए ढांचे के अनुसार, ₹1 लाख से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी एमडीआर के दायरे से पूरी तरह बाहर रहेंगे। बड़े व्यापारियों के मामले में भी ₹2,000 से कम राशि के ट्रांजैक्शन — जो कुल लेनदेन का करीब 96 प्रतिशत हैं — किसी शुल्क के अधीन नहीं होंगे।

केवल ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा, और यह शुल्क व्यापारी वहन करेगा, ग्राहक नहीं।

इकोसिस्टम की वित्तीय ज़रूरत

समीर निगम ने बताया कि यूपीआई के बुनियादी ढांचे को चालू रखने के लिए उद्योग हर साल ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक खर्च करता है। यह खर्च केवल तकनीकी अवसंरचना तक सीमित नहीं है — बल्कि केवाईसी, साइबर सुरक्षा, जोखिम एवं धोखाधड़ी नियंत्रण, मर्चेंट चार्जबैक और पूंजीगत निवेश पर भी भारी राशि लगती है।

उन्होंने कहा, 'हमें ऐसा तरीका चाहिए था जिससे यह राजस्व वापस उद्योग में आ सके और यूपीआई का विकास टिकाऊ तरीके से जारी रह सके।'

यूपीआई की विकास यात्रा और भविष्य

गौरतलब है कि वर्ष 2020 में यूपीआई के करीब 20 करोड़ उपयोगकर्ता थे, जो अब बढ़कर 50 से 55 करोड़ तक पहुंच चुके हैं। समीर निगम ने भरोसा जताया कि नए एमडीआर ढांचे के बावजूद भारत का डिजिटल भुगतान बाजार तेज़ गति से विस्तार करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि नया राजस्व मॉडल फिनटेक क्षेत्र की निजी कंपनियों को मार्केटिंग, नवाचार, अनुसंधान और विकास में अधिक निवेश करने में सक्षम बनाएगा। एमडीआर से प्राप्त राजस्व उन बैंकों और कंपनियों के निवेश को समर्थन देगा जो यूपीआई इकोसिस्टम का अभिन्न हिस्सा हैं। निगम के अनुसार, 'यह बहुत जरूरी है कि व्यवसायों को उचित आय अर्जित करने का अवसर मिले।'

संपादकीय दृष्टिकोण

000 की सीमा और 0.4% की दर व्यापारियों के लिए दीर्घकालिक रूप से टिकाऊ साबित होगी, या वे अप्रत्यक्ष तरीकों से इसका बोझ उपभोक्ताओं पर डालने का रास्ता खोज लेंगे। गौरतलब है कि भारत ने 2020 में यूपीआई पर एमडीआर शून्य कर दिया था, जिससे फिनटेक कंपनियों की कमाई का प्रमुख ज़रिया खत्म हो गया था — अब इसकी आंशिक वापसी उद्योग की वित्तीय व्यवहार्यता के लिए जरूरी बताई जा रही है। सालाना ₹10,000–12,000 करोड़ की परिचालन लागत का तर्क सही है, लेकिन यह भी देखना होगा कि यह राजस्व वास्तव में इकोसिस्टम में पुनर्निवेशित होता है या मुनाफे में चला जाता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या नए एमडीआर ढांचे के बाद यूपीआई इस्तेमाल करने पर ग्राहकों को पैसे देने होंगे?
नहीं, फोनपे सीईओ समीर निगम के अनुसार यूपीआई ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। P2P और P2M — दोनों प्रकार के यूपीआई भुगतान उपयोगकर्ताओं के लिए पहले की तरह बिल्कुल मुफ्त रहेंगे।
नया यूपीआई एमडीआर ढांचा क्या है और यह किस पर लागू होगा?
नए एमडीआर ढांचे के तहत ₹2,000 से अधिक के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर 0.4% शुल्क लागू होगा, जिसका भुगतान व्यापारी करेगा। ₹1 लाख से कम वार्षिक कारोबार वाले छोटे व्यापारी इस दायरे से पूरी तरह बाहर हैं।
क्या व्यापारी एमडीआर का बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं?
नहीं, समीर निगम ने स्पष्ट किया कि एमडीआर का भुगतान करने वाले व्यापारी इस शुल्क को ग्राहकों पर नहीं डाल सकेंगे। यह प्रतिबंध ढांचे का हिस्सा है।
यूपीआई इकोसिस्टम पर उद्योग कितना खर्च करता है?
फोनपे सीईओ के अनुसार यूपीआई इकोसिस्टम को चालू रखने के लिए उद्योग हर साल ₹10,000 करोड़ से ₹12,000 करोड़ तक खर्च करता है। इसमें तकनीकी ढांचे के साथ-साथ KYC, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी नियंत्रण और पूंजीगत निवेश शामिल हैं।
भारत में अभी कितने यूपीआई उपयोगकर्ता हैं?
समीर निगम के अनुसार यूपीआई उपयोगकर्ताओं की संख्या 2020 के लगभग 20 करोड़ से बढ़कर अब 50 से 55 करोड़ तक पहुंच चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि नए राजस्व मॉडल से यह विकास और तेज़ होगा।
राष्ट्र प्रेस
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