7 अगस्त 2026
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यूपीआई ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा, छोटे व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा एमडीआर का बोझ: पीसीआई

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यूपीआई ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा, छोटे व्यापारियों पर नहीं पड़ेगा एमडीआर का बोझ: पीसीआई

सारांश

यूपीआई पर एमडीआर की चर्चा गर्म है, लेकिन पीसीआई ने साफ कर दिया — ग्राहकों और छोटे व्यापारियों की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। असली सवाल यह है कि अरबों ट्रांजैक्शन संभालने वाले इस नेटवर्क को टिकाऊ कैसे बनाया जाए।

मुख्य बातें

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह निःशुल्क बना रहेगा।
छोटे व्यापारियों पर कोई एमडीआर (MDR) लागू नहीं है और उन्हें यूपीआई स्वीकार करने पर कोई शुल्क नहीं देना होगा।
चल रही बहस उपभोक्ताओं पर शुल्क लगाने की नहीं, बल्कि यूपीआई नेटवर्क के दीर्घकालिक रखरखाव और स्थायित्व की है।
NPCI और RBI सहित बैंकों व फिनटेक कंपनियों ने पिछले एक दशक में यूपीआई ढाँचे में बड़ा निवेश किया है।
यूपीआई अब वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है।

पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने 7 अगस्त 2026 को स्पष्ट किया कि यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने को लेकर चल रही बहस के बावजूद आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह निःशुल्क बना रहेगा। साथ ही, छोटे कारोबारियों को भी यूपीआई भुगतान स्वीकार करने पर किसी प्रकार का शुल्क नहीं देना होगा।

पीसीआई का स्पष्टीकरण

उद्योग संगठन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी बयान में कहा कि वर्ष 2016 में लॉन्च होने के बाद से यूपीआई उपभोक्ताओं के लिए हमेशा मुफ्त रहा है। पीसीआई के अनुसार, 'देश का हर नागरिक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के तत्काल डिजिटल भुगतान करना जारी रख सकेगा।' व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं पर किसी प्रकार का ट्रांजैक्शन शुल्क लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

छोटे व्यापारियों की सुरक्षा

पीसीआई ने जोर देकर कहा कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी प्रकार का एमडीआर लागू नहीं है। संगठन के अनुसार, 'यूपीआई को इस तरह डिजाइन किया गया था कि देश के सबसे छोटे व्यवसाय भी बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान अपना सकें।' यूपीआई ने देश भर के लाखों छोटे दुकानदारों, ठेला विक्रेताओं, किराना कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमों को डिजिटल भुगतान का किफायती माध्यम उपलब्ध कराया है, जिससे नकदी पर निर्भरता घटी है और वित्तीय समावेशन को बल मिला है।

बहस किस बात पर है

पीसीआई ने स्पष्ट किया कि मौजूदा चर्चा उपभोक्ताओं से शुल्क वसूलने को लेकर नहीं, बल्कि उस विशाल डिजिटल ढाँचे के रखरखाव और दीर्घकालिक स्थायित्व को लेकर है, जो हर महीने अरबों लेनदेन संभाल रहा है। यह ऐसे समय में आया है जब तकनीकी उन्नयन, साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकथाम और परिचालन क्षमता को मजबूत करने की जरूरत लगातार बढ़ रही है।

यूपीआई का विस्तार और निवेश

गौरतलब है कि पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, फिनटेक कंपनियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मिलकर यूपीआई नेटवर्क के निर्माण और संचालन में बड़ा निवेश किया है। पीसीआई के अनुसार, यूपीआई अब एक साधारण भुगतान प्लेटफॉर्म से आगे बढ़कर दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है।

आगे की राह

जैसे-जैसे यूपीआई ट्रांजैक्शन की संख्या बढ़ रही है, इस नेटवर्क को टिकाऊ बनाए रखने के तरीकों पर उद्योग जगत में बहस जारी है। हालाँकि पीसीआई ने आश्वस्त किया है कि इस पूरी प्रक्रिया में आम उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों पर किसी तरह का वित्तीय बोझ नहीं डाला जाएगा। डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र की दीर्घकालिक सेहत और समावेशी विकास दोनों को साथ लेकर चलने की चुनौती आने वाले समय में नीति-निर्माताओं और उद्योग के सामने बनी रहेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल वह है जो अनुत्तरित रह गया — यदि उपभोक्ताओं और छोटे व्यापारियों से शुल्क नहीं लिया जाएगा, तो अरबों ट्रांजैक्शन संभालने वाले इस नेटवर्क की लागत कौन वहन करेगा? बैंकों और फिनटेक कंपनियों की लाभप्रदता पर यूपीआई का दबाव वर्षों से चर्चा में है, और सरकारी सब्सिडी मॉडल की सीमाएँ भी स्पष्ट हैं। बिना किसी स्पष्ट राजस्व ढाँचे के 'टिकाऊ डिजिटल इकोसिस्टम' की बात करना उस बड़े सवाल को टालना है, जिसका जवाब देर-सबेर देना ही होगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या यूपीआई ग्राहकों के लिए मुफ्त रहेगा?
हाँ, पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI) ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए यूपीआई पूरी तरह निःशुल्क बना रहेगा। वर्ष 2016 में लॉन्च के बाद से यूपीआई हमेशा उपभोक्ताओं के लिए मुफ्त रहा है और व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं पर कोई ट्रांजैक्शन शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है।
छोटे व्यापारियों पर एमडीआर का क्या असर होगा?
पीसीआई के अनुसार, छोटे व्यापारियों पर कोई एमडीआर लागू नहीं है और उन्हें यूपीआई भुगतान स्वीकार करने के लिए कोई शुल्क नहीं देना होगा। यूपीआई को शुरू से इस तरह डिजाइन किया गया था कि देश के सबसे छोटे व्यवसाय भी बिना अतिरिक्त लागत के डिजिटल भुगतान अपना सकें।
यूपीआई पर एमडीआर की बहस किस बारे में है?
यह बहस उपभोक्ताओं या छोटे व्यापारियों से शुल्क वसूलने को लेकर नहीं है, बल्कि यूपीआई के विशाल डिजिटल ढाँचे के दीर्घकालिक रखरखाव, तकनीकी उन्नयन, साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी रोकथाम की लागत को टिकाऊ तरीके से वहन करने को लेकर है। यह नेटवर्क हर महीने अरबों ट्रांजैक्शन संभालता है।
यूपीआई नेटवर्क में किसने निवेश किया है?
पिछले लगभग एक दशक में बैंकों, फिनटेक कंपनियों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने मिलकर यूपीआई नेटवर्क के निर्माण और संचालन में बड़ा निवेश किया है। आज यूपीआई दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम भुगतान प्रणाली बन चुका है।
यूपीआई का छोटे कारोबारियों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
यूपीआई ने देश भर के लाखों छोटे दुकानदारों, ठेला विक्रेताओं, किराना कारोबारियों और सूक्ष्म उद्यमों को डिजिटल भुगतान का आसान और किफायती माध्यम उपलब्ध कराया है। इससे नकदी पर निर्भरता कम हुई है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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